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चंदा व श्रमदान से कर रहे सरना स्थल की घेराबंदी

Updated at : 08 Mar 2026 6:30 PM (IST)
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चंदा व श्रमदान से कर रहे सरना स्थल की घेराबंदी

प्रशासनिक अड़चन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से कुदरा गांव के ग्रामीण खासे नाराज हैं.

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प्रतिनिधि, सिसई

प्रशासनिक अड़चन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से कुदरा गांव के ग्रामीण खासे नाराज हैं. उनकी नाराजगी वर्षों से अधूरा पड़े सरना स्थल की घेराबंदी को लेकर है. पिछले कई वर्षो जनप्रतिनिधियों और विभाग का चक्कर काटकर थक जाने के बाद ग्रामीणों ने अंततः अपने आस्था के केंद्र स्थल का स्वयं से चंदा और श्रमदान कर घेराबंदी पूर्ण करने का बीड़ा उठाते हुए रविवार को घेराबंदी का कार्य प्रारंभ कर प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को आइना दिखाने का काम किया है. ग्रामीण पहान कीनू उरांव, पुजार मगन उरांव, महतो जीतवाहन उरांव व ग्रामप्रधान जयराम उरांव ने कहा कि सरना स्थल आदिवासी समाज की आस्था, संस्कृति व परंपरा का प्रमुख केंद्र होता है. चहारदीवारी अधूरी रहने से यहां पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में काफी कठिनाई हो रही थी. आठ वर्ष पहले जिला कल्याण विभाग की ओर से सरना स्थल की घेराबंदी के लिए लगभग 17 लाख रुपये स्वीकृत किया गया था. उस समय लाभुक समिति बनाकर निर्माण कार्य भी शुरू कराया गया था. लगभग 30 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद अचानक लाभुक समिति के सचिव का निधन हो गया. जिससे काम रुक गया. कार्य जारी रखने के लिए नये सचिव के चयन के लिए कई बार प्रयास किया गया. लेकिन विभागीय अड़चन के कारण लाभुक समिति में नये सचिव का नाम नहीं जोड़ा जा सका. बाद में समिति के अध्यक्ष का भी निधन हो गया. जिससे निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो गया. दोनों पदाधिकारियों के निधन के बाद ग्रामसभा के माध्यम से नई समिति का चयन कर कार्य पूरा कराने का प्रयास किया गया. लेकिन विभागीय स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं हुई. ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया गया. लेकिन किसी ने भी समस्या के समाधान के लिए गंभीरता नहीं दिखायी. लगातार उपेक्षा से क्षुब्ध ग्रामीणों ने आखिरकार स्वयं आगे आकर श्रमदान के माध्यम से घेराबंदी कार्य शुरू करने का निर्णय लिया. यदि पहले से स्वीकृत सरकारी योजना के तहत नई लाभुक समिति का गठन कर शेष राशि का भुगतान कर दिया जाये तो सरना स्थल की घेराबंदी सुनियोजित और बेहतर तरीके से पूरी की जा सकती थी. मौके पर गांव के पहान कीनू उरांव, पुजार मगन उरांव, महतो जीतवाहन उरांव, ग्राम प्रधान जयराम उरांव, मनीपाल उरांव, सनी उरांव, बुचनू उरांव, जयंती देवी, एतवारी उरांव, अनिता उराईन, बोण्डो देवी, दुलिया देवी, छोटी उरांव, उषा देवी, सुखन उरांव, मंगल उरांव, बुदू उरांव, रमेश उरांव, सुरज उरांव, रामदयाल उरांव सहित सैकड़ों महिला-पुरुष मौजूद थे.

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VIKASH NATH

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By VIKASH NATH

VIKASH NATH is a contributor at Prabhat Khabar.

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