सुपौल में स्टार्टअप और व्यावसायिक क्रांति: महिला ITI में GST, IPR और कंपनी रजिस्ट्रेशन पर लगी ‘लीगल क्लिनिक’

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कार्यशाला

सुपौल जिले के युवाओं में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक शानदार पहल की गई है. सुपौल अभियंत्रण महाविद्यालय (इंजीनियरिंग कॉलेज) के स्टार्टअप सेल द्वारा महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) में विशेष “कानूनी एवं अनुपालन क्लिनिक” (लीगल एंड कंप्लायंस क्लिनिक) कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें युवाओं को व्यापार की बारीकियां सिखाई गईं.

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सुपौल से राजीव झा की रिपोर्ट:

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दिग्गजों का जुटाव: अधिकारियों और विशेषज्ञों ने सांझा किए अनुभव

युवाओं को स्वरोजगार और नवाचार (इन्नोवेशन) के प्रति प्रेरित करने वाले इस भव्य कार्यक्रम में जिले के कई वरिष्ठ अधिकारियों और शिक्षाविदों ने शिरकत की. मुख्य अतिथियों में जीएसटी (GST) के संयुक्त आयुक्त संजय कुमार, निबंधन विभाग के सब रजिस्ट्रार अमरेंद्र कुमार, सुपौल अभियंत्रण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अच्युता नंद मिश्रा, जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक मनोज कुमार और इंजीनियरिंग कॉलेज के स्टार्टअप फैकल्टी इंचार्ज प्रो. शादाब आज़म सिद्दीकी मुख्य रूप से मंच पर उपस्थित रहे.

वहीं, युवाओं को कानूनी और तकनीकी गुर सिखाने के लिए विशेषज्ञ वक्ता के रूप में ‘चार्टर्ड हाउस सुपौल’ के संस्थापक प्रितेश कुमार को आमंत्रित किया गया था. पूरे कार्यक्रम का सफल और सुचारू संचालन स्टार्टअप कोऑर्डिनेटर प्रदीप कुमार द्वारा किया गया.

GST और टैक्स मैनेजमेंट: पारदर्शिता ही व्यापार की असली सफलता

कार्यशाला के पहले मुख्य सत्र में विशेषज्ञों ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की मूलभूत अवधारणाओं को बेहद सरल भाषा में समझाया. युवाओं को जीएसटी रजिस्ट्रेशन की ऑनलाइन प्रक्रिया, इनपुट टैक्स क्रेडिट, और समय पर टैक्स फाइलिंग करने के फायदों के बारे में विस्तार से बताया गया. संयुक्त आयुक्त संजय कुमार ने कहा कि वर्तमान दौर में सही टैक्स प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन किसी भी स्टार्टअप या नए व्यवसाय की सफलता, विश्वसनीयता और पारदर्शिता के लिए सबसे पहली और अनिवार्य शर्त है.

IPR और कंपनी रजिस्ट्रेशन: अपने आइडिया को चोरी होने से बचाएं युवा

बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) पर आयोजित सत्र में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि युवा अपने इनोवेटिव आइडियाज और आविष्कारों को सुरक्षित रखने के लिए पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और डिजाइन संरक्षण जैसी कानूनी प्रक्रियाओं का सहारा जरूर लें. इसके अलावा, नए बिजनेस को कानूनी रूप देने के लिए निम्नलिखित श्रेणियों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया:

  • कंपनी इन्कॉरपोरेशन: प्राइवेट लिमिटेड कंपनी और एलएलपी (LLP) बनाने की पूरी प्रक्रिया.
  • दस्तावेजीकरण: रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक दस्तावेज और सरकारी पोर्टलों का सही उपयोग.
  • बिजनेस कॉन्ट्रैक्ट्स: व्यावसायिक समझौतों की शर्तें, कानूनी अनुबंध का महत्व और विवाद निवारण के नियम.

विशेषज्ञों ने समझाया कि एक स्पष्ट और वैध कानूनी अनुबंध भविष्य में होने वाले किसी भी व्यापारिक विवाद से स्टार्टअप को सुरक्षित रखता है.

सवालों के जवाब पाकर खिले युवाओं के चेहरे, इनका रहा सराहनीय योगदान

कार्यशाला के अंतिम चरण में एक ‘ओपन क्वेश्चन-आंसर’ (प्रश्न-उत्तर) सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें महिला आईटीई और इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने अपनी व्यावसायिक शंकाओं और स्टार्टअप शुरू करने में आने वाली दिक्कतों को लेकर विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछे. मंच पर मौजूद अधिकारियों और चार्टर्ड अकाउंटेंट ने सभी तकनीकी व कानूनी सवालों का बेहद व्यवहारिक उत्तर देकर युवाओं का मार्गदर्शन किया.

इस बड़े और सफल आयोजन को धरातल पर सुव्यवस्थित तरीके से उतारने में सूरज कुमार, यश राज, सोनू कुमार, आशुतोष और राजू कुमार ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाते हुए सराहनीय योगदान दिया. कॉलेज प्रबंधन ने उम्मीद जताई है कि इस लीगल क्लिनिक से सुपौल के युवाओं को अपनी कंपनी खड़ी करने में बड़ी मदद मिलेगी.

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