नल-जल योजना में कागजी घोड़ा दौड़ाने की तैयारी में जुटा विभाग, जलसहिया करेंगी सर्वे

Updated at : 10 Jul 2024 11:02 PM (IST)
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नल-जल योजना में कागजी घोड़ा दौड़ाने की तैयारी में जुटा विभाग, जलसहिया करेंगी सर्वे

प्रखंड में नल-जल योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है. यहां अधिकांश गांवों में ग्रामीणों को नल से पानी नहीं मिल पा रहा है. भीषण गर्मी के मौसम में नल से जल आपूर्ति करने में विभाग फेल रही. हर गांव के ग्रामीण परेशान हैं.

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प्रखंड में नल-जल योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है. यहां अधिकांश गांवों में ग्रामीणों को नल से पानी नहीं मिल पा रहा है. भीषण गर्मी के मौसम में नल से जल आपूर्ति करने में विभाग फेल रही. हर गांव के ग्रामीण परेशान हैं. लेकिन, विभाग व संवेदक के कानों में जूं तक नहीं रेंग रहा. अब बीडीओ निशा कुमारी ने मोर्चा संभालते हुए विभागीय निर्देश के तहत जल सहिया को रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी है. बुधवार को प्रखंड परिसर के सभागार में कनीय अभियंता राज आंनद, विभिन्न पंचायतों के मुखिया व जल सहिया के साथ बैठक में बीडीओ ने एक सप्ताह के अंदर गांवों की स्थिति से संबंधित रिपोर्ट मांगी है. जल सहिया को विहित प्रपत्र भी उपलब्ध करा दिया गया है. अब देखना दिलचस्प होगा कि सर्वे रिपोर्ट के बाद वंचित परिवारों को कबतक नल से पानी मिल सकेगा. बीडीओ के अनुसार सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रतिवेदन तैयार कर वरीय अधिकारियों को भेजा जाएगा.

बैठक में मुखिया ने जतायी आपत्ति

मुखिया संघ के प्रखंड अध्यक्ष मो शमीम ने बैठक में कहा पंचायतों में नल-जल योजना पूरी तरह से फेल है. ग्रामीणों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. किसी भी गांव में सही से पानी नहीं चल रहा है. संवेदक मुखिया की बात नहीं सुनते हैं. इसकी शिकायत कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता तक कि गई लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ. अब विभाग की ओर से बैठक कर जल सहिया से रिपोर्ट मांग रहे हैं. ऐसे में कितना लाभ होगा यह कहा नहीं जा सकता. इधर मधवाडीह पंचायत के मुखिया मो सदिक अंसारी ने भी बैठक में योजना की धरातलीय स्थिति से बीडीओ को अवगत कराया. कहा जैसे तैसे कार्य कर संवेदक ने खानापूर्ति किया है. ग्रामीणों को योजना का लाभ नहीं मिला है. कहीं मोटर खराब है तो कहीं बोरिंग में खानापूर्ति की गई है. जनप्रतिनिधियों की बात कोई सुनने वाला नहीं है. ऐसे में जनता से बात सुननी पड़ रही है. जनप्रतिनिधियों के विरोध के बाद जल सहिया को प्रपत्र उपलब्ध कराकर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी गई है.

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