गढ़वा में देसी मागुर के लिए बनेगा राज्य का पहला मॉडल फार्म

Updated at : 11 Mar 2026 10:10 PM (IST)
विज्ञापन
गढ़वा में देसी मागुर के लिए बनेगा राज्य का पहला मॉडल फार्म

राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड ने दी 1.6 करोड़ की परियोजना को स्वीकृति

विज्ञापन

राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड ने दी 1.6 करोड़ की परियोजना को स्वीकृति वरीय संवाददाता, गढ़वा गढ़वा जिला मत्स्य पालन के क्षेत्र में लगातार नये आयाम स्थापित कर रहा है. उपायुक्त दिनेश यादव के मार्गदर्शन और जिला मत्स्य पदाधिकारी धनराज आर कापसे की सक्रिय पहल से गढ़वा अब नवोन्मेषी विचारों का केंद्र बनता जा रहा है. इसी क्रम में जिले के प्रगतिशील उद्यमी कामेश्वर चौधरी की महत्वाकांक्षी परियोजना को राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड से मंजूरी मिल गयी है. यह झारखंड का पहला बड़ा मॉडल फार्म होगा, जो राज्य की राजकीय मछली देसी मागुर के संरक्षण और उसके व्यावसायिक उत्पादन पर केंद्रित रहेगा. राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड ने एफआइडीएफ के कड़े दिशा-निर्देशों के तहत प्रस्ताव की विस्तृत जांच के बाद इसे नवोन्मेषी परियोजना की श्रेणी में रखा है. इस मॉडल फार्म की कुल लागत लगभग 1.6 करोड़ रुपये अनुमानित है. केंद्रीय अनुमोदन व निगरानी समिति ने इस परियोजना के लिए 1.28 करोड़ के ऋण को ब्याज सब्सिडी के लिए पात्र माना है. वहीं शेष 32 लाख रुपये का निवेश उद्यमी स्वयं करेंगे. परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के छह महीने के भीतर इसे धरातल पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है. सालाना 87.50 लाख के राजस्व का अनुमान फार्म शुरू होने के बाद प्रति वर्ष लगभग 35 से 40 मीट्रिक टन मछली उत्पादन होने की उम्मीद है. इससे सालाना करीब 87.50 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है. यह गढ़वा जिले के लिए एफआइडीएफ के तहत तीसरी मंजूरी है, जो जिले की बढ़ती साख को दर्शाती है. गढ़वा जिला मत्स्य पालन के क्षेत्र में लगातार नयी ऊंचाइयों को छू रहा है. उपायुक्त के नेतृत्व में जिला मत्स्य पदाधिकारी धनराज आर कापसे ने जिले में नीली क्रांति को बढ़ावा देने के लिए कई अनूठे प्रयोग किये हैं. जिले में संचालित केज कल्चर मॉडल की सराहना नीति आयोग द्वारा भी की जा चुकी है. अब देसी मागुर के इस मॉडल फार्म से गढ़वा को राष्ट्रीय स्तर पर एक नयी पहचान मिलने की उम्मीद है. क्यों खास है यह प्रोजेक्ट राजकीय मछली का संरक्षण: झारखंड की राजकीय मछली देसी मागुर का अस्तित्व धीरे-धीरे खतरे में पड़ रहा है. यह मॉडल फार्म इसके संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. नवोन्मेषी परियोजना: राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड के गाइडलाइन क्रमांक 20 के तहत इस परियोजना को नवोन्मेषी श्रेणी में रखा गया है. इससे उत्पादन के साथ-साथ मूल्यवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा. रोजगार के अवसर: इस बड़े प्रोजेक्ट से स्थानीय स्तर पर दर्जनों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है.

विज्ञापन
Akarsh Aniket

लेखक के बारे में

By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola