गुमला : शहीद संतोष गोप के पिता ने कहा- बेटा खोया है, अब सरकार बुढ़ापे का सहारा बने

दुर्जय पासवान, गुमला पाकिस्तान के हमले में दो दिन पहले जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए बसिया ब्लॉक के टेंगरा गांव के जवान संतोष गोप के पिता जीतू गोप ने कहा कि वह गरीब हैं. दो बेटे हैं. एक बेटा नीलांबर पांचवीं तक पढ़ा है. वह अभी खेतीबारी करता है. 50 डिसमिल खेत है. 15 बोरा धान […]
दुर्जय पासवान, गुमला
पाकिस्तान के हमले में दो दिन पहले जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए बसिया ब्लॉक के टेंगरा गांव के जवान संतोष गोप के पिता जीतू गोप ने कहा कि वह गरीब हैं. दो बेटे हैं. एक बेटा नीलांबर पांचवीं तक पढ़ा है. वह अभी खेतीबारी करता है. 50 डिसमिल खेत है. 15 बोरा धान होता है. छोटा बेटा संतोष गोप को पढ़ने की इच्छी थी. मैंने मजदूरी कर संतोष को पढ़ाया. भगवान की देन है. वह पढ़ा और सेना में नौकरी की.
सेना में 2012 में नौकरी लगने के बाद घर की स्थिति में सुधार की उम्मीद थी. परंतु अभी सात साल ही नौकरी के हुए थे कि वह शहीद हो गया. बेटे के सहारे जी रहे थे. अब बेटा नहीं रहा. किसके सहारे जियेंगे. घर की स्थिति भी ठीक नहीं है. अब सरकार पर ही उम्मीद है. सरकार मदद करें तो बुढ़ापे में जिंदगी ठीक से कटेगी. बेटा खोया है. अब सरकार मेरा बेटा बने. मेरे बुढ़ापे का सहारा बने.
सेना के अधिकारी के निर्देश पर खोला गया खाता
जवान संतोष गोप के शहीद होने के बाद सोमवार की सुबह सेना के अधिकारी ने शहीद के पिता जीतू गोप को फोन किया. अधिकारी ने कहा कि आप अपने नाम से समीप के किसी बैंक में खाता खुलवा लें. दिन के 12.45 बजे जीतू गोप अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ बैंक ऑफ इंडिया ममरला शाखा पहुंचे. जहां उन्होंने अपने नाम से खाता खुलवाया. साथ ही नॉमिनी में पत्नी सारो देवी का नाम दिया.
जीतू ने बताया कि सेना के अधिकारी ने कहा है कि शहीद संतोष की जो भी राशि है. वह उसी खाते में आयेगा. बैंक अधिकारी को जब पता चला कि शहीद के पिता जीतू हैं तो उन्होंने खुद इसमें गंभीरता दिखाते हुए सेविंग खाता खुलवा दिया है.
शहीद पर गर्व है : सांसद
सांसद सुदर्शन भगत ने रांची में शहीद के पार्थिव शरीर में फूल चढ़ाया. उन्होंने कहा कि टेंगरा गांव के वीर सपूत शहीद संतोष गोप पर पूरे भारत देश को गर्व है. गुमला जिला के युवा प्रेरणा लेते हुए सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करें. उन्होंने यह भी कहा कि शहीद के परिवार को हर संभव मदद सरकार द्वारा की जायेगी. इस दुख की घड़ी में पूरा राज्य परिवार के साथ है. सरकार सभी स्तर से मदद करेगी.
संतोष का देश की सेवा का सपना पूरा हुआ : दोस्त
शहीद का बचपन का दोस्त कार्तिक गोप है. संतोष व कार्तिक 15 दिन के छोटे-बड़े थे. बचपन से ही दोनों साथ खेले कूदे. पढ़ाई भी साथ में की. ममरला स्कूल दोनों एक साथ पढ़ने जाते थे. मैट्रिक पास 2009 में एक साथ किया था. 2005 से 2009 तक ममरला स्कूल में सात से 10वीं तक पढ़े थे. हमलोग गांव के वर्षो पुराने इमली पेड़ के नीचे अक्सर बैठते थे. इधर, जब संतोष सेना में भर्ती हुआ तो वह जब भी आता था. इमली पेड़ के नीचे बने चबूतरा में बैठकर बच्चों के साथ जरूरत खेलता था. इस दौरान वह बच्चों को सेना की ड्यूटी के बारे में बताता था. आज उसे खोकर दिल रो रहा है. उसकी कमी हर समय रहेगी.
शहीद संतोष गोप शांत स्वभाव का था : मनोहर
सेना में साथ में भर्ती हुए सिसई के रोशनपुर निवासी सेना के जवान मनोहर कुमार साहू का चयन वर्ष 2013 भारतीय सेना में एक साथ हुआ था. मनोहर कुमार साहू ने बताया कि शहीद संतोष गोप और वह इंटर विज्ञान के छात्र थे. जिस कारण से उन दोनों का चयन ईएफएस इलेक्ट्रीकल वर्क में सिग्नल कोर जवान के रूप में हुआ था. आगे मनोहर ने बताया कि संतोष बहुत ही सीधा व शांत स्वभाव का था. कम बोलता था. वह अपने काम के प्रति सदैव ईमानदार था. किसी प्रकार का नशा नहीं करता था. मेरी बात को कभी भी अनसुना नहीं करता था.
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