गुमला में तेंदुआ का आतंक, वन विभाग ट्रेस करने में जुटा

इसी गुफा में तेंदुआ रह रहा है
Gumla News: गुमला में तेंदुए का आतंक जारी है. कोल्हुकोना जंगल में चट्टानों की गुफा में तेंदुआ ने अपना मांद बनाया है. ग्रामीणों ने गुफा में तेंदुए को घुसते और निकलते देखा है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
गुमला से जगरनाथ पासवान की रिपोर्ट
Gumla News: गुमला जिला के कुरूमगढ़ वनक्षेत्र अंतर्गत चैनपुर प्रखंड के कई गांवों में एक तेंदुए का आतंक जारी है. तेंदुआ आए दिन किसी न किसी पशुपालक ग्रामीण के पशुओं का अपना शिकार बना रहा है. जिससे न केवल पशुपालक ग्रामीणों की चिंता बढ़ी हुई है, बल्कि क्षेत्र के ग्रामीण भी डर के साए में जीने को मजबूर हैं.
रात के अंधेरे में करता है शिकार
रात के अंधेरे में तेंदुआ अपनी मांद (गुफा) से निकलकर बड़े ही आराम से पशुपालक ग्रामीणों के पालतू जानवरों को अपना शिकार बनाने के बाद उसे घसीटकर अपनी मांद में ले जाता है. ग्रामीणों ने जंगल में तेंदुआ का मांद भी ढूंढ निकाला है. ग्रामीणों के अनुसार जमीन के ऊपर से चट्टानें हैं, जबकि चट्टानों के नीचे काफी लंबी-चौड़ी गुफा है. ग्रामीणों ने तेंदुआ को मांद में कई बार घुसते और निकलते देखा है. तेंदुआ द्वारा अब तक कई गांवों के पशुपालक ग्रामीणों के जानवरों का शिकार कर चुका है. कतारीकोना गांव के लालसाय असुर की एक गर्भवती गाय, कोल्हुकोना के धतरा कोरवा के तीन बैल और तीन बकरी, कच्चापाठ के नारायण असुर की एक गाय, चमरू कांवर के दो बैल, चमरी देवी की एक गाय, कृष्णा कांवर की एक गाय, प्रबल कावंर की एक गाय और सुखु उरांव की एक गाय का शिकार कर चुका है. संभवत: तेंदुआ द्वारा अन्य पशुपालक ग्रामीणों के पशुओं का भी शिकार किया गया हो.
ग्रामीण ने तेंदुए को गुफा में घुसते और निकलते देखा
तेंदुए का प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीण कोल्हुकोना निवासी धतरा कोरवा ने बताया कि तेंदुआ का मांद उसके घर से करीब तीन सौ मीटर की दूरी पर है. धतरा ने बताया कि चट्टानों में गुफा बना हुआ है. उन्होंने तेंदुआ को उसी गुफा में घुसते और निकलते देखा है. धतरा ने बताया कि तेंदुआ उसके तीन गाय और तीन बकरियों का शिकार कर चुका है. जिससे उसे काफी नुकसान हुआ है.
ग्रामीणों का दर्द
प्रभावित पशुपालक ग्रामीण चमरी देवी, कृष्णा उरांव और प्रबल कांवर ने बताया कि विगत कई दिनों से क्षेत्र में एक तेंदुआ घूम रहा है. तेंदुआ ग्रामीणों के पालतु पशुओं का शिकार कर रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि उनलोगों ने वन विभाग से मुआवजा की मांग की है. लेकिन विभाग द्वारा मारे गए पालतु पशुओं के लाश का फोटो मांगा जा रहा है. लेकिन फोटो उपलब्ध कराना मुश्किल है. क्योंकि तेंदुआ पशुओं का शिकार करने के बाद उसे घसीटकर अपनी मांद में ले जाता है. पशुओं का फोटो लेने के लिए तेंदुआ के मांद में घुसना मतलब जान से हाथ धोना है. तेंदुआ कब, कहां और किस जानवर का शिकार करेगा. कुछ कहा नहीं जा सकता. प्रभावित ग्रामीणों ने वन विभाग से मुआवजा की मांग की है.
वन विभाग की कार्रवाई
इस मामले में गुमला डीएफओ अहमद बेलाल अनवर ने बताया कि तेंदुआ को ट्रेस करने के लिए जगह-जगह पर कैमरा ट्रैप लगाया गया है, लेकिन उसमें अभी तक तेंदुआ कहीं भी नजर नहीं आया है. अगर किसी ग्रामीण द्वारा तेंदुआ को कोल्हुकोना जंगल के किसी गुफा में देखा गया है तो इसकी जांच किया जाएगा. जिन पशुपालक ग्रामीणों के पशुओं को तेंदुआ द्वारा मारा गया है. उन सभी ग्रामीणों को मुआवजा दिया जाएगा.
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By श्वेता वैद्य
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