प्रकृति हमारी मां, इसे बचायें : सुदर्शन भगत

Updated at : 21 Mar 2026 8:54 PM (IST)
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प्रकृति हमारी मां, इसे बचायें : सुदर्शन भगत

सरहुल पर्व हमें भाईचारगी का संदेश देता है. हम सब मिल-जुल कर पर्व मनायें

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गुमला. सरहुल पर्व की शोभायात्रा में शामिल हुए पूर्व सांसद सुदर्शन भगत ने कहा कि मैं धरती माता को नमन करता हूं. प्रकृति हमारी जननी है, जो हमें जन्म देती है. दूसरी प्रकृति मां है, जिसके कोख पर हम खेल कर बड़े होते हैं. हम आज के दिन प्रकृति को बचाने का संकल्प लें. प्रकृति है, तो हमारा जीवन है. हम प्रकृति के पुजारी हैं. इसलिए हमारा कर्तव्य बनता है कि हम इसे बचायें. कहा कि सरहुल पर्व हमें भाईचारगी का संदेश देता है. हम सब मिल-जुल कर पर्व मनायें. पूर्व विधायक कमलेश उरांव ने कहा कि हम सभी प्रकृति के रक्षक बने. क्योंकि प्रकृति को हम बचायेंगे, तो प्रकृति हमारी रक्षा करेगी. आज गुमला में सरहुल पर्व का जो उत्साह है. यह उत्साह हमें प्रकृति से जोड़ती है. उन्होंने युवाओं से अपील की कि आप प्रकृति के संरक्षण के लिए काम करें. कहा है कि प्रकृति रहेगी, तभी हम रहेंगे. नप अध्यक्ष शकुंतला उरांव ने कहा है कि सरहुल पर्व हमें भाईचारगी का संदेश देता है. हम सब मिल-जुल कर पर्व मनायें. सरहुल नये जीवन की शुरूआत का पर्व है. केंद्रीय सरहुल संचालन समिति गुमला के केंद्रीय सचिव दीपनारायण उरांव ने कहा है कि सरहुल पर्व हमें प्रकृति से प्रेम करना सिखाता है. प्रकृति है, तो सब कुछ है. परंतु देखा जा रहा है कि विकास की होड़ में प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. भाजपा जिलाध्यक्ष सागर उरांव ने कहा है कि आदिवासी समाज का पर्व सरहुल प्रकृति से लगाव और अगाथ प्रेम की मिसाल है. प्राचीनकाल से ही सरहुल पर्व मनाया जा रहा है. वह परंपरा आज भी जीवित है. सरहुल पर्व को लेकर प्रकृति से अनेकों मान्यताएं जुड़ी हुई हैं, जो हमें खुद को प्रकृति से जोड़े रखती है. उन्होंने कहा कि प्रकृति पर्व सरहुल का दिन है. आज के दिन जल, जंगल, जमीन और पशु-पक्षियों के संरक्षण का संकल्प लें.

एकता की डोर में बांध गया सरहुल व ईद पर्व

गुमला में सरहुल व ईद पर्व हमें एकता की डोर में बांध गया. जिस प्रकार जाति मजहब से ऊपर उठ कर सभी जाति व धर्म के लोगों ने सरहुल जुलूस का स्वागत किया. वहीं ईद के बाद एक-दूसरे से गले मिले. निश्चित रूप से यह मिसाल है. दूसरी तरफ केंद्रीय महावीर मंडल समिति गुमला द्वारा जुलूस का जोश-खरोश के साथ स्वागत किया गया. कहीं कोई जातीय बंधन नहीं दिखा. हम एक हैं और एक रहेंगे. हमारी एकता को कोई तोड़ नहीं सकता. इस प्रकार के शब्दों का प्रयोग जुलूस के दौरान होना, यह दर्शाता है कि गुमला की जो छवि उग्रवाद व नक्सलवाद के कारण खराब हुआ है. उसे लोग भाईचारगी से धोने का प्रयास कर रहे हैं. केंद्रीय महावीर मंडल समेत कई संगठन के लोगों ने जुलूस का स्वागत किया. केंद्रीय महावीर मंडल समिति के अध्यक्ष अजय सिंह राणा, सचिव हरजीत सिंह, विकास सिंह, शशि प्रिया बंटी, शिवम जायसवाल, मिल्की फोगला ने कहा कि गुमला शुरू से ही भाइचारगी का मिसाल पेश करते आया है. सरहुल प्रकृति पर्व है. सरहुल पर्व की महत्ता को समझ प्रकृति संरक्षण पर ध्यान दें.

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