नये सोच के साथ युवा कृषि क्षेत्र में उतरें : डॉ सुनील
Published by :Prabhat Khabar News Desk
Published at :13 Jun 2024 11:26 PM (IST)
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बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची के कुलपति डॉ सुनील चंद्र दुबे ने गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र बेंगाबाद का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने संस्थान के कार्यक्रमों का जायजा लिया.
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बीएयू के कुलपति ने कृषि विज्ञान केंद्र का किया निरीक्षण, किसानों से वार्ता कर दिए आवश्यक सलाह
बेंगाबाद.
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची के कुलपति डॉ सुनील चंद्र दुबे ने गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र बेंगाबाद का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने संस्थान के कार्यक्रमों का जायजा लिया. कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ पंकज सेठ से कृषि के क्षेत्र में चलायी जा रही गतिविधियों व किसानों को हो रहे लाभ के संबंध में भी चर्चा किया. कुलपति ने कहा केंद्र के माध्यम से नयी तकनीक किसानों के खेतों तक पहुंचा जा रहा है. कई योजनाओं में तकनीक का सीधे खेतों में प्रदर्शन किया जाता है. इस तरह के प्रदर्शन में किसानों की सहमति मिलती है और वह इसका लाभ उठाते हैं. कहा अब खेती सिर्फ जीविकोपार्जन का जरिया नहीं रह गया है. हर क्षेत्र की तरह कृषि क्षेत्र का विस्तार हुआ है. कृषि कार्य को बिजनेस के तौर पर अपनाना होगा, तभी किसानों की आय में वृद्धि होगी.वैज्ञानिक पद्धति की ललक किसानों को पैदा करनी होगी
युवाओं को नयी सोच के साथ इस क्षेत्र में उतरना होगा. वैज्ञानिक पद्धति से खेती कार्य में विविधता लाकर हम अपनी आय का विस्तार कर सकते हैं. केवीके में तकनीक उपलब्ध है. इसका लाभ किसानों को लेने के लिए आगे आना होगा. परंपरागत कृषि के साथ वैज्ञानिक पद्धति की ललक किसानों को पैदा करनी होगा, ताकि इसका अंतर नजर आये. उन्होंने कृषि के अलावा पशुपालन, मत्स्य पालन, पौधरोपण के क्षेत्र में भी आगे आने की बात कही. उन्होंने युवाओं को सामूहिक खेती और उत्पादों का कुशल मार्केटिंग के क्षेत्र में आने की सलाह दी. कहा झारखंड में इस क्षेत्र में काफी संभावना है. उन्होंने प्रधान वैज्ञानिक से इस क्षेत्र के किसानों को खेती में उगायी जाने वाली प्रजाति की फसलों के संबंध में भी बात की. कहा ऐसी व्यवस्था अगले सीजन से करें, जिससे किसानों को इसका लाभ दिया जा सके. इस मौके पर जापानी आम की प्रजाति मियाजाकी का पौधा लगाया गया. डॉ दुबे ने कहा इस आम की यह प्रजाति काफी उन्नत किस्म की है और इसकी कीमत भी लाखों में है. ऐसे में केवीके में इसका प्रयोग किया गया है. आने वाले दिनों में किसानों को भी इस आम खेती से जोड़ने की योजना है. मौके पर वैज्ञानिक डॉ नवीन कुमार, मधुकर कुमार , मनोज कुमार, शुभंकर कुमार, संजीव सहित अन्य उपस्थित थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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