सुपौल के आश्रय गृह में बच्चों से बोले प्रधान जिला जज, 'लक्ष्य तय करें और मेहनत से सफलता हासिल करें'

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वृहद आश्रय गृह में बच्चों को मिला प्रेरणा का संदेश

सुपौल के वृहद आश्रय गृह में बच्चों के लिए खास दिन रहा. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बच्चों से सीधा संवाद कर उन्हें लक्ष्य निर्धारण, कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.

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Supaul Shelter Home: सुपौल के वृहद आश्रय गृह में बुधवार को बच्चों के लिए दिन कुछ खास रहा. आमतौर पर संस्थागत माहौल में रहने वाले बच्चों के बीच जब प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. राकेश कुमार सिंह पहुंचे, तो उन्होंने सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं की, बल्कि बच्चों से संवाद कर उन्हें बेहतर भविष्य का भरोसा और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.

बाल यूनिट-1 और बाल यूनिट-2 के बच्चों से बातचीत करते हुए प्रधान जिला जज ने उन्हें जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने, लगातार मेहनत करने और मुश्किल परिस्थितियों से घबराने के बजाय आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की सीख दी. इस दौरान बच्चों को फुटबॉल भी बांटी गयी, ताकि पढ़ाई के साथ खेलकूद को भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सके.

बच्चों से सीधे संवाद कर समझाया सफलता का रास्ता

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता हासिल करने के लिए सबसे पहले लक्ष्य तय करना जरूरी है. लक्ष्य तय करने के बाद पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ उसके लिए लगातार प्रयास करना चाहिए.

उन्होंने बच्चों को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि जीवन में चुनौतियां आती रहेंगी, लेकिन आत्मविश्वास के साथ उनका सामना करने वाला व्यक्ति आगे बढ़ सकता है.

उनके इस संवाद का बच्चों पर सकारात्मक असर देखने को मिला. कार्यक्रम के दौरान बच्चों में उत्साह और आत्मविश्वास नजर आया.

पढ़ाई के साथ खेल भी जरूरी

कार्यक्रम के दौरान बच्चों को फुटबॉल प्रदान की गयी. बच्चों को खेलकूद के लिए प्रोत्साहित करते हुए बताया गया कि पढ़ाई के साथ खेल भी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

नियमित खेलकूद से बच्चों के शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास भी होता है. खेल उन्हें अनुशासन में रहना, टीम के साथ मिलकर काम करना और हार-जीत को स्वीकार करना सिखाता है.

फुटबॉल जैसी टीम आधारित गतिविधियां बच्चों में सहयोग और टीम भावना विकसित करने के साथ आत्मविश्वास बढ़ाने में भी मदद कर सकती हैं.

मुश्किल परिस्थितियों से नहीं घबराने की सीख

आश्रय गृह में रहने वाले बच्चों के लिए भविष्य की राह हमेशा आसान नहीं होती. ऐसे में कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, उन्हें अपनी शिक्षा और लक्ष्य से पीछे नहीं हटना चाहिए.

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बच्चों को शिक्षा, अनुशासन और मेहनत को जीवन का आधार बनाने की सीख दी. उन्होंने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.

यह संवाद बच्चों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि उन्हें अपने भविष्य को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करने और अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखने का संदेश मिला.

बच्चों ने भी उत्साह से लिया हिस्सा

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. अधिकारियों के साथ संवाद के दौरान उन्होंने अपनी रुचि और उत्साह का प्रदर्शन किया.

फुटबॉल मिलने के बाद बच्चों में खास उत्साह देखने को मिला. खेल सामग्री मिलने से उन्हें नियमित खेलकूद के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और आश्रय गृह में उनकी दिनचर्या को अधिक सक्रिय बनाया जा सकेगा.

कार्यक्रम में न्यायिक और विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश दिलीप कुमार सिंह, अपर मुख्य दंडाधिकारी सह प्रभारी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल मो. अफजल आलम सहित अन्य पदाधिकारी और संबंधित कर्मी मौजूद रहे.

कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के बीच सकारात्मक माहौल तैयार करने, उन्हें शिक्षा और खेल के लिए प्रोत्साहित करने तथा उनके बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित करना रहा.

Supaul Shelter Home: बच्चों के लिए संदेश, भविष्य के लिए उम्मीद

वृहद आश्रय गृह में हुआ यह कार्यक्रम केवल फुटबॉल वितरण तक सीमित नहीं रहा. बच्चों को मिला संदेश उनकी आगे की जिंदगी के लिए अधिक महत्वपूर्ण है. लक्ष्य तय करना, मेहनत करना, अनुशासन बनाए रखना और मुश्किलों का आत्मविश्वास से सामना करना ऐसी सीख है जो उनके भविष्य को मजबूत आधार दे सकती है.

अब जरूरत इस बात की है कि बच्चों को शिक्षा और खेल के साथ लगातार ऐसा सकारात्मक माहौल मिलता रहे, जहां वे अपनी प्रतिभा पहचान सकें और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर बढ़ सकें.

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अशोक कुमार

लेखक के बारे में

By अशोक कुमार

गांधीवादी चिंतक ट्रस्टी, सर्व सेवा संघ,

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