हरना नदी बदल रही धार, नदी में समा रही रैयतों की धनखेती जमीन

Published by : SANJEET KUMAR Updated At : 19 Aug 2025 11:47 PM

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मुक्तिधाम का शेड, वर्षों पुराने पेड़ और करोड़ों की पुश्तैनी भूमि खतरे में

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गोड्डा जिले में मानसून की सक्रियता जहां एक ओर खेती के लिए वरदान साबित हो रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ किसानों के लिए मुसीबत बनती जा रही है. गोड्डा के महागामा मुख्य मार्ग स्थित ढाडाचक के समीप बहने वाली हरना नदी ने अपनी धारा बदल ली है, जिसके कारण तटीय इलाके में लगातार कटाव हो रहा है. इस कटाव में अब तक चार बीघा रैयती धान की जमीन नदी में समा चुकी है और खतरा अभी भी टला नहीं है. किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में मुक्तिधाम का शेड, बहियार जाने वाला रास्ता और साठ-सत्तर साल पुराने पीपल एवं बरगद के पेड़ भी कटाव की भेंट चढ़ जाएंगे. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रैयतों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर समय रहते समाधान नहीं मिला, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे.

क्या है मामला

हरना नदी पर 2013 में पुल निर्माण के दौरान संवेदक द्वारा अस्थायी डायवर्जन के रूप में 114 पीपों की पुलिया बनायी गयी थी. पुल बन जाने के बाद संवेदक ने पीपों को नहीं हटाया, जिससे नदी की प्राकृतिक धारा बदल गयी. इसी बदली हुई धारा के चलते अब नदी पूर्व दिशा की ओर जमीन को काट रही है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य के बाद संबंधित विभाग या संवेदक ने नदी की धारा को नियंत्रित करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की.

रैयतों की पुश्तैनी जमीन पर संकट

राजेश ठाकुर, मनीकांत ठाकुर, लीबू राउत, अशोक झा, सुनील राउत, बासुदेव सिकदर सहित दो दर्जन से अधिक रैयतों ने बताया कि इस इलाके में उनकी कई एकड़ पुश्तैनी जमीन है, जो अब धीरे-धीरे नदी में समा रही है. उन्होंने कहा कि संवेदक ने पैसे की उठाव के बाद जिम्मेदारियों से किनारा कर लिया और पुल के आसपास के डायवर्जन को दुरुस्त नहीं किया गया. किसानों ने यह भी बताया कि करोड़ों रुपये की कृषि योग्य भूमि नष्ट हो चुकी है और हालात जस के तस बने रहे, तो यह नुकसान और भी बढ़ सकता है.

प्रशासन से अविलंब कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से कटाव रोकने के लिए तत्काल पिचिंग कार्य कराने, नदी की धारा को पुनः व्यवस्थित करने और संवेदक पर कार्रवाई की मांग की है. यदि मांगें नहीं मानी गयीं, तो उन्होंने आंदोलन का रास्ता अपनाने की चेतावनी दी है.

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