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नक्सलियों को चुनौती देकर बनायी 26 किमी सड़क, 100 गांवों के लोगों को मिल रहा लाभ

Updated at : 26 May 2024 9:44 PM (IST)
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नक्सलियों को चुनौती देकर बनायी 26 किमी सड़क, 100 गांवों के लोगों को मिल रहा लाभ

गुमला के करमटोली से लेकर बांसडीह घाटी होते रायडीह प्रखंड के कांसीर तक बनी है सड़क

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गुमला

. लंबे आंदोलन, संघर्ष व प्रतीक्षा के बाद आखिरकार गुमला शहर के करमटोली से लेकर बांसडीह घाटी होते कांसीर तक टू लेन पक्की सड़क बन गयी, जिसकी लंबाई 26.1 किमी है. इस सड़क को बनाने के लिए कई बार टेंडर निकाला गया था, परंतु नक्सली के डर से सड़क नहीं बन रही थी. आरइओ विभाग अपने स्तर से सड़क बनाने की पहल की थी. जब, आरइओ विभाग इसमें विफल रहा, तो पीडब्ल्यूडी विभाग ने उक्त सड़क को अपने जिम्मे ले लिया और नक्सलियों को चुनौती देते हुए 26 किमी सड़क बना डाली. आज सड़क बनने से 100 गांवों 30 हजार से अधिक लोगों को आवागमन के लिए सुगम रास्ता मिल गया. यहां तक की चैनपुर, डुमरी व जारी प्रखंड की गुमला से 10 किमी की दूरी कम हो गयी. बता दें कि यह सड़क गुमला शहर के सर्किट हाउस से लेकर करमटोली, बांसडीह, परसा होते हुए कांसीर तक बनी है. करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क में अब सरपट गाड़ियां दौड़ रही हैं. छोटी गाड़ियों से लेकर हाइवा व बस भी अब इस रूट पर आसानी से चल रही हैं.

जानलेवा व उबड़-खाबड़ सड़क से मिली निजात :

यह सड़क गुमला से रायडीह प्रखंड तक बनी है. गुमला शहर में करमटोली, फुलवारटोली, कुंबाटोली व सारू गांव आता है, जो घनी आबादी वाला इलाका है. सड़क इतनी खराब था कि लोग परेशान थे. आये दिन हादसे हो रहे थे. रायडीह प्रखंड में बांसडीह घाटी, परसा, ऊपर खटंगा, कांसीर आता है. यह सड़क भी जानलेवा बनी हुई था. सड़क इतनी खराब थी कि 26 किमी की दूरी तय करने में डेढ़ घंटे लगता था. परंतु, अब 30 से 35 मिनट में लोग 26 किमी की दूरी तय कर रहे हैं. सड़क साफ-सुथरी व मजबूत बनने से बड़ी गाड़ियां भी आसानी से चल रही हैं.

नक्सलियों के मंसूबे फेल:

बता दें कि यह पूरा इलाका भाकपा माओवादी, पीएलएफआइ व जेजेएमपी का है. इस क्षेत्र में विकास के काम में उनका दखल अक्सर रहता था. इस रूट पर सड़क बनाने के लिए कई बार टेंडर निकाला गया, परंतु नक्सलियों के डर से कोई टेंडर नहीं डाला. यहां तक की नक्सलियों ने इस क्षेत्र में सड़क बनाने पर रोक भी लगा दी थी. परंतु, पुलिस की दबिश के बाद इस इलाके में अब नक्सली अंतिम सांस गिन रहे हैं. माओवादी के शीर्ष नेता बुद्धेश्वर उरांव के मारे जाने के बाद क्षेत्र में सड़क बनाने की मांग उठी. खुद ग्रामीण सड़क बनाने की मांग को लेकर सड़क जाम किये. गांव से लेकर शहर तक व डीसी कार्यालय तक आंदोलन हुआ. इसके बाद इस सड़क को बनाने की जिम्मेवारी पीडब्ल्यूडी को दी गयी. इसके बाद टेंडर निकाल कर सड़क का निर्माण कराया गया.

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करमटोली से लेकर कांसीर तक सड़क बहुत खराब थी, जिससे ग्रामीण परेशान थे. छात्रों को गुमला शहर के स्कूल व कॉलेज आने में परेशानी हो रही थी. सड़क बन जाने से लोगों को राहत मिली है.

देवकी देवी (महिला समाजसेवी)

गुमला से लेकर रायडीह प्रखंड के कांसीर तक 26.1 किमी सड़क का निर्माण कार्य मार्च माह में ही पूरा कर दिया गया है. सड़क का काम तेजी से हुआ और एक साल के अंदर सड़क बना दी गयी है.

मनोज कुमार (संवेदक, गुमला)

करमटोली, बांसडीह से होते हुए कांसीर तक सड़क बन गयी है. यह सड़क मार्च माह में ही पूरी हो गयी है. अब सुचारू ढंग से आवागमन हो रहा है. विभाग के दिशा-निर्देश पर उद्घाटन किया जायेगा.

अनूप रंजन लकड़ा (इइ, पीडब्ल्यूडी)B

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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