जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज की धरोहर, संस्कृति को बचाने की जरूरत

Updated at : 06 Jan 2020 9:31 AM (IST)
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जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज की धरोहर, संस्कृति को बचाने की जरूरत

मधुपुर : कॉलेज परिसर स्थित आदिवासी कल्याण छात्रावास में सोहराय मिलन समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उदघाटन विधायक हाजी हुसैन अंसारी, नप अध्यक्ष लतिका मुर्मू, जिप सदस्य दिनेश्वर किस्कू, प्रभारी प्रचार्य ने पशुपति राय संयुक्त रूप से किया. कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी महिलाओं द्वारा आदिवासी नृत्य प्रस्तुत कर किया. जिसमें गीत व संगीत, […]

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मधुपुर : कॉलेज परिसर स्थित आदिवासी कल्याण छात्रावास में सोहराय मिलन समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उदघाटन विधायक हाजी हुसैन अंसारी, नप अध्यक्ष लतिका मुर्मू, जिप सदस्य दिनेश्वर किस्कू, प्रभारी प्रचार्य ने पशुपति राय संयुक्त रूप से किया. कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी महिलाओं द्वारा आदिवासी नृत्य प्रस्तुत कर किया.

जिसमें गीत व संगीत, सोहराय लोक नृत्य की प्रस्तुति दी गयी. कार्यक्रम में विधायक हाजी हुसैन ने कहा कि सोहराय आदिवासी समुदाय का सबसे बड़ा पर्व है. पर्व आदिवासी धरोहर को संजोये रखे है. समारोह में आदिवासी समुदाय के महिलाओं व पुरूषों ने भी लोक नृत्य में हिस्सा लिया. प्राचार्य ने कहा कि आदिवासी संस्कृति काफी प्यारी है. कहा कि भारत ऐसी भूमि है, जहां सभी जाति के लोग निवास करते हैं.
कहा कि आदिवासियों ने जल, जंगल व जमीन को संजोये रखने में अपनी भूमिका निभाते हैं. प्रो होरेन हांसदा ने कहा कि सोहराय पर्व खेती की खुशहाली में मनाते हैं. सोहराय पर्व आदिवासी संस्कृति से जुड़ा हुआ पर्व है. आदिवासी समाज में सोहराय पर्व की तुलना हाथी के समान विशाल प्राणी से की जाती है.
जिस कारण इसे हाथी लेबान पर्व भी कहा जाता है. इस पर्व में विशेष कर अपने बहनों के साथ सगे संबंधियों को उनके घर जाकर आमंत्रित किया जाता है. पांच दिनों तक चलने वाले इस पर्व में पूरे गांव के लोग सामूहिकता के साथ गीत, नृत्य करते हैं.
सेवानिवृत्त शिक्षिका पद्मिनी मुर्मू ने कहा कि सोहराय पर्व में सबसे पहले अपनी नयी फसल गोसाय ऐरा को अर्पित करने के उपरांत ही इसे ग्रहण करते हैं.
कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया. कार्यक्रम सिदो कान्हू, इतुन अखाड़ा, आदिवासी ऐभेन अखाड़ा, रूनझुनु अखाड़ा, आदिवासी बुद्धि मंच, जुमित गांवता समेत सुदुरवर्ती ग्रामीण के साथ साथ बच्चे, बुजुर्ग महिलाएं व पुरुष उपस्थित रहे. कार्यक्रम को सफल बनाने में राज सोरेन, सूरज हांसदा, सुबोधन हेंब्रम, दिलचंद मरांडी, प्रेम मुर्मू, भूदेव किस्कू, राजकुमार बेसरा, रंजीत मुर्मू, सुनील मुर्मू आदि मौजूद थे.
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