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गुमला : स्वच्छ भारत मिशन में हुई वित्तीय अनियमितता की जांच के दौरान खुलासा, शौचालय निर्माण के 104 करोड़ का हिसाब नहीं

Updated at : 30 Jan 2020 5:13 AM (IST)
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गुमला : स्वच्छ भारत मिशन में हुई वित्तीय अनियमितता की जांच के दौरान खुलासा, शौचालय निर्माण के 104 करोड़ का हिसाब नहीं

शकील अख्तर रांची : गुमला जिले में शौचालय निर्माण मद के 104 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं है. साथ ही शौचालय निर्माण के लिए खर्च दिखाये गये 77.78 करोड़ रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र ही नहीं है. इससे आशंका जतायी जा रही है कि उक्त राशि का गबन कर लिया गया है. ज्ञात हो कि […]

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शकील अख्तर

रांची : गुमला जिले में शौचालय निर्माण मद के 104 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं है. साथ ही शौचालय निर्माण के लिए खर्च दिखाये गये 77.78 करोड़ रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र ही नहीं है.

इससे आशंका जतायी जा रही है कि उक्त राशि का गबन कर लिया गया है. ज्ञात हो कि वर्ष 2019 में कार्यपालक अभियंता के फर्जी हस्ताक्षर से स्वच्छ भारत मिशन के एक करोड़ रुपये संविदा पर काम करनेवाले कर्मियों ने निकाल लिये थे. इसी मामले में हो रही जांच में नित्य नये खुलासे हो रहे हैं.

सिर्फ 80.64 करोड़ खर्च का प्रमाण पत्र मिला : जांच के दौरान इस बात की जानकारी मिली है कि वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक की अवधि में गुमला जिले के स्वच्छ भारत मिशन के तहत कुल 190.24 करोड़ रुपये मिले थे. इनमें वर्ष 2015-16 में 7.75 करोड़,2016-17 में 15 करोड़,2017-18 में 30 करोड़,2018-19 में 136.50 करोड़ और चालू वित्तीय वर्ष में एक करोड़ शामिल हैं.

जांच में पाया गया कि इन पांच वर्षों में जिले को मिली 190.24 करोड़ की राशि में से शौचालय निर्माण के लिए ग्राम स्वच्छता समितियों को कुल 148.64 करोड़ रुपये दिये गये. इस राशि से 1,23,869 शौचालयों का निर्माण किया जाना था.

नियमानुसार विभिन्न समितियों को इस राशि से शौचालय निर्माण के बाद उपयोगिता प्रमाण पत्र देना था. हालांकि इस राशि के मुकाबले अब तक सिर्फ 67,204 शौचालयों के निर्माण का उपयोगिता प्रमाण पत्र ही मिला है. यानी 148.64 करोड़ के मुकाबले सिर्फ 80.64 करोड़ रुपये को ही खर्च का प्रमाण पत्र मिला है.

शौचालयों का ब्योरा ही नहीं किया अपलोड

विभिन्न समितियों द्वारा दिये गये उपयोगिता प्रमाण पत्रों की सत्यता की जांच के लिए शौचालय निर्माण से संबंधित अपलोड की गयी फोटो और आंकड़ों से मिलान कराया गया. इसमें 8,154 प्रमाण पत्र फर्जी पाये गये.

इससे संबंधित कोई ब्योरा अपलोड नहीं मिला. यानी शौचालय निर्माण के नाम पर खर्च दिखाये गये 148.64 करोड़ रुपये में से 77.78 करोड़ रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र ही नहीं है. कैश बुक की जांच के दौरान पाया गया कि शौचालय निर्माण के लिए फरवरी 2019 तक विभिन्न समितियों को 104 करोड़ रुपये बतौर अग्रिम दिये गये थे. हालांकि कैश बुक में इस बात का उल्लेख नहीं किया गया है कि इस राशि का शौचालय निर्माण किया गया या नहीं. इस अवधि तक कैश बुक में संबंधित अधिकारी का हस्ताक्षर भी नहीं है.

जांच में इस बात की भी जानकारी मिली है कि स्वच्छ भारत मिशन में योजना के क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग के लिए संविदा पर नियुक्त लोगों ने अपने और करीबी लोगों के बैंक खातों में शौचालय निर्माण का पैसा ट्रांसफर किया है.

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