सरकंडा में दो दिवसीय आनंद मार्ग धर्म महा सम्मेलन सम्पन्न

प्रभात संगीत, कीर्तन और सामूहिक ध्यान के साथ हुआ कार्यक्रम
सरकंडा के अजय विवाह भवन में आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से दो दिवसीय आनंद मार्ग धर्म महा सम्मेलन आयोजित किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत प्रभात संगीत, कीर्तन और सामूहिक ध्यान से हुई. प्रतिनिधि आचार्य विकासानंद अवधूत और आनंदमूर्तिजी ने दर्शनपर अपनी बात रखते हुए कहा कि चंचल मन को एकाग्र करने का सर्वोत्तम आध्यात्मिक साधन भजन है. मनुष्य की पांच ज्ञानेंद्रियां और पांच कर्मेंद्रियां मिलकर मन के साथ कुल 11 इंद्रियां बनाती हैं, जिसे एकादश इंद्रिय कहा जाता है. साधना का उद्देश्य इन सभी इंद्रियों एवं मन को विषय-वासनाओं से हटाकर परम सत्य और परमपुरुष की ओर मोड़ना है. इस प्रक्रिया को अभिध्यान कहा जाता है. उन्होंने बताया कि मन 50 प्रकार की वृत्तियों में उलझा रहता है, जो इच्छा, क्रोध, लोभ और मोह के बीच भटकता रहता है. अभिध्यान का अर्थ है इन बिखरी हुई वृत्तियों को समेटकर एक केंद्र की ओर ले जाना. सभी इंद्रियों पर भी आवश्यक जानकारी दी गयी. उन्होंने कहा कि ध्यान जड़ता नहीं देता, बल्कि यह सजग गति और जीवंत प्रवाह प्रदान करता है. केवल स्थिर बैठ जाना ध्यान नहीं है, भीतर एक सूक्ष्म प्रवाह और जीवंत भावना का निरंतर प्रवाह भरी ध्यान है. मौके पर आनंद मार्ग प्रचारक संघ के कल्चरल विंग रावा द्वारा प्रभात संगीत संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया. संघ के केंद्रीय जनसंपर्क सचिव आचार्य दिव्यचेतनानंद अवधूत ने जानकारी देते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा की.
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