मदरसों के शिक्षकों व बुद्धिजीवियों ने उठाये गंभीर सवाल, राज्य मदरसा बोर्ड गठन की भी जतायी मांग

Published by : SANJEET KUMAR Updated At : 30 Sep 2025 11:09 PM

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आलिम-फाजिल डिग्री पर रोक लगाने की मांग को लेकर महा बैठक का आयोजन

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हनवारा के महागामा स्थित दिग्घी मदरसा में आलिम एवं फाजिल डिग्री पर विभागीय रोक लगाने को लेकर मंगलवार को महा बैठक आयोजित की गयी. इस बैठक में संताल परगना के साथ-साथ झारखंड के अन्य जिलों के बुद्धिजीवी, मदरसा मौलवी और राज्य अल्पसंख्यक आयोग सदस्य हाजी इकरारूल हसन आलम ने भी भाग लिया. बैठक की अध्यक्षता मदरसा शिक्षक संघ के महासचिव हमीदुल गाजी ने की, जबकि संचालन आयज अशद ने किया. हाजी इकरारूल हसन आलम ने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड अधिविद्य परिषद द्वारा जारी अधिसूचना के तहत आलिम-फाजिल डिग्री को स्नातक समकक्ष घोषित किया गया था, लेकिन आज तक इस अधिसूचना को निरस्त नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि इस मामले पर शिक्षा विभाग को गंभीरता से विचार करना चाहिए, क्योंकि सहायक आचार्य भर्ती 2023 में आलिम-फाजिल डिग्रीधारी अभ्यर्थियों एवं उनकी नियुक्तियों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. उन्होंने बताया कि इस विषय पर राज्य के शिक्षा सचिव स्तर पर बातचीत जारी है तथा बिहार से आवश्यक सहयोग एवं मार्गदर्शन भी मांगा गया है. सभा में गिरीडीह से मुफ्ती सईद, जामताडा के अलीमुद्दीन अंसारी, अताउर रहमान सिद्धकी, मुन्ना खुर्शीद, हामिद गाजी, मो सादिक, याहिया सिद्धकी, प्रो कैयुम अंसारी सहित अन्य ने भी अपने विचार रखे. सभी ने राज्य में मदरसा बोर्ड के गठन की सख्त मांग की, जिससे मदरसा शिक्षा का नियमन और बेहतर विकास सुनिश्चित किया जा सके.

मदरसा शिक्षा व्यवस्था सुधार की सिफारिशें

श्री आलम ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आलिम-फाजिल डिग्री को लेकर उत्पन्न असमंजस से निपटने के लिए इन डिग्रियों को किसी विश्वविद्यालय से सीधे एफिलिएट कराने और बिहार की तर्ज पर झारखंड में एक उर्दू-फारसी-अरबी विश्वविद्यालय स्थापित करने की सिफारिश की गयी है. इससे मदरसों को पढ़ाई का आदेश देने, परीक्षा एवं डिग्री के मुद्दे का स्थायी समाधान निकल सकेगा.

मुस्लिम शैक्षणिक अधिकारों पर उठाये गंभीर सवाल

मदरसा शिक्षक संघ के नेता एस अली ने कहा कि सरकार द्वारा मुस्लिम समुदाय के शैक्षणिक अधिकारों को ह्रास पहुंचाया जा रहा है. बिना उचित जांच के 544 सरकारी उर्दू स्कूलों का स्टेटस हटाकर उन्हें सामान्य विद्यालय में बदल दिया गया तथा जुमा की छुट्टी समाप्त कर दी गयी. उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 में बिहार से मिले 4401 उर्दू सहायक शिक्षक पदों में से रिक्त 3712 पदों को स्नातक टेट उत्तीर्णों से भरने के बजाय, इन पदों को छोड़कर सहायक आचार्य पद बनाकर ग्रेड पे आधा कर दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाकर झारखंड में कार्रवाई

एस अली ने बताया कि 5 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड के लिए दिए गए फैसले का आधार लेकर झारखंड में भी झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा कार्रवाई की जा रही है। बैठक में आलिम-फाजिल डिग्री को स्नातक एवं स्नातकोत्तर समकक्ष मान्यता देने, मदरसा शिक्षा व्यवस्था को सुधारने तथा मुस्लिम समुदाय के शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की गयी.

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