सुपौल: सीएम ने किया कोसी-मेची लिंक परियोजना का निरीक्षण, सीमांचल के 2.14 लाख हेक्टेयर खेतों तक पहुंचेगा पानी

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नक्शा का अवलोकन करते सीएम | Prabhat Khabar Network

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सुपौल जिले में निर्माणाधीन कोसी-मेची अंतःराज्यीय रिवर लिंक परियोजना का सघन निरीक्षण किया. यह महत्वाकांक्षी परियोजना सीमांचल के 4 जिलों के लिए वरदान साबित होगी, जिससे 2.14 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी.

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सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड स्थित चैनपुर गांव में बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निर्माणाधीन ऐतिहासिक कोसी-मेची अंतःराज्यीय रिवर लिंक परियोजना का सघन स्थल निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति और वर्तमान स्थिति का जायजा लेते हुए अधिकारियों को तय समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्य पूरा करने का सख्त निर्देश दिया. निरीक्षण के बाद कैंप कार्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह और जिलाधिकारी सावन कुमार ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से परियोजना की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी मुख्यमंत्री के समक्ष रखी.

सीमांचल के 4 जिलों के लिए वरदान साबित होगी योजना

मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि कोसी-मेची अंतःराज्यीय रिवर लिंक परियोजना सीमांचल और पूरे बिहार के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने पर कुल 2,14,813 हेक्टेयर कृषि भूमि को अतिरिक्त और सुनिश्चित सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी. इसके तहत मुख्य रूप से अररिया में 69,642 हेक्टेयर, पूर्णिया में 69,970 हेक्टेयर, किशनगंज में 39,548 हेक्टेयर और कटिहार में 35,653 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा. इस लिंक नहर के जरिए बाढ़ के दौरान कोसी नदी के अधिशेष (अतिरिक्त) जल को मेची नदी तक पहुंचाया जाएगा, जिससे महानंदा बेसिन में जल की उपलब्धता बढ़ेगी और कोसी क्षेत्र में बाढ़ का प्रभाव भी कम होगा.

20 हजार क्यूसेक होगी नहर की क्षमता, 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य

परियोजना के तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया गया कि इसके अंतर्गत पूर्वी कोसी मुख्य नहर की जल संवहन क्षमता को 15,000 क्यूसेक से बढ़ाकर 20,000 क्यूसेक किया जाएगा. मुख्य नहर के विस्तार के साथ-साथ चार शाखा नहरों, छह वितरणियों और अन्य आवश्यक नहर प्रणालियों का भी निर्माण किया जाना है. परियोजना के अंतिम छोर पर करीब 950 क्यूसेक पानी मेची नदी में प्रवाहित किया जाएगा. 6,282.32 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस पूरी परियोजना को मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

किसानों की सुविधा का रखें ध्यान, जल संरक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री ने उपस्थित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय किसानों को उनके कृषि कार्य में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कोसी और गंडक नदियों को व्यवस्थित करने के लिए एक समग्र योजना तैयार करने का भी निर्देश दिया. मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे डैम एवं अन्य जल संरचनाओं के माध्यम से छोटी नदियों में भी वर्षभर पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध रह सके. कोसी के पानी से कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में वृद्धि के साथ क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी.

निरीक्षण में मौजूद रहे मंत्री और आला अधिकारी

इस महत्वपूर्ण स्थल निरीक्षण एवं समीक्षा बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे. इसके अलावा, विधायक नीरज कुमार बबलू, विधायक रामविलास कामत, विधायक देवंती यादव, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह, जिलाधिकारी सावन कुमार और पुलिस अधीक्षक शरथ आर. एस. सहित अन्य वरीय अधिकारी और अभियंता मौजूद थे.


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राजीव कुमार झा

लेखक के बारे में

By राजीव कुमार झा

राजीव कुमार झा प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 02 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत हिन्दुस्तान से की. अभी प्रभात खबर ब्यूरोचीफ के पद पर सुपौल में काम कर रहे हैं. शिक्षा, कला-संस्कृति, सामाजिक कार्य व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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