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पेट की खातिर : लॉकडाउन में बदल दिया व्यवसाय, कोई दूध बेच रहा तो कोई सब्जी

Updated at : 17 Apr 2020 10:39 PM (IST)
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पेट की खातिर : लॉकडाउन में बदल दिया व्यवसाय, कोई दूध बेच रहा तो कोई सब्जी

कोरोना वायरस का डर. लॉकडाउन से परेशानी. इस संघर्ष के बीच सभी को जिंदा रहने की चाहत. ऊपर से भूख भी मिटाना है. भूख मिटाने के लिए काम करना जरूरी है. परंतु लॉकडाउन में कई काम काज बंद है. दुकानें नहीं खुल रही हैं. धंधा भी चौपट हो गया है. ऐसे में कई लोगों ने अपने व अपने परिवार की पेट के खातिर धंधा व व्यवसाय बदल लिया. जो भी कमाई हो रही है. उसी से घर का गुजारा चल रहा है.

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दुर्जय पासवान

कोरोना वायरस का डर. लॉकडाउन से परेशानी. इस संघर्ष के बीच सभी को जिंदा रहने की चाहत. ऊपर से भूख भी मिटाना है. भूख मिटाने के लिए काम करना जरूरी है. परंतु लॉकडाउन में कई काम काज बंद है. दुकानें नहीं खुल रही हैं. धंधा भी चौपट हो गया है. ऐसे में कई लोगों ने अपने व अपने परिवार की पेट के खातिर धंधा व व्यवसाय बदल लिया. जो भी कमाई हो रही है. उसी से घर का गुजारा चल रहा है.

Also Read: लॉकडाउन में सब्जियों का निर्यात नहीं होने से किसान परेशान, खेतों में सड़ रही सब्जियां

लॉकडाउन का सबसे ज्यादा प्रभाव हर रोज कमाने खाने वाले व उसके परिवार पर पड़ा है. जिस कारण लोग लॉकडाउन की अवधि में अपना व्यवसाय बदल दिये हैं. लॉकडाउन से पहले तक दूसरे की दुकान में काम करते थे. अथवा जिनकी अपनी दुकान थी. आज की तारीख में ऐसे कई लोग अपने पुराने पेशे को छोड़कर सब्जी का व्यवसाय कर रहे हैं.

सब्जी बेचने लगा प्रकाश साहू

तर्री निवासी प्रकाश साहू ने बताया कि वह लॉकडाउन से पूर्व एक कपड़ा दुकान में काम करता था. दुकान से काम के बदले उसे हर दिन 280 रुपये मिलता था. परंतु लॉकडाउन के बाद दुकान बंद होने के कारण वह बेरोजगार हो गया. बेरोजगारी के कारण घर में खाने के लाले पड़ गये. परिवार चलाने में काफी दिक्कत होने लगी. परिवार का पेट पालने के लिए साईकिल में सब्जी लाद कर बेचना चालू कर दिया और किसी प्रकार अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा हूं.

मोबाइल दुकान बंद, सब्जी बेच रहा दीपक

घाघरा प्रखंड निवासी दीपक कुमार गुप्ता का घाघरा में मोबाइल दुकान है. दीपक ने बताया कि लॉकडाउन में दुकान बंद हो गया और स्टाफ को पैसा भी देना है. यहां सब्जी दुकान की कमी होने के कारण सब्जी बेच रहा हूं. जिससे प्रखंड के लोगों को सब्जी की किल्लत न हो और स्टाफ को पैसा समय पर दिया जा सके. इससे मेरे घर की जीविका भी चल रही है. स्टाफ लोगों को भी मदद मिल जा रही है. पेट की खातिर कोई भी काम छोटा नहीं होता.

बादाम बेचने वाला दिलीप दूध बेचने लगा

गुमला के दुंदुरिया निवासी दिलीप साहू पूर्व में बदाम व मौसमी तरबूज बेचा करता था. दिलीप ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से इनकम पूरी तरह से बंद हो गया. दुकान भी बंद है. क्योंकि बदाम की दुकान खोलने की अनुमति नहीं है. अगर दुकान खोलेंगे तो धंधा चलेगा नहीं. जिसके बाद से दूध बेच कर अपने परिवार का गुजारा कर रहा हूं. परिवार चलाने के लिए कुछ न कुछ काम करना जरूरी है.

कोरोना के डर से सब्जी बेचना किया बंद

गुमला शहर से सटे तेलगांव निवासी राम साहू ने कहा कि लॉकडाउन से पूर्व जशपुर रोड के समीप वह सब्जी बेचा करता था. परंतु लॉकडाउन के बाद सब्जी नहीं बेच पा रहा हूं. क्योंकि ऑटो बंद हो गया. वह ऑटो से दूसरे गांवों से सब्जी लाकर बेचता था. जिस कारण वह सब्जी नहीं ला पा रहा है. जिससे वह बेकार हो गया. गुमला में बहुत अधिक सब्जी बेचने वाले हो गये हैं. इसलिए मैंने अपना धंधा बंद कर अब घर पर रह रहा हूं. क्योंकि परिवार की सुरक्षा भी देखनी है. इसलिए लॉक डाउन का पालन कर रहा हूं.

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AmleshNandan Sinha

लेखक के बारे में

By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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