Vivah Muhurat: 20 नवंबर को शुक्र ग्रह के उदित होते ही गूंजने लगेंगी शहनाई, इस वर्ष 13 दिन ही विवाह लग्न
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Nov 2022 2:26 PM
Vivah Muhurat Date: 20 नवंबर को उत्पन्ना एकादशी के साथ सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग, जयद योग, प्रीति योग के हस्त नक्षत्र विद्यमान रहेगा. इस वर्ष नवंबर-दिसंबर में कुल 13 दिन ही विवाह के शुभ मुहूर्त हैं.
Vivah Muhurat Date 2022: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी मांगलिक कार्य में शुक्र ग्रह की उपस्थिति को आवश्यक माना गया है. हिंदुओं के किसी भी मांगलिक कार्य में शुक्र की स्थिति को बखूबी देखा जाता है. शुक्र ग्रह के अस्त होने से अभी शादी-विवाह पर विराम लगा हुआ है. दो अक्तूबर से अस्त शुक्र ग्रह के अग्रहण कृष्ण एकादशी 20 नवंबर को उदित होते ही वैवाहिक समारोहों की धूम शुरू हो जायेगी. 20 नवंबर को उत्पन्ना एकादशी के साथ सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग, जयद योग, प्रीति योग के हस्त नक्षत्र विद्यमान रहेगा. इस वर्ष नवंबर-दिसंबर में कुल 13 दिन ही विवाह के शुभ मुहूर्त हैं. फिर 16 दिसंबर से मलमास शुरू हो जायेगा.
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि शुक्र के राशि परिवर्तन से अगले 23 दिन तक देश-दुनिया, मौसम और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. ज्योतिष शास्त्र में कोमल ग्रह शुक्र को भौतिक सुख, वैवाहिक सुख, शोहरत, कला, प्रतिभा, सौंदर्य, रोमांस, धन, ऐश्वर्य, संपन्न, आकर्षण आदि का कारक माना जाता है. इसलिए जब भी शुक्र अस्त होता है, तो उसके शुभ परिणामों की कमी हो जाती है. शुक्र के राशि परिवर्तन से सर्दी बढ़ने और देश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश होगी. कीमती धातुओं में तेजी और राजनीति में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा. शुक्र के राशि परिवर्तन से मेष, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर और मीन राशि के जातकों को लाभ मिलेगा.
ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को सांसारिक व भौतिक सुखों का कारक माना गया है. इसलिए शुक्र अस्त होने पर शुभ कार्य बंद हो जाते हैं. शुक्र को भोर का तारा कहा जाता है. जब ये सूर्य के पास आता है, तो इसकी ऊर्जा मलीन हो जाती है और दिखाई देना बंद कर देता है.
शुक्र अस्त के समय विवाह करने से कुछ समय के बाद ही रिश्तों में खटास उत्पन्न हो जाती है. शुक्र के अस्त होने से शादी टूटने तक की भी स्थिति बन जाती है. इतना ही नहीं, जीवनसाथी की तरक्की और सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है. इसलिए शुक्र अस्त होने पर विवाह करने की मनाही होती है.
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बनारसी पंचांग के अनुसार नवंबर 2022: 24, 25, 26
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दिसंबर 2022: 2, 3, 7, 8, 9, 13, 14, 15, 16
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मिथिला पंचांग के अनुसार नवंबर 2022: 20, 21 , 24, 25, 27, 28, 30
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दिसंबर 2022: 4, 5, 7, 8, 9, 14
सूर्योपासना का छह मासिक रविवार का व्रत अगहन शुक्ल चतुर्थी 27 नवंबर को पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में शुरू होगा. इस दिन अतिपुण्यकारी सर्वार्थसिद्धि योग व रवियोग का सुयोग भी बन रहा है. इस व्रत की महत्ता भी छठ पर्व जैसी है. छठ महापर्व की तरह इस व्रत में भी व्रती महिलाएं एक दिन पहले यानी शनिवार को नहाय-खाय करेंगी. फिर रविवार को पवित्रता से टेकुआ, खीर, पूड़ी सहित अन्य पकवान तैयार कर बांस के डाले में ऋतुफल, पकवान, पान,सुपारी, फूलमाला, बधी-माला, धूप-दीप, अरिपन, सिंदूर रखकर घर के खुले आंगन या छत पर सूर्यदेव की विधिवत पूजा कर उनको अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि व संतान की सलामती की कामना करते हुए छह महीने के इस महारविवार के व्रत का संकल्प लेंगी.
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष, वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
मो. 8080426594/9545290847
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