15 महीने में चार हार्डकोर माओवादी मारे गये

Published at :14 Sep 2016 7:27 AM (IST)
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15 महीने में चार हार्डकोर माओवादी मारे गये

दुर्जय पासवान गुमला : घर का भेदी लंका ढाहे. यह कहावत भाकपा माओवादी में सटीक बैठ रहा है, क्योंकि 15 महीने में संगठन ने अपने चार बड़े साथियों को खो दिया है. हार्डकोर नक्सली आशीष दा, संजय यादव, सिलवेस्टर व डॉक्टर दीपक पुलिस मुठभेड़ में मारे गये हैं. वहीं 15 महीने में हार्डकोर नक्सली प्रसाद […]

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दुर्जय पासवान
गुमला : घर का भेदी लंका ढाहे. यह कहावत भाकपा माओवादी में सटीक बैठ रहा है, क्योंकि 15 महीने में संगठन ने अपने चार बड़े साथियों को खो दिया है. हार्डकोर नक्सली आशीष दा, संजय यादव, सिलवेस्टर व डॉक्टर दीपक पुलिस मुठभेड़ में मारे गये हैं. वहीं 15 महीने में हार्डकोर नक्सली प्रसाद लकड़ा, सोमरा उरांव व एरिया कमांडर समेत 21 माओवादी गिरफ्तार हुए हैं. इनके पीछे कहीं न कहीं घर का ही भेदी रहा है. हालांकि पुलिस के लिए 15 महीना सफलताओं से भरा रहा है. पुलिस को सभी सफलताएं गुमला जिले के पालकोट, चैनपुर व बिशुनपुर थाना क्षेत्र से मिली है. ऐसे अभी भी इन इलाकों में भाकपा माओवादियों का जमावड़ा है. इधर, सूचना मिल रही है कि आशीष दा के मारे जाने के बाद माओवादी पलटवार के मूड में हैं.
एएसपी के नेतृत्व में चला अभियान
मंगलवार को गुमला पुलिस ने पुन: पालकोट इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया. एएसपी पवन कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम दोबारा डहुपानी पंचायत के इलाके में घुसी और नक्सलियों की तलाश की. ग्रामीणों से बात की. पुलिस सुबह को जंगल में घुसी है. देर शाम तक जंगल में ही थी. इधर, बोराडीह मुठभेड़ को लेकर पालकोट थाने में भाकपा माओवादियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है. इसमें आशीष दा, विनोद पंडित समेत आठ लोगों पर केस दर्ज हुआ है. पालकोट के दुर्गम जंगली इलाके में पुलिस के अभियान के संबंध में एसपी चंदन कुमार झा ने कहा कि छापामारी अभियान चलाया जा रहा है. कोई बड़ी बात नहीं है.
बोराडीह का गणेश है संगठन में
पुलिस व ग्रामीणों के अनुसार, बोराडीह गांव का गणेश लोहरा माओवादी संगठन में है. बोराडीह जंगल में माओवादियों के कैंप की व्यवस्था गणेश ही करता है. ग्रामीण की माने, तो खाने-पीने की व्यवस्था गांव से होती है. माओवादियों के डर से ग्रामीण खाना-पीना बना कर कैंप तक पहुंचाते थे. पुलिस को इसकी जानकारी है.
चार हार्डकोर नक्सली मारे गये
13 मार्च 2015 को चैनपुर थाना के सरगांव जंगल में मुठभेड़ में माओवादियों का डॉक्टर दीपक मारा गया था.
25 जुलाई 2015 को चैनपुर थाना क्षेत्र के डीपाटोली गांव में माओवादी का शीर्ष नेता सिलवेस्टर मारा गया था.
23 फरवरी 2016 को पालकोट कांदेबेड़ा में मुठभेड़ में 10 लाख का इनामी कमांडर संजय यादव उर्फ यतीन मारा गया.
11 सितंबर 2016 को पालकोट के बोराडीह में 25 लाख का इनामी नक्सली आशीष यादव पुलिस मुठभेड़ में मारा गया.
ये बड़े नेता पकड़े गये हैं
10 जून 2015 को चैनपुर में मुठभेड़ के बाद माओवादी कमांडर प्रसाद लकड़ा व दो नक्सली गिरफ्तार हुए थे.
25 जुलाई 2015 को चैनपुर के डीपाटोली गांव से माओवादी के एरिया कमांडर दिलबर नायक पकड़ाया था.
16 मार्च 2016 को चैनपुर के दरकाना में पत्नी से मिलने आये सबजोनल कमांडर सोमरा उरांव गिरफ्तार हुआ था.
यहां माओवादी हावी रहे
27 फरवरी 2015 को बिशुनपुर थाना क्षेत्र के सोहरपाट जंगल में मुठभेड़ हुआ था. इसमें माओवादी हावी हुए थे. कोबरा का एक जवान घायल हुआ था.
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