गुमला में सिख समाज की पहली महिला केसर कौर का निधन, 96 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

Updated at : 10 Mar 2026 9:20 PM (IST)
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गुमला में सिख समाज की पहली महिला केसर कौर का निधन, 96 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

1947 के विभाजन की त्रासदी झेल कर पंजाब से गुमला पहुंची थीं, संघर्ष, परिश्रम और साहस से बसायी नयी जिंदगी

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गुमला. गुमला में सिख समाज की पहली महिला मानी जाने वाली केसर कौर का 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. उनके निधन से गुमला के सिख समाज में शोक की लहर है. उनका पूरा जीवन संघर्ष, साहस और आत्मसम्मान की मिसाल रहा. दिलदार सिंह ने बताया कि साल 1947 में जब उपमहाद्वीप ने भारत के विभाजन की भयावह त्रासदी देखी, तब करीब 17 वर्ष की उम्र में केसर कौर भी उस दर्दनाक दौर से गुजरी थीं. सब कुछ पीछे छोड़ कर वे खाली हाथ स्वतंत्र भारत की ओर चली आयी. शरणार्थी शिविरों की कठिन परिस्थितियों से गुजरते हुए उनकी जीवन यात्रा हजारों किलोमीटर दूर झारखंड के आदिवासी बहुल गुमला जिले तक पहुंची. गुमला पहुंचकर उन्होंने टूटी हुई जिंदगी को फिर से जोड़ने का साहस दिखाया. कभी सब्जी बेच कर तो कभी छोटे-मोटे काम कर उन्होंने परिश्रम और आत्मसम्मान के साथ अपना जीवन खड़ा किया. संघर्ष उनके जीवन का हिस्सा रहा, लेकिन हिम्मत और कर्मठता ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की ताकत दी. ईश्वर की कृपा से उन्होंने लंबी उम्र पायी और भरा-पूरा परिवार देखा. अपने श्रम, सादगी और धैर्य से उन्होंने एक ऐसी विरासत छोड़ी, जो आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी. आज केसर कौर के निधन के साथ गुमला के सिख समाज के एक युग का अंत हो गया. उनका जीवन संघर्ष और प्रेरणा की अमिट कहानी बन कर नयी पीढ़ी का मार्गदर्शन करता रहेगा.

पंजाब से आने वाली अंतिम पीढ़ी थीं केसर कौर

भारत के विभाजन के समय पंजाब का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान में चला गया था. उस कठिन दौर में केसर कौर समेत तीन परिवारों ने पाकिस्तान के बजाय भारत आना चुना और वे गुमला पहुंच गये. केसर कौर के साथ आने वाले अन्य लोगों का पहले ही निधन हो चुका था. विभाजन के समय गुमला पहुंचने वाली केसर कौर उस पीढ़ी की अंतिम सदस्य थीं. हालांकि, पंजाब से गुमला पहुंच कर जिन लोगों ने सिख परिवारों की नींव रखी थी, आज उनके कई परिवार गुमला में बस चुके हैं और विभिन्न व्यवसायों से जुड़े हैं. स्वर्गीय केसर कौर का निवास स्थान बाजारटांड़ के समीप था. उनके नाती-पोते आज भी गुमला में रहते हैं. जब केसर कौर गुमला आयी थीं, उस समय यह एक छोटा सा कस्बा हुआ करता था. उन्होंने गुमला को धीरे-धीरे आगे बढ़ते और विकसित होते देखा. लेकिन जब गुमला तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है, उसी समय केसर कौर ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया.

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