बादलों ने दिखायी दरियादिली, मरते बिचड़ों को मिली सांस, जगी उम्मीद
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :23 Jul 2018 6:25 AM (IST)
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मधुपुर : सुखाड़ की आशंका से डरे-सहमे जिले भर के किसान पिछले दो दिनों से हो रही बारिश के बाद थाेड़ी राहत महसूस कर रहे हैं. मॉनसून शुरू होने के बाद भी जिले में बारिश नहीं हो रहे थी. आसमान में उमड़ते हुए बादल तो दिख रहे थे पर जमीन पर पानी की बूंदें नहीं […]
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मधुपुर : सुखाड़ की आशंका से डरे-सहमे जिले भर के किसान पिछले दो दिनों से हो रही बारिश के बाद थाेड़ी राहत महसूस कर रहे हैं. मॉनसून शुरू होने के बाद भी जिले में बारिश नहीं हो रहे थी. आसमान में उमड़ते हुए बादल तो दिख रहे थे पर जमीन पर पानी की बूंदें नहीं टपक रही थी. किसानों ने महाजनों से सूद पर कर्ज लेकर बीज खरीदी थी.
बिचड़ा भी लगभग तैयार हो चुका था, केवल रोपनी करनी बाकी थी. समय गुजरता-जा रहा था और बारिश नहीं होने की वजह से खेतों में लगाया गया बिचड़ा मर रहा था. किसान धान रोपनी नहीं कर पा रहे थे. जिन गांवों के तालाबों में पानी थे, वहां धनरोपनी के बाद किसान केरोसिन व डीजल खरीदकर किसी प्रकार फसल बचाने की जद्दोजहद में जुटे थे.
लेकिन, ऐसा लगता है कि बादलों से भी किसानों की परेशानी नहीं देखी गयी व अपनी रहम बरसा दी. रविवार की सुबह से हो रही अच्छी बारिश के साथ ही किसान रोपनी के लिए अपने अपने खेतों की तरफ निकल चुके हैं. हालांकि, खेतों को अभी और पानी की जरूरत है, फिर भी बादलों की दरियादिली से किसानों में थोड़ी उम्मीद की किरण जरूर की जगी है.
मारगोमुंडा: तत्काल मिली राहत
मारगोमुंडा. प्रखंड क्षेत्र में शुक्रवार शाम से लगातार हो रही बारिश से क्षेत्र के किसानों के बीच खुशहाली देखने को मिली. रूक-रूक हो रही बारिश से खेतों में कुछ हद तक पानी ठहर गया है. बारिश होने से किसानो का बिचडा झुलसने से बच गया. वहीं मकई फसल के लिए बारिश जीवनदान बनी है. बारिश होने से किसानो को तत्काल राहत तो मिल गयी. लेकिन जोरदार बारिश नहीं हुई तो किसान के लिए संकट बरकरार रहेगा. रूक-रूक हो रही बारिश से किसानो ने चैन की सांस ली है. किसान अपने अपने खेतो में धान रोपने के कार्य में सुबह होते ही लग गये हैं.
सोनारायठाढ़ी/सारवां: किसानों के चेहरे खिले
सारवां/सोनारायठाढ़ी. प्रखंड क्षेत्र में शनिवार से हो रही बारिश से किसानों के चेहरे पर खुशी लौट आयी है. बारिश नहीं होने से प्रखंड क्षेत्र के किसान हताश हो गये थे. पिछले साल भी खरीफ फसल की उपज अच्छी नही हुई थी. ऊंचे दामों पर किसान बाजार से धान का बिचड़ा खरीद कर खेतो में डाल चुके थे. बारिश नहीं होने से बिचड़ा भी सूखने लगा था. आसमान में बादल रहने पर भी वर्षा नहीं होने से किसान ठगा महसूस कर रहे थे. लेकिन, बारिश के बाद किसानों को थोड़ी राहत मिली है. अगर इसी तरह कुछ दिन और बारिश हो जाये तो धान का बिचड़ा समेत मक्का,दलहन सब्जी समेत सभी फसलों को थोड़ा फायदा मिला है.
करौं: मूसलधार बारिश की जरूरत
करौं. प्रखंड के किसानों के चेहरों पर भी इस बारिश से मुस्कान लौट आयी है. खेतों में पानी ठहरने से किसान बिचड़ा उखाड़ कर रोपनी में लग गये हैं. इस बारिश से बिचड़ा तो बच गया. लेकिन मूसलधार बारिश की आस अब भी किसान कर रहे है. शुक्रवार की शाम से हो रही बारिश से किसान ने राहत की सांस ली है. किसान खेती कार्य में जोर शोर से लग गये हैं.
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