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Dhanbad News: झारखंड में म्यूटेशन अपील के 26,053 मामले लंबित, रांची में सबसे अधिक

झारखंड में म्यूटेशन अपील के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. पांच जनवरी तक पूरे राज्य में म्यूटेशन अपील के कुल 26,053 मामले लंबित थे.

झारखंड में म्यूटेशन अपील के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. पांच जनवरी तक पूरे राज्य में म्यूटेशन अपील के कुल 26,053 मामले लंबित थे. सबसे खराब स्थिति राजधानी रांची की है. लंबित मामलों की संख्या में वह राज्य में पहले स्थान पर है. वहां सबसे अधिक 5,051 मामले लंबित हैं. वहीं 2,827 लंबित मामलों के साथ धनबाद दूसरे स्थान पर है. बोकारो में 2,328, कोडरमा में 2,221, गढ़वा में 2,285, हजारीबाग में 1,879 और पलामू में 1,620 मामले लंबित हैं. वहीं, ईस्ट सिंहभूम में 1,110, गिरिडीह में 1,228, सरायकेला-खरसावां में 1,029, गुमला में 790, साहिबगंज में 670, रामगढ़ में 590, वेस्ट सिंहभूम में 465, लोहरदगा में 307, चतरा में 387, देवघर में 247, पाकुड़ में 136, लातेहार में 138, दुमका में 117, सिमडेगा में 44, गोड्डा में 30 और जामताड़ा में 15 मामले लंबित हैं.

डीसीएलआर के पास 16271 अपील लंबित

आंकड़ों के अनुसार, म्यूटेशन अपील के सबसे अधिक मामले डीसीएलआर के कार्यालयों में लंबित हैं. धनबाद में डीसीएलआर के पास करीब 2,600 मामले लंबित हैं, जो राज्य में सबसे अधिक है. वहीं डीएसएलआर स्तर पर रांची में 2,110, कोडरमा में 1,972, बोकारो में 1,901 और गढ़वा में 1,163 मामले लंबित हैं. इसका कारण मामलों की संख्या अधिक होना और प्रक्रिया में समय लगना बताया जा रहा है.

21,612 मामलों का 90 से अधिक दिन से नहीं हुआ निष्पादन

आंकड़ों के अनुसार, राज्य में म्यूटेशन अपील के 21,612 मामले 90 से अधिक दिनों से लंबित हैं. इनमें भी राजधानी रांची राज्य में पहले स्थान पर है, जहां 4,412 मामले लंबित हैं. धनबाद में 2,291, बोकारो में 1,927, कोडरमा में 1,895, गढ़वा में 1,870, हजारीबाग में 1,677 और पलामू में 1,409 मामले 90 दिन से अधिक समय से लंबित हैं. अंचल अधिकारियों (सीओ) के पास म्यूटेशन के कुल 9,206 मामले लंबित हैं. इनमें रांची में सबसे अधिक 2,936, दूसरे स्थान पर गढ़वा में 1,120 और तीसरे स्थान पर हजारीबाग में 1,035 मामले लंबित हैं.

म्यूटेशन अपील के लंबित मामले चिंता का विषय

म्यूटेशन अपील के निष्पादन में लगातार हो रही देरी चिंताजनक है. आमतौर पर लोग तभी अपील में जाते हैं, जब अंचल अधिकारी द्वारा उनका म्यूटेशन आवेदन खारिज कर दिया जाता है. ऐसे में अपील लंबित रहने से लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. समय पर सुनवाई नहीं होने के कारण जमीन से जुड़े मामलों में अनिश्चितता बढ़ रही है.

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