कोसी बराज को सुरक्षित व संरक्षित रखने की है जरूरत, भारी वाहनों के परिचालन पर रोक व गति नियंत्रण जरूरी : ई महेश

Updated at : 18 Jul 2024 8:53 PM (IST)
विज्ञापन
supaul3

कोसी बराज को सुरक्षित व संरक्षित रखने की है जरूरत

विज्ञापन

वीरपुर कोसी बराज वर्ष 1956 से शुरू होकर 1964 में बनकर तैयार हो गया. अब 60 साल पूरे होने के बाद कोसी बराज के पुराने होने को लेकर पिछले पांच सालों से तरह-तरह की चर्चा होने लगी है. हाल के दिनों में बिहार सरकार के पूर्व जल संसाधन मंत्री सह केंद्रीय मंत्री संजय झा ने छातापुर के एक निजी कार्यक्रम में कोसी बराज के पुराने होने और नये बराज बनने की बात कही. इसके बाद से लोगों में चर्चा होने लगी और लोग तरह-तरह के कयास लगाने लगे. निर्माण के बाद कोसी बराज की क्षमता नौ लाख क्यूसेक बताई गयी, लेकिन वर्तमान समय में स्थिति यह है कि चार लाख क्यूसेक पानी आने के बाद अभियंताओं के हाथ पांव फूलने लगते हैं और कोसी क्षेत्र के लोग भी अपने आप को असुरक्षित महसूस करने लगते हैं. इतना ही नहीं चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी आने पर बराज के पुल भी हिलने लगते हैं.

प्रभात खबर से बातचीत में जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता सह फ्लड फाइटिंग फोर्स के चेयरमैन महेश ठाकुर ने बताया कि कोसी बराज पुराना हो गया है, यह कहना बेईमानी होगी. कोसी बराज को सुरक्षित और संरक्षित रखने की जरूरत है. बराज के 56 फाटकों में प्रत्येक फाटक में लगभग 70 टन से अधिक वजन का गेट है, जिसे कंट्रोल रूम से संचालित किया जाता है. बराज के निर्माण के काफी समय हो गए हैं, इसे सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक और ठोस कदम उठाने की जरूरत है.

ठाकुर ने बताया कि नेपाल का एकमात्र महेंद्र राजमार्ग इसी कोसी बराज के पुल से होकर गुजरती है. कोसी बराज का यह पुल नेपाल के पूरब से पश्चिम को जोड़ता है. जिससे छोटे वाहनों के साथ-साथ भारी वाहन भी प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में इसी रास्ते से गुजरती है. भारी वाहनों के आवागमन से कोसी बराज का पुल प्रभावित होता है. वहीं वाहनों की निर्धारित गति सीमा नहीं होने के चलते हर वर्ष कोसी बराज के पुल पर बड़े वाहनों से दुर्घटना होती है, जिससे बराज के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम के पाए टूटकर क्षतिग्रस्त हो गए हैं. हालांकि उन्हें बनाया तो जा सका है, लेकिन पहले जैसी मजबूती नहीं रही है. वाहनों के तेज रफ्तार होने से बराज के पुल को भी नुकसान हो रहा है. ऐसे में किसी भी जगह और निर्मित वस्तु की समय सीमा होती है, निर्धारित समय सीमा के बाद वह समाप्त हो जाता है या समाप्त होने के कगार पर रहता है. इसलिए बराज को सुरक्षित और संरक्षित करने के लिए कोसी बराज के पुल से बड़े वाहनों के आवागमन पर अंकुश लगना जरूरी है नहीं तो बराज और अधिक कमजोर हो जाएगा और आनेवाले भविष्य में इसका व्यापक असर पर सकता है.

उन्होंने कहा कि कोसी बराज की सुरक्षा नेपाल के जिम्मे है. इसलिए बराज के पूर्वी छोड़ पर नेपाल के सुनसरी जिला की पुलिस रहती है और पश्चिमी छोड़ सप्तरी जिला क्षेत्र में है. जहां सप्तरी जिला की पुलिस रहती है. कोसी बराज के मेंटनेंस का कार्य कोसी योजना करती है.

ठाकुर ने बताया कि हाल के दिनों में चतरा से कंचनपुर जाने वाली एक सड़क का निर्माण किया गया है, जिसमें छोटे वाहन तो जाते हैं लेकिन बड़े वाहन नहीं जाते हैं. उस रास्ते को वृहद करने की जरूरत है. ताकि बड़े और भारी वाहनों के वहन की क्षमता कोसी बराज से कम हो सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन