बरसात में नदी पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे

Updated at : 03 Jul 2019 1:06 AM (IST)
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बरसात में नदी पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे

टाटीझरिया : प्रखंड के खैरिका आदिवासी टोला के बच्चों को डुमर स्थित भंडरेनियां नदी पार कर स्कूल जाना पड़ता है. स्कूली बच्चों को बारिश में स्कूल आने-जाने में काफी परेशानी उठानी पड़ती है. बच्चे पढ़ाई करने के लिए नदी पार कर दूसरे गांव के स्कूल में जाते हैं. 30 वर्ष पूर्व नदी पर बना था […]

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टाटीझरिया : प्रखंड के खैरिका आदिवासी टोला के बच्चों को डुमर स्थित भंडरेनियां नदी पार कर स्कूल जाना पड़ता है. स्कूली बच्चों को बारिश में स्कूल आने-जाने में काफी परेशानी उठानी पड़ती है. बच्चे पढ़ाई करने के लिए नदी पार कर दूसरे गांव के स्कूल में जाते हैं.

30 वर्ष पूर्व नदी पर बना था पुल :
नदी का पुल खंभवा पंचायत के पूर्व मुखिया स्व कुंजो गोप के कार्यकाल में लगभग 30 वर्ष पूर्व बना था. जो बाढ़ आने से टूट गया. इसे टूटे 10 वर्ष बीत गये लेकिन इस पुल को दोबारा बनाने की पहल अभी तक न तो यहां के जनप्रतिनिधि और न ही प्रशासनिक अधिकारी ने की है.
हर वर्ष बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ जाता है.
इसके खतरनाक रूप को देख कर कई बच्चे स्कूल जाना बंद कर देते हैं. सभी बच्चे नदी और घने जंगल के बीच से पैदल स्कूल जाते हैं. सड़क भी काफी जर्जर है. जिस पर पैदल चलना मुश्किल है. जबकि बच्चों को स्कूल जाने के लिए नदी पार कर जाना ही एकमात्र रास्ता है. बरसात में बच्चे अपनी जान बचाने की चिंता के अलावा पाठय पुस्तक और जूता-चप्पल को बचाते हुए नदी पार करते हैं.
खैरिका आदिवासी टोला कक्षा सप्तम के छात्र वीरेंद्र हेंब्रम ने कहा कि हर दिन इसी तरह नदी पार कर स्कूल जाना पड़ता है.पुल व रास्ता न रहने से हम सभी लोग इसी तरह पैदल ही जाते-आते हैं. स्कूल जाने में काफी परेशानी उठानी पड़ती है. लेकिन क्या करें स्कूल नहीं छोड़ सकते.
इन बच्चों को होती है परेशानी : मुकेश हेंब्रम, ममता कुमारी, महेंद्र हेंब्रम, राजू हेंब्रम, दीपक बास्के, शंकर मुर्मू, प्रमीला कुमारी, लीला कुमारी, सरिता कुमारी, रीता कुमारी, सुशीला कुमारी, लीलावती कुमारी, बसंती कुमारी, सोनामती कुमारी, वीरेंद्र हेंब्रम सहित खैरिका आदिवासी टोला के 15 बच्चे स्कूल जाते है़.
बच्चों के लौटने तक लगी रहती है चिंता :अभिभावक मुन्ना मांझी, राधेश्याम मांझी, अर्जुन मांझी, दशरथ मांझी, सोनाराम मांझी, बसुदेव बास्के, महिलाल मांझी ने बताया कि हमारे बच्चे पिछले तीन सालों से इसी तरह स्कूल आ-जा रहे हैं. अभी तक हमारी परेशानी को कोई जनप्रतिनिधि व नेता जानने तक नहीं आये. इस गांव में पांचवीं कक्षा तक ही स्कूल है.
तीन साल तक वर्ग छह से आठ तक मध्य विद्यालय डुमर में बच्चे नदी पार कर पढ़ने जाते हैं. हमलोगों के बच्चों को तीन सालों तक घने जंगल व नदी पार कर पढ़ने के लिए जाना पड़ता है. बच्चे जब तक स्कूल से घर वापस नहीं आ जाते हैं तब तक उनकी चिंता लगी रहती है़ वर्ग नौ से 10 तक की पढ़ाई के लिए बच्चों को प्लस टू स्कूल धर्मपुर जना पड़ता है जो हमारे गांव से लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर है.
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