नहीं रही गुमला के सिख समाज की 'पहली महिला', 1947 के विभाजन की यादों को समेटकर ली विदाई
Published by : Sameer Oraon Updated At : 11 Mar 2026 5:18 PM
गुमला के सिख समाज की पहली महिला केसर कौर
Kesar Kaur Gumla: गुमला के सिख समाज की पहली महिला मानी जाने वाली केसर कौर का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया. 1947 के विभाजन की त्रासदी झेलकर खाली हाथ गुमला पहुंची केसर कौर ने संघर्ष और स्वाभिमान की मिसाल पेश की. जानें उनके जीवन की कहानी.
Kesar Kaur Gumla, (गुमला से दुर्जय पासवान): गुमला शहर के सिख समाज की पहली महिला मानी जाने वाली केसर कौर का 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. उनके निधन के साथ ही गुमला में सिख समाज के एक महत्वपूर्ण दौर का अंत माना जा रहा है. उनका पूरा जीवन साहस, संघर्ष और आत्मसम्मान की मिसाल रहा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा.
विभाजन की त्रासदी से गुजरकर गुमला पहुंची थी जीवन यात्रा
परिजनों के अनुसार, साल 1947 में जब भारतीय उपमहाद्वीप ने विभाजन जैसी भयावह त्रासदी देखी, उस समय लगभग 17 वर्ष की उम्र में केसर कौर भी इस दर्दनाक दौर से गुजरीं. उस समय लाखों लोगों की तरह उन्हें भी अपना घर-बार छोड़ना पड़ा. सब कुछ पीछे छोड़कर वे खाली हाथ स्वतंत्र भारत की ओर चली आईं. शरणार्थी कैंपों की कठिन परिस्थितियों से गुजरते हुए उनकी जीवन यात्रा हजारों किलोमीटर दूर झारखंड के आदिवासी बहुल जिले गुमला तक पहुंची, जहां उन्होंने नई शुरुआत करने का साहस दिखाया.
Also Read: एटीएम मशीन में छेड़छाड़ कर ठगी का लगा रहा था जुगाड़, रंगेहाथ गिरफ्तार
सब्जी बेचकर और छोटे काम कर खड़ी की नई जिंदगी
गुमला पहुंचने के बाद उनका जीवन आसान नहीं था. कभी सब्जी बेचकर तो कभी छोटे-मोटे काम कर उन्होंने मेहनत और आत्मसम्मान के साथ अपना जीवन खड़ा किया. संघर्ष उनके जीवन का हिस्सा रहा, लेकिन उनकी हिम्मत और कर्मठता ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ाया. धीरे-धीरे उन्होंने अपने परिवार को संभाला और समाज में अपनी अलग पहचान बनाई. ईश्वर की कृपा से उन्होंने लंबी उम्र पायी और भरा-पूरा परिवार देखा.
पंजाब से आने वाली अंतिम पीढ़ी थीं केसर कौर
बताया जाता है कि विभाजन के समय पंजाब का एक हिस्सा पाकिस्तान में चला गया था. उसी समय केसर कौर सहित तीन सिख परिवारों ने पाकिस्तान की जगह भारत में ही बसने का निर्णय लिया और इसी वजह से वे गुमला पहुंचे थे. उनके साथ आए अन्य लोगों का पहले ही निधन हो चुका है. ऐसे में विभाजन के समय गुमला पहुंचने वाली केसर कौर उस पीढ़ी की अंतिम सदस्य थीं, जिनका अब 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया.
बाजार टांड़ में गुजरा पूरा जीवन
स्वर्गीय केसर कौर का घर गुमला शहर के बाजार टाड़ इलाके के पास था. उनका पूरा जीवन इसी इलाके में गुजरा. जिस समय वे गुमला आई थीं, उस समय यह एक छोटा सा कस्बा हुआ करता था. उन्होंने गुमला को धीरे-धीरे बढ़ते और विकसित होते देखा. आज जब शहर विकास के नये दौर में आगे बढ़ रहा है, उसी समय केसर कौर इस दुनिया को अलविदा कह गईं.
सिख समाज की नींव रखने वालों में थीं शामिल
पंजाब से गुमला पहुंचने वाले शुरुआती सिख परिवारों ने यहां सिख समाज की नींव रखी थी. आज उन्हीं परिवारों की कई पीढ़ियां गुमला में बस चुकी हैं और विभिन्न व्यापारों और व्यवसायों से जुड़ी हुई हैं. केसर कौर के नाती-पोते आज भी गुमला में रहते हैं. अपने परिश्रम, सादगी और धैर्य से उन्होंने एक ऐसी विरासत छोड़ी है जो आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी.
Also Read: ईरान-इजरायल युद्ध की आंच धनबाद में भी: LPG के लिए मची भगदड़, रेस्टोरेंट्स ने मेनू से हटाये ये व्यंजन
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Sameer Oraon
समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










