हाल पीएमसीएच का : पांच महीने में 134 नवजातों ने ताेड़ा दम

Published at :23 Jun 2020 5:37 AM (IST)
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स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग, झारखंड द्वारा शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए करोड़ों की याेजनाएं चल रही हैं. इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं आ रहा है. आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष के शुरू के पांच माह में ही पीएमसीएच, धनबाद में 134 नवजात ने दम तोड़ दिया है. इसमें 77 लड़के, 57 लड़कियां है. इसमें कुछ ऐसे बच्चे भी हैं, जिसने मृत अवस्था में जन्म लिया है या फिर जन्म के कुछ दिनों के अंदर उनकी मौत हो गयी.

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धनबाद : स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग, झारखंड द्वारा शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए करोड़ों की याेजनाएं चल रही हैं. इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं आ रहा है. आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष के शुरू के पांच माह में ही पीएमसीएच, धनबाद में 134 नवजात ने दम तोड़ दिया है. इसमें 77 लड़के, 57 लड़कियां है. इसमें कुछ ऐसे बच्चे भी हैं, जिसने मृत अवस्था में जन्म लिया है या फिर जन्म के कुछ दिनों के अंदर उनकी मौत हो गयी.

सबसे अधिक मौत मई माह में हुई है. जनवरी में 31 बच्चाें की मौत हुई है, वहीं मई में यह आंकड़ा 34 पहुंच गया है. इधर पीएमसीएच में बच्चों के इलाज की व्यवस्था की बात करें, तो एनआइसीयू के बेबी वार्मर फुल हो गया है. नये बच्चों को रखने की जगह नहीं है. हालत यह हो गयी है कि एक-एक यूनिट वार्मर में दो-दो बच्चों को रखा जा रहा है.

आंगनबाड़ी में गर्भवती की मॉनिटरिंग : महिला बाल विकास विभाग, आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की देख-रेख करता है.

इनका काम है गर्भवती को आवश्यक पोषक आहार, दवाइयां और सही सलाह देना. साथ ही समय-समय पर गर्भवती का टीकाकरण भी कराया जाता है. सहिया-सहायिकाओं के माध्यम से यह काम किया जाता है. इसके लिए बड़ा बजट भी है. यह सब इसलिए किये जाते हैं, ताकि प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा दोनों ही सुरक्षित रहें.

जिले का एकमात्र शिशु केयर यूनिट

पीएमसीएच में धनबाद के अलावा गिरिडीह, जामताड़ा, पाकुड़ समेत आसपास के जिले से भी मरीज आते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं कम होने और समय से पहले प्रसव होने के कारण कई नवजात बच्चे रेफर होकर एनआइसीयू यूनिट में भर्ती होने के लिए आते हैं. जिले में नवजात शिशु के इलाज के लिए यहीं सरकारी स्तर पर एकमात्र यूनिट होने के कारण नवजात को भर्ती करना पड़ता है. जिलों में सुविधाओं की कमी भी बढ़ती माैत की एक वजह माना जा रहा है.

पीएमसीएच : वॉर्मर की है कमी

नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआइसीयू) में रेडिएंट वार्मर की कमी बड़ी समस्या बन गयी है. एनआइसीयू में फिलहाल सिर्फ 12 वार्मर हैं, जबकि 15 से अधिक बच्चे भर्ती है. ऐसे में नियमों की अनदेखी कर एक वार्मर में दो बच्चों को रखा जा रहा है. ऐसा करना बच्चों के लिए खतरनाक है. उन्हें इंफेक्शन होने का खतरा होता है, क्याेंकि सभी नवजातों को अलग-अलग तापमान की जरूरत होती है. अभी पीएमसीएच में पांच बेबी वार्मर खराब हो गये हैं. इसकी मरम्मत नहीं हो पाने के कारण समस्या अधिक हो गयी है.

लॉकडाउन के कारण टीकाकरण थोड़ा प्रभावित हुआ था, लेकिन अब काम चल रहा है. गर्भ में बच्चों के मरने या कमजोर बच्चा होने का एक कारण पौष्टिक आहार समय पर नहीं लेना होता है. इसके अलावा भी कई कारण होते है. लॉकडाउन के कारण कई गर्भवती समय पर अस्पताल नहीं आ पा रही थी, यह भी एक कारण हो सकता है.

डॉ गोपाल दास, सिविल सर्जन

बच्चों की संख्या बढ़ने के कारण दिक्कत आ रही है. अच्छे से ध्यान दिया जा रहा है. नये वार्मर की खरीदारी के लिए प्रस्ताव भेजा गया है. स्वीकृति मिलने पर आगे की प्रक्रिया की जायेगी.

डॉ अरुण कुमार चौधरी, अधीक्षक, पीएमसीएच

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