पलामू के डीसी ने किसानों को दिया आमदनी बढ़ाने का मंत्र, सुखाड़ प्रबंध पर कार्यशाला
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 20 May 2026 9:27 PM
दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन करते पलामू डीसी. फोटो: प्रभात खबर
Palamu News: पलामू में आयोजित खरीफ कार्यशाला में डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाकर आमदनी बढ़ाने का मंत्र दिया. कार्यशाला में सुखाड़ प्रबंधन, जल संरक्षण और कम पानी वाली लाभकारी फसलों की खेती पर विशेष जोर दिया गया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट
Palamu News: झारखंड के पलामू जिले में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से बुधवार को जिला स्तरीय खरीफ कार्यशाला का आयोजन किया गया. मेदिनीनगर नगर निगम क्षेत्र स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति नगर भवन में आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य विषय ‘जलवायु अनुकूल कृषि एवं सुखाड़ प्रबंधन’ रखा गया. कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक खेती और कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के तरीके बताए गए. कार्यक्रम का उद्घाटन पलामू उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इस दौरान जिले के कृषि पदाधिकारी, विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे.
पारंपरिक खेती से आगे बढ़ने की जरूरत: डीसी
उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहकर अच्छी आमदनी हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है. बदलते मौसम और सुखाड़ जैसी समस्याओं को देखते हुए किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनानी होगी. उन्होंने कहा कि किसान यदि व्यावसायिक और बाजार आधारित फसलों की खेती करें तो उनकी आय में निश्चित रूप से बढ़ोतरी होगी. वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर उत्पादन बढ़ता है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है, जिससे किसानों को बाजार में अधिक लाभ मिलता है.
कम पानी वाली फसलें बनेंगी फायदे का सौदा
डीसी ने किसानों को सलाह दी कि वे ऐसी फसलों की खेती करें, जिनमें कम पानी की जरूरत पड़ती हो. उन्होंने कहा कि सुखाड़ की स्थिति में पानी सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है. ऐसे में कम पानी वाली वैकल्पिक फसलें किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि दलहन, तिलहन और अन्य कम लागत वाली फसलों को बढ़ावा देकर किसान कम संसाधनों में भी बेहतर आमदनी कमा सकते हैं. इससे खेती का जोखिम भी कम होगा और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.
जल संरक्षण से बढ़ेगा उत्पादन और मुनाफा
कार्यशाला में जल संरक्षण को खेती की सफलता का अहम हिस्सा बताया गया. उपायुक्त ने किसानों से खेतों में पानी बचाने की तकनीक अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि यदि किसान जल संचयन और आधुनिक सिंचाई पद्धति पर ध्यान दें तो कम बारिश की स्थिति में भी फसल बचाई जा सकती है. विशेषज्ञों ने बताया कि ड्रिप सिंचाई, वर्षा जल संचयन और खेत तालाब जैसी तकनीकें किसानों के खर्च को कम कर सकती हैं और उत्पादन बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती हैं.
आधुनिक तकनीक से खेती होगी आसान
कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को नई तकनीकों और आधुनिक कृषि उपकरणों की जानकारी दी. विशेषज्ञों ने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर लागत कम होती है और उत्पादन अधिक मिलता है. किसानों को बीज चयन, मिट्टी जांच, जैविक खाद और मौसम आधारित खेती की जानकारी भी दी गई. विशेषज्ञों ने बताया कि बदलते मौसम के अनुसार खेती की रणनीति तैयार करना अब जरूरी हो गया है.
किसानों ने पूछे सवाल, मिले समाधान
कार्यशाला के दौरान किसानों ने कृषि विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछे और अपनी समस्याओं का समाधान जाना. किसानों ने सुखाड़, सिंचाई, बीज और बाजार से जुड़ी परेशानियों को सामने रखा. विशेषज्ञों ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की सलाह दी. किसानों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से उन्हें खेती के नए तरीके सीखने और आमदनी बढ़ाने में मदद मिलती है.
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खेती को व्यवसाय बनाने की सलाह
कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि किसान खेती को केवल पारंपरिक काम नहीं, बल्कि व्यवसाय के रूप में देखें. आधुनिक तकनीक, जल संरक्षण और बाजार आधारित खेती के जरिए किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में काम किया जा सकता है. पलामू प्रशासन की इस पहल से किसानों को उम्मीद है कि आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाकर वे सुखाड़ जैसी चुनौतियों के बीच भी बेहतर उत्पादन और अच्छी आमदनी हासिल कर सकेंगे.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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