बच्चों को स्कूल लाने के लिए माता पिता तक पहुंचने का करें प्रयास

Updated at : 19 Jul 2024 1:43 AM (IST)
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बच्चों को स्कूल लाने के लिए माता पिता तक पहुंचने का करें प्रयास

न्यू टाउन हॉल. बैक टू स्कूल कैंपेन को ले जिला स्तरीय कार्यशाला

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वित्तीय वर्ष 2024-25 में सभी अनामांकित व छीजित (30 दिन से लगातार अनुपस्थित रहनेवाले छात्र) बच्चों का स्कूल में नामांकन सुनिश्चित कराने और अनुपस्थित बच्चों को स्कूल लाने के लिए गुरुवार को न्यू टाउन हॉल में स्कूल रुआर-2024 (बैक टू स्कूल कैंपेन) को लेकर जिला स्तरीय कार्यशाला हुई. जिला शिक्षा अधीक्षक भूतनाथ रजवार ने कहा : पांच से 18 आयु वर्ग के सभी बच्चों की शिक्षा, बच्चों को विद्यालय में वापस लाना व नियमित उपस्थिति बनाये रखना राज्य सरकार की प्राथमिकता है. इस जिम्मेवारी को निभाने के लिए विद्यालय प्रबंधन समिति, शिक्षक, पंचायत प्रतिनिधि, समाजसेवी, शिक्षा से जुड़े कर्मी, अधिकारी की भागीदारी की आवश्यकता है. अभियान के तहत विद्यालय से बाहर रह गये बच्चे, प्रवासी बच्चे व विशेष आवश्यकता वाले बच्चे के माता-पिता तक पहुंचने का प्रयास किया जायेगा. यह भी सुनिश्चित किया जायेगा कि एक भी बच्चा विद्यालय से बाहर न रहे तथा सभी बच्चे विद्यालय में नामांकित हो और अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी करें.

कार्यक्रम का उद्देश्य : डीएसइ ने कहा कि नामांकित सभी बच्चों की स्कूल में उपस्थिति सुनिश्चित करना, विद्यालय से बाहर रह गये बच्चों का शत प्रतिशत नामांकन व उपस्थित, पिछले वर्षों में कक्षा एक से 11 तक के नामांकित सभी बच्चों का अगली कक्षा में शत प्रतिशत नामांकन व उपस्थिति, सभी बच्चों की उपस्थिति ई-विद्यावाहिनी में दर्ज करना तथा नव नामांकित बच्चों की शत प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करना कार्यक्रम का उद्देश्य है.

3655 बच्चे हैं ड्रॉप आउट

: जिले में 3655 बच्चे ड्रॉप आउट है. इन बच्चों को स्कूल लाने को लेकर ही कार्यक्रम चलाया जायेगा. इसमें बाघमारा में 478, बलियापुर में 330, धनबाद में 641, गोविंदपुर में 443, झरिया में 330, निरसा में 420, तोपचांची में 294, टुंडी में 425, पूर्वी टुंडी में 294 बच्चे शामिल हैं. इसमें छह से 14 साल के 3166 और 15 से 18 साल के 489 बच्चे शामिल हैं.

दूर होनी चाहिए स्कूलों की कमियां :

तोपचांची बीडीओ फनिश्वर रजवार ने कहा कि स्कूलों में कमियों के कारण बच्चे स्कूल नहीं जाना चाहते हैं. हमें इसपर काम करना होगा. ताकि बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित किया जा सके. एग्यारकुंड बीडीओ मधु कुमारी ने कहा : आजादी के 75 साल के बाद भी स्कूल में सभी बच्चे नहीं आ रहे हैं, तो यह चिंतन का विषय है. मैं भी सरकारी विद्यालय में पढ़ी हूं. लेकिन आज के शिक्षकों में इच्छा शक्ति की कमी देखी जाती है. शिक्षकों को इसमें सुधार करना चाहिए. आज स्कूलों में नि:शुल्क किताब, ड्रेस, बेंच-डेस्क समेत अन्य सुविधा दी जा रही है. इसके बाद भी बच्चे नहीं आ रहे हैं, तो आत्ममंथन करना होगा.

ये थे मौजूद :

कार्यक्रम में जिला पंचायती राज पदाधिकारी मुकेश कुमार बाउरी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अनीता कुजूर, प्रभारी जिला कल्याण पदाधिकारी नियाज अहमद, दिलीप कुमार कर्ण, घनश्याम दुबे, एडीपीओ विजय कुमार, एपीओ प्रदीप रवानी आदि मौजूद थे.

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