- ट्रेन ठहराव को ले कुमारधुबी स्टेशन अरसे से है उपेक्षा का शिकार
Published by :Prabhat Khabar News Desk
Published at :03 May 2024 6:51 PM (IST)
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रेलवे ने कुमारधुबी स्टेशन को बराबर रखा उपेक्षित. नहीं मिला ट्रेनों का ठहराव
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सांसद पीएन सिंह के प्रयास से अमृत भारत स्टेशन योजना में शामिल होने के बाद भी की गयी अनदेखी, बिहार के लोगों की इलाके में खासी संख्या के बावजूद पटना इंटरसिटी का नहीं मिला ठहराव,
प्रवीण कुमार चौधरी, चिरकुंडा.
धनबाद लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के निरसा विधानसभा क्षेत्र में कुमारधुबी रेलवे स्टेशन आता है, जो आसनसोल रेल मंडल क्षेत्र में पड़ता है. स्टेशन के विकास के मामले में तो इसे अमृत भारत स्टेशन योजना में सांसद पीएन सिंह के प्रयास से ले लिया गया है, लेकिन ट्रेन ठहराव के मामले में यह स्टेशन काफी लंबे अरसे से उपेक्षा का शिकार होता रहा है. लोकसभा, विधानसभा व नगर परिषद चुनाव में हमेशा ट्रेन के ठहराव का मुद्दा उठता है, लेकिन यहां के मतदाता अपने आपको अपेक्षित महसूस करते रहे हैं. सांसद पीएन सिंह से लगातार इस क्षेत्र के लोग विभिन्न ट्रेनों के कुमारधुबी में ठहराव की मांग करते रहे, कुछ ट्रेनों का ठहराव मिला भी, लेकिन जिसकी जरूरत थी, उसका ठहराव आज तक नहीं हुआ और इस चुनाव में भी कुमारधुबी स्टेशन पर विभिन्न ट्रेनों का ठहराव एक मुद्दा मतदाताओं के बीच है. कुमारधुबी स्टेशन के आसपास डीवीसी की दो इकाई (मैथन व पंचेत), कोल इंडिया की दो अनुषंगी इकाई इसीएल व बीसीसीएल की कई कोलियरियां, टाटा पावर व डीवीसी की संयुक्त इकाई एमपीएल सहित दर्जनों छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं, जिनमें हजारों की संख्या में लोग कार्य कर रहे हैं. यह धनबाद व आसनसोल के बीच सबसे प्रमुख स्टेशनों में एक है. बावजूद आसनसोल रेल मंडल की उपेक्षा का शिकार यह स्टेशन बनता जा रहा है. धनबाद से पटना के लिए जब इंटरसिटी एक्सप्रेस का परिचालन शुरू हुआ तो इस क्षेत्र के लोग काफी खुश हुए कि उनके लिए एक अच्छी ट्रेन का शुरू हुआ, लेकिन जब इसका ठहराव कुमारधुबी न देकर बराकर दिया गया तो यह स्पष्ट हो गया कि यह स्टेशन उपेक्षा का शिकार हो गया है. यहां बिहार के विभिन्न जिला के रहने वाले लाेगों की संख्या अधिक है. इसके बावजूद पटना इंटरसिटी का ठहराव नहीं दिया गया. पर्व-त्योहार या गर्मी के मौसम में जब भी इस रास्ते स्पेशल ट्रेन चलायी जाती है तो उसका ठहराव कुमारधुबी न देकर बराकर दिया जाता है. इन सारी बातों से दर्जनों बार यहां के लोग रेल अधिकारियों को अवगत कराते रहे हैं, लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं मिल पाया है. इस क्षेत्र के लोग चुनाव में भाग ले रहे प्रत्याशियों से निश्चित तौर पर मांग के अनुरूप ट्रेनों के ठहराव की मांग को रखते रहे हैं, लेकिन किसी ने इसे चुनावी मुद्दा नहीं बनाया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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