अब बलराम के दरवाजे पर कैसे बजेगी शहनाई!

Updated at :13 Feb 2017 6:15 AM
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अब बलराम के दरवाजे पर कैसे बजेगी शहनाई!

सुपौल : सदर प्रखंड के हरदी पूरब पंचायत स्थित लक्षमीनियां गांव के वार्ड नंबर 12 में शुक्रवार को अगलगी की हुई भीषण घटना ने पीड़ित गरीब परिवारों की कमर तोड़ कर रख दी है. अग्नि पीड़ितों का सारा सामान जल कर राख हो गया. जिसके कारण उनके समक्ष भोजन व आशियाने के साथ ही अन्य […]

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सुपौल : सदर प्रखंड के हरदी पूरब पंचायत स्थित लक्षमीनियां गांव के वार्ड नंबर 12 में शुक्रवार को अगलगी की हुई भीषण घटना ने पीड़ित गरीब परिवारों की कमर तोड़ कर रख दी है. अग्नि पीड़ितों का सारा सामान जल कर राख हो गया. जिसके कारण उनके समक्ष भोजन व आशियाने के साथ ही अन्य कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो गयी है. अगलगी में दो परिवारों के 02 घर जल कर राख हो गये हैं. जिसमें पीड़ित ढलो उर्फ बलराम मंडल व गणेश मंडल का एक- एक घर सहित घर में रखे 35 हजार रुपये नकद सहित मवेशी भी जल कर खाक हो गये. जानकारी अनुसार शुक्रवार की रात पीड़ित ढलो खाना खाकर सो गये थे.

कि अचानक रात में देखा कि वो आग के आगोश में पूरी तरह घिर चुके हैं. लेकिन किसी तरह वो सभी परिवार घर से जान बचाकर बाहर निकले और हल्ला करने पर ग्रामीणों के सहयोग से आग पर काबू पाया. जब तक आग पर काबू पाया गया तब तक घर सहित घर में रखा सारा समान जल कर राख हो गया. वहीं घटना की सूचना मिलते ही प्रखंड प्रमुख मिलन देवी, रालोसपा के जिलाध्यक्ष धर्मपाल कुमार व पैक्स अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार पिंटू ने पीड़ित परिवार से मिलकर ढांढस बधाया और सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता राशि दिलाने का आश्वासन दिया. वहीं पीड़ित द्वारा घटना की सूचना अंचलाधिकारी व थाना को भी दी गयी.

अब कैसे होगी लक्ष्मी बेटी की शादी : अग्नि पीड़ितों का बुरा हाल है. जिंदगी भर की कड़ी मेहनत की कमाई कुछ ही पल में खाक हो जाने से उन्हें भविष्य की चिंता सता रही है. सबसे बुरा हाल बलराम मंडल का है, जिनकी बेटी की शादी अगले 02 मार्च को होने वाली थी. बेटी के हाथ पीले करने की तमन्ना में बलराम ने काफी मशक्कत के बाद 35 हजार नकद सहित जेवर, कपड़े, बरतन आदि की खरीदारी की थी. लेकिन एक चिंगारी से फैली आग ने सिकंदर के घर के साथ ही उसके सपनों को चकनाचूर कर दिया. अब बलराम को कुछ समझ नहीं आ रहा कि शादी के लिये वह किस प्रकार फिर से आवश्यक सामानों की खरीदारी कर पायेगा. गौरतलब है कि बलराम मजदूरी कर अपने घर-परिवार का पालन-पोषण कर रहा था. अगलगी ने उनके सपनों पर अचानक ग्रहण लगा दिया. जिसकी चिंता में पूरा परिवार जी रहा है. पीड़ित बलराम की पत्नी रामवती देवी रोते हुए कह रही थी कि बेटी लक्ष्मी की शादी अब कैसे होगी. अब उसका हाथ पीला कैसे करेंगे? पीड़ितों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या आशियाने की है.
अगलगी की घटना ने पीड़ितों की तोड़ी कमर
सब कुछ जल कर हुआ खाक, खुले आसमान के नीचे जीवन-बसर कर रहे पीड़ित
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