Dhanbad News: निजी हाथों में जायेगी कमर्शियल वाहनों की फिटनेस प्रक्रिया

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Dhanbad News: निजी हाथों में जायेगी कमर्शियल वाहनों की फिटनेस प्रक्रिया

एमवीआइ कार्यालयों से खत्म होगी सर्टिफिकेट की प्रक्रिया

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सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के निर्देश पर झारखंड में कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो रहा है. अब जिला स्तर पर मोटर व्हीकल निरीक्षक (एमवीआइ) कार्यालयों में फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं होंगे. यह जिम्मेदारी अधिकृत निजी ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटरों को सौंप दी जायेगी. धनबाद के वाहन मालिकों को अब फिटनेस के लिए दूसरे जिलों का रुख करना पड़ेगा. इससे ट्रांसपोर्टरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा और माल ढुलाई की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है. वर्तमान में राज्य में केवल रांची, हजारीबाग और जमशेदपुर में ही ऑटोमेटेड प्राइवेट फिटनेस सेंटर संचालित हैं. ऐसे में धनबाद समेत अन्य जिलों के वाहन मालिकों को इन्हीं तीन शहरों में जाकर जांच करानी होगी. ट्रक और बसों को लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे डीजल खर्च, टोल टैक्स और ड्राइवर भत्ता बढ़ेगा. छोटे ट्रांसपोर्टरों के लिए यह व्यवस्था भारी पड़ सकती है. धनबाद के गोविंदपुर में लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से ऑटोमेटेड टेस्टिंग और फिटनेस सेंटर बनाया जा रहा है. लेकिन निर्माण कार्य अभी करीब 50 प्रतिशत ही पूरा हुआ है. फंड के अभाव में काम ठप है. जब तक यह सेंटर चालू नहीं होता, स्थानीय ट्रांसपोर्टरों को राहत मिलना मुश्किल है. वाहन मालिकों का कहना है कि स्थानीय सुविधा उपलब्ध कराये बिना पुरानी व्यवस्था बंद करना व्यवहारिक नहीं है.

मशीनों से होगी जांच, पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन

निजी ऑटोमेटेड सेंटरों में वाहनों की जांच रोलर ब्रेक टेस्टर, सस्पेंशन टेस्टर, साइड-स्लिप टेस्टर, जाइंट-प्ले टेस्टर और स्पीडोमीटर जैसी आधुनिक मशीनों से की जायेगी. पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और सेंसर आधारित होगी. सरकार का उद्देश्य सड़क सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और वाहन प्रबंधन को तकनीकी रूप से सुदृढ़ करना है. इन सेंटरों की निगरानी केंद्र स्तर पर की जायेगी.

होगी समस्या

– सिर्फ तीन सेंटरों पर पूरे राज्य का दबाव पड़ने से लंबी कतार लगना तय माना जा रहा है. ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग में भी देरी हो सकती है.- समय पर जांच नहीं हुई तो वाहन दो-तीन दिन तक खड़े रह सकते हैं. इसका सीधा असर माल ढुलाई, कोयला परिवहन और स्थानीय व्यवसाय पर पड़ेगा

– नयी व्यवस्था लागू होने के बाद प्रति वाहन अतिरिक्त हजारों रुपये का खर्च जुड़ सकता है. इससे परिवहन लागत बढ़ने की आशंका है.

औद्योगिक जिला, हर माह 50–100 फिटनेस सर्टिफिकेट

– धनबाद औद्योगिक जिला है. यहां कोयला और अन्य सामग्रियों की बड़े पैमाने पर ढुलाई होती है. जिले में औसतन हर माह 50 से 100 कमर्शियल वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट जारी होते हैं.

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आशीष कुमार

लेखक के बारे में

By आशीष कुमार

आशीष कुमार प्रिंट माध्यम में 16 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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