43 वर्ष का हुआ गुमला जिला: नक्सल खत्म, लेकिन भ्रष्टाचार विकास में बाधक

Published by : AmleshNandan Sinha Updated At : 18 May 2026 6:06 AM

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गुमला का नवरत्नगढ़

Gumla: गुमला जिला 43 वर्ष का हो गया है. इसने साल में इस जिले ने कई उतार-चढ़ाव देखे. नक्सलवाद का अंत हो गया है, लेकिन भ्रष्टाचार अब भी जिले के विकास में बड़ी बाधा है. पूरी रिपोर्ट नीचे पढ़ें...

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दुर्जय पासवान
Gumla: 18 मई को गुमला जिला 43 साल का हो गया. आज ही के दिन 1983 को गुमला को जिला का दर्जा मिला था. गुमला जिले में कुछ अपवाद बातों को छोड़ दें तो निरंतर कुछ नया हो रहा है, लेकिन भ्रष्टाचार विकास में बाधक है. हालांकि, गुमला जिला नक्सल से मुक्त हो गया है. पहले नक्सल के कारण गांवों का विकास रुका हुआ था. अब जब नक्सल खत्म हुआ तो भ्रष्टाचार विकास में बाधक बन गया है. भ्रष्टाचार के अलावा साइबर क्राइम, नशापान व अंधविश्वास जिले के विकास में बाधक बनी हुई है. गुमला के विकास के लिए सरकार करोड़ों रुपये दे रही है, लेकिन एक टेबल से दूसरे टेबल होते हुए पब्लिक तक विकास का पैसा पहुंचने में देरी हो रही है. टेबल दर टेबल बढ़ने में विकास का आधा पैसा खत्म हो जा रहा है. ऐसे, गुमला में सरकार की कई योजनाओं को धरातल में उतारा गया है. जिसका फल है. गुमला को पीएम अवार्ड मिल चुका है. गुमला में नित्य नये काम हो रहे हैं. गुमला कई उतार चढ़ाव के बाद भी आगे बढ़ा है. जरूर कुछ स्थानों पर गुमला पीछे है. फिर भी वर्तमान में गुमला जिले की जो स्थिति है, वह पहले से बेहतर है.

गुमला में धार्मिक, पर्यटक व ऐतिहासिक स्थल भरे पड़े हैं

झारखंड राज्य के अंतिम छोर में बसे गुमला जिले का इतिहास गौरवपूर्ण है. भ्रष्टाचार, नशापान, अंधविश्वास से जूझ रहे गुमला में सभी जाति व धर्म के लोग रहते हैं. यह आदिवासी बहुल जिला है. उरांव जनजाति की जनसंख्या अधिक है. इसाईयों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है. यह श्रीराम भक्त हनुमान की जन्मस्थली है. गुमला में पग-पग पर धार्मिक व ऐतिहासिक स्थल हैं. दक्षिणी कोयल व शंख नदी गुमला से होकर बहती है. धार्मिक आस्था के केंद्र टांगीनाथ धाम, देवाकी धाम, महामाया मंदिर, वासुदेव कोना मंदिर है. रमणीय पंपापुर, नागफेनी, बाघमुंडा, हीरादह गुमला जिले की पहचान है. ऐतिहासिक धरोहर डोइसागढ़ है. गुमला धर्मप्रांत में 41 चर्च है. कई चर्च पुराने हैं जो अपने अंदर प्राचीन इतिहास समेटे हुए है.

अंग्रेजों को धूल चटाने वाले बख्तर साय, मुंडन सिंह, तेलंगा खड़िया व जतरा टाना भगत जैसे वीर सैनानियों की जन्म भूमि है. परमवीर चक्र विजेता शहीद अलबर्ट एक्का जैसे वीर सपूत इसी गुमला के जारी प्रखंड की धरती पर जन्म लिये. गुमला शहीदों की भूमि है. गुमला के प्रमुख धार्मिक, पर्यटक व ऐतिहासिक स्थलों को बढ़ावा मिले तो स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा. खेल के क्षेत्र में निरंतर बढ़ते गुमला की धरती से कई राज्य व राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों का जन्म हुआ है. बस अब बुलंदियों को छूने की आशा है और यह तभी संभव है. जब हम सब मिलकर एक सोच, नये उत्साह, उमंग, जोश से आगे बढ़ेंगे.

गुमला जिले का इतिहास गौरवपूर्ण है

इतिहास पर गौर करें तो खनिज संपदाओं से परिपूर्ण गुमला 18 मई 1983 को रांची से अलग होकर जिला बना. गुमला जिला 5327 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है. कुल जनसंख्या 1246249 है. जिसमें पुरुषों की जनसंख्या 625292 व महिला जनसंख्या 620957 है. लिंगानुपात 993 प्रति हजार पुरुष है. गुमला जिले में 12 प्रखंड और तीन अनुमंडल गुमला, चैनपुर व बसिया है. पंचायतों की संख्या 159 है. राजस्व गांव 952 है. दो राजस्व गांव बेचिरागी है. गुमला शहरी क्षेत्र में एक नगर परिषद है. जिसकी आबादी 51307 है. जिले में कृषि योग्य भूमि 3.296 लाख व वन क्षेत्र 1.356 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. खनिज के रूप में बॉक्साइड है. परंतु कारखाना नहीं है. जबकि, लंबे समय से गुमला में अल्युमिनियम कारखाना की स्थापना की मांग उठ रही है.

दो राज्यों की सीमाएं लगती हैं

गुमला गांवों में बसा है. यहां के लोग जीविका के लिए खेतीबारी, घरेलू उद्योग धंधे व मजदूरी करते हैं. गुमला के बगल में लोहरदगा, सिमडेगा, रांची व लातेहार जिला का बॉर्डर सटता है. यह छत्तीसगढ़ व ओड़िशा राज्य का प्रवेश द्वार है. पलायन, गरीबी, अशिक्षा, सिंचाई, बेरोजगारी जैसी कई चुनौतियों का सामना करते हुए गुमला आगे बढ़ रहा है, लेकिन गुमला के कुछ हालात ऐसे हैं. जिसे बदलना है. जरूरत है, हम सभी के अच्छे सोच की. जिससे गुमला झारखंड ही नहीं पूरे देश में मॉडल जिला बन सके. प्लानिंग के तहत काम हो तो गुमला के लोग अच्छे हैं जो हर समय विकास में सहयोग करते हैं. परंतु, कथित तौर पर कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के कारण गुमला का विकास पर असर पड़ते रहा है. यहां कमीशनखोरी है. जिसका सीधा असर विकास के काम पर पड़ रहा है.

गुमला की आबादी धर्म के अनुसार

हिंदू – 376305
मुस्लिम – 62517
इसाई – 246097
सिख – 269
बौद्ध – 645
जैन – 28
अघोषित – 4290
अन्य – 556098
कुल – 1246249

गुमला जिला एक नजर में

प्रखंड : 12
अनुमंडल : 03
पंचायत : 159
गांव : 952
थाना : 18
नगर परिषद : 01

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लेखक के बारे में

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अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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