Dumka: एक तरफ गरीब का आवास अधूरा, दूसरी ओर करोड़ों के सरकारी क्वार्टर वीरान
Published by : AmleshNandan Sinha Updated At : 20 May 2026 10:21 PM
वीरान पड़े सरकारी आवास
Dumka: दुमका में एक ओर गरीबों के आवास अधूरे पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर करोड़ों रुपये से बने सरकारी क्वार्टर वीरान हैं. मामले को लेकर व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. पूरी खबर नीचे पढ़ें...
अभिषेक, काठीकुंड
Dumka: सरकार की आवासीय योजनाओं और ग्रामीण विकास व्यवस्था की जमीनी हकीकत काठीकुंड प्रखंड में सवालों के घेरे में नजर आ रही है. एक ओर प्रखंड के शहरजोड़ी गांव की गरीब आदिवासी महिला बहामुनी टुडू पक्का मकान का सपना लिए पिछले 9 माह से अधूरे आवास के सहारे फूंस और मिट्टी निर्मित झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर प्रखंड कार्यालय परिसर में पदाधिकारियों और कर्मियों के लिए करोड़ों रुपये की लागत से बने सरकारी आवास अधिकांशतः खाली पड़े हुए है.
आदिवासी महिला को दूसरी किश्त का इंतजार
ग्रामीणों के अनुसार बहामुनी टुडू को आवास योजना के तहत पहली किस्त की राशि मिली थी, जिसके बाद उन्होंने किसी तरह निर्माण कार्य शुरू कराया. लेकिन दूसरी किस्त नहीं मिलने के कारण मकान अधूरा रह गया और निर्माण कार्य महीनों से बंद पड़ा है. बारिश और तेज गर्मी के बीच परिवार अब भी पुराने जर्जर झोपड़ी में रहने को विवश है. मामले को लेकर उपप्रमुख अल्बिनस किस्कू ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आवास कॉर्डिनेटर की लापरवाही के कारण गरीबों का घर समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है.
क्या कहना है आवास कॉर्डिनेटर का
उन्होंने बताया कि लाभुक का जिओ टैग होने के बाद कई बार दूसरी किस्त जारी करने को कहा गया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. उनके अनुसार प्रखंड में ऐसे कई लाभुक हैं जिनके आवास अधूरे पड़े हुए है. वहीं आवास कॉर्डिनेटर अनूप कुमार ने बताया कि लाभुक के आधार कार्ड में तकनीकी त्रुटि रहने के कारण दूसरी किस्त की राशि जारी नहीं हो पा रही है. उन्होंने कहा कि तकनीकी समस्या दूर करने की प्रक्रिया चल रही है.
सरकारी आवास बनकर तैयार, रहता कोई नहीं
इधर दूसरी तरफ प्रखंड कार्यालय स्थित पदाधिकारियों व कर्मियों के वीरान पड़े सरकारी आवास की स्थिति भी कई सवाल खड़े कर रही है. जानकारी के अनुसार प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मियों के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर सरकारी आवास बनाए गए हैं, लेकिन अधिकांश आवास खाली पड़े है. प्रभात खबर द्वारा किए गए पड़ताल के दौरान यह बात सामने आई कि अंचल कार्यालय के केवल तीन कर्मियों को छोड़ बाकी आवासों में कोई नहीं रहता.
झाड़ियों से घिर गया है सरकारी आवास
मंगलवार सुबह पशुपालन विभाग की मोबाइल मेडिकल वैन भी इन्हीं सरकारी आवास परिसरों में खड़ी दिखी, जहां उसके चालक और एक कर्मी रह रहे हैं. लंबे समय से खाली पड़े आवासों के कारण भवनों की स्थिति भी धीरे-धीरे खराब होती जा रही है. 4 जगह बने इस भवनों में मकड़जाल, गंदगी पसरी हुई है और पूरा आवास परिसर झाड़ियों से घिरा पड़ा है. ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक ओर गरीब परिवार पक्के मकान के लिए महीनों तक सरकारी दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं, जबकि दूसरी ओर सरकारी धन से बने आवास उपयोग के अभाव में वीरान पड़े है.
क्या कहना है स्थानीय विधायक का
शिकारीपाड़ा विधानसभा से विधायक आलोक कुमार सोरेन ने कहा कि सरकारी अधिकारियों और कर्मियों के लिए आवास का निर्माण इसी उद्देश्य से कराया गया था कि प्रखंड मुख्यालय में रहने से प्रखंड वासियों के समस्याओं के निष्पादन को तेजी मिलेगी. लोगों ने जिला प्रशासन से अधूरे आवासों की जांच कर शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने तथा खाली पड़े सरकारी क्वार्टरों के उपयोग और निगरानी को लेकर ठोस पहल करने की मांग की है.
हेमंत सरकार की महत्वाकांक्षी आबुवा आवास योजना के लाभुक का आवास किसी भी हाल में लंबित न रहे, यह पदाधिकारी सुनिश्चित करे. प्रखंड मुख्यालय में बने सरकारी आवासों में पदाधिकारियों व कर्मियों का नहीं रहना स्वीकार्य नहीं है. करोड़ों रुपये की लागत से बने सरकारी भवनों का उपयोग नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है. सरकार जनता की सुविधा और अधिकारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से आवास निर्माण कराती है, लेकिन यदि आवास खाली पड़े हैं तो इसकी समीक्षा आवश्यक है.
ये भी पढ़ें…
पलामू के डीसी ने किसानों को दिया आमदनी बढ़ाने का मंत्र, सुखाड़ प्रबंध पर कार्यशाला
ये क्या, हरिहरगंज में इंडेन गैस के गोदाम से 275 सिलेंडर गायब? जांच में जुटी पुलिस
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By AmleshNandan Sinha
अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










