आदिवासी समाज में धर्मगुरु का कोई जगह नहीं : खुदी भगत
गुमला. मूली पड़हा द्वारा डांडा पड़हा घाघरा चपका बगीचा में एक दिवसीय पड़हा सम्मेलन सोमवार को हुआ. सम्मेलन का शुभारंभ अना आदि मला मुजरका पड़हा प्रार्थना के साथ किया गया. मुख्य अतिथि राजी पड़हा के दीवान खुदी भगत ने कहा कि आज आदिवासी समाज में बहुत सी कूरीतियांे का चलन हो गया है. सीधे-साधे आदिवासी […]
गुमला. मूली पड़हा द्वारा डांडा पड़हा घाघरा चपका बगीचा में एक दिवसीय पड़हा सम्मेलन सोमवार को हुआ. सम्मेलन का शुभारंभ अना आदि मला मुजरका पड़हा प्रार्थना के साथ किया गया. मुख्य अतिथि राजी पड़हा के दीवान खुदी भगत ने कहा कि आज आदिवासी समाज में बहुत सी कूरीतियांे का चलन हो गया है. सीधे-साधे आदिवासी समाज के रीति रिजवा को तोड़- मरोड़ कर पेश कर रहे है. जबकि आदिवासी समाज में धर्मगुरु का कोई जगह आदि काल से नहीं है. अपने आप को स्वयंभू गुरु मान लिया है. जो सरासर गलत है. इससे आदिवासियों को बचना होगा. वर्ष 2008-09 में राजी पड़हा भारत के द्वारा झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडि़शा आदि राज्यों में आदि धर्म का रथ चला कर सभा, जुलूस कर उपायुक्त के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया गया था. जिसे राष्ट्रपति ने अनुसूचित जनजाति आयोग के आदेश दिया कि राजी पड़हा भारत से पत्राचार कर आदिवासियों का दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए निर्देश दिया है. जिसमें अतखा पड़हा का पुनर्गठन एवं गांव का सीमांकन कर प्रपत्र अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार अधिनियम 40/96 के दफा 14 ग में भर कर मूली पड़हा गुमला को सूचित करने का निर्देश दिया है. इस सम्मेलन में एतवा टाना भगत, परमेश्वर भगत, राजू उरांव, प्रदीप लकड़ा, सुशील उरांव, सार्जन उरांव आदि ने भी सम्मेलन को संबोधित किया. कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन चंद्र शेखर उरांव ने किया. मौके पर अतखा पड़हा कतरी, कोटामाटी, परसा द्वारा नृत्य गीत प्रस्तुत किया गया.
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