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करम आदिवासियों का मुख्य पर्व : फादर पिंगल

Updated at : 22 Sep 2024 9:01 PM (IST)
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करम आदिवासियों का मुख्य पर्व : फादर पिंगल

आरसी नवाडीह चर्च परिसर में करम नाच प्रतियोगिता

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डुमरी.

जागृति युवा क्लब नवाडीह के तत्वावधान में आरसी नवाडीह चर्च परिसर में रविवार को करम नाच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि पल्ली पुरोहित फादर पिंगल कुजूर, मुखिया प्रदीप मिंज व मुखिया चेतन लाल मिंज थे. फादर पिंगल कुजूर ने कहा कि करम प्रकृति से जुड़ा पर्व है. आदिवासी कहानी के अनुसार यह पर्व आदिवासी कर्म धर्म से जुड़ा हुआ है. मुखिया प्रदीप ने कहा कि पूर्वजों ने जो संस्कृति हमें विरासत में दिया है, उसे बचा कर रखने की जरूरत है. करम आदिवासियों का मुख्य पर्व है. चेतन लाल ने कहा कि हम आदिवासियों की संस्कृति को जीवंत रखने के लिए करम, सरहुल पर्व मनाना जरूरी है. यह पर्व आदिवासी संस्कृति का अहम हिस्सा है. प्रतियोगिता में 36 खोड़हा शामिल थे. सभी खोडहा को अतिथियों ने पुरस्कृत किया. मौके पर फादर ब्यातुस किंडो, फादर जेरोम खलखो, प्रखंड अध्यक्ष राजेश्वर एक्का, रंजीता एक्का, सचिन एक्का, रंजीत कुजूर, मनोहर कुजूर, लिविन टोप्पो, कुंवर मिंज, रंजीत कुजूर आदि उपस्थित थे.

परिवार में पिता का स्थान महत्वपूर्ण : फादर इलियास

डुमरी.

प्रखंड के रजावल चर्च परिसर में रविवार को बाबा दिवस मनाया गया. मौके पर पवित्र मिस्सा बलिदान किया गया. मुख्य अनुष्ठाता फादर इलियास मिंज की अगुवाई में बाबाओं के लिए पवित्र मिस्सा बलिदान अर्पित किया गया. फादर इलियास ने कहा कि परिवार में बाबाओं अर्थात पिताओं का महत्वपूर्ण स्थान है. भारतीय समाज पिता प्रधान है. इसलिए पिताजी का घर समाज में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. इसलिए फर्ज बनता है कि बाइबल में संत जोसेफ को फादर अर्थात पिता के रूप में जानती है. सभी पिता लोग उन्हीं को आदर्श मान कर अपने परिवार को भी आदर्श परिवार बनाने के लिए करना है. परिवार में पिताओं में जो भी गुण अवगुण हैं. उन अवगुणों को त्यागते हुए अपने बाल बच्चों के लिए आदर्श मार्गदर्शक बनें. उनके सुख-दुख में समय-समय पर बच्चों का साथ देना है, ताकि वे माता-पिता के संरक्षण में आगे बढ़ सकें. मिस्सा बलिदान के बाद चर्च परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न गांवों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक नाच-गान प्रस्तुत किया गया. इससे पूर्व अतिथियों को स्वागत कर मंच तक लाया गया. मौके पर फादर दोमनिक तिर्की, फादर अलोइस ठीठियो, सिस्टर रोसालिया, पीयूष कुजूर, फ्रेंकलिन, सुशील आदि मौजूद थे.

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