राजीव ने तीरंदाजी में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का जीता खिताब

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 May 2016 2:57 AM

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सुपौल : कहते हैं प्रतिभा कभी संसाधन की मोहताज नहीं होती. जिले के प्रतिभावान खिलाड़ी राजीव कुमार ने नई दिल्ली में एक से चार मई के बीच आयोजित अंबेडकर नेशनल गेम्स 2016 में तीरंदाजी प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का अवार्ड हासिल कर इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है. राजीव ने इस सफलता के साथ […]

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सुपौल : कहते हैं प्रतिभा कभी संसाधन की मोहताज नहीं होती. जिले के प्रतिभावान खिलाड़ी राजीव कुमार ने नई दिल्ली में एक से चार मई के बीच आयोजित अंबेडकर नेशनल गेम्स 2016 में तीरंदाजी प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का अवार्ड हासिल कर इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है.

राजीव ने इस सफलता के साथ ही 19 से 22 मई के बीच मुंबई में होने वाले नेशनल आर्चेरी चैंपियनशिप के लिये क्वालीफाई कर लिया है. इस प्रतियोगिता में अगर वे सफल हुए तो अगामी जून में थाइलैंड की राजधानी बैंकाक में होने वाली अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में शामिल कर लिये जायेंगे. राजीव की ख्वाइश है कि वे ओलंपिक गेम में गोल्ड मेडल प्राप्त कर भारत का नाम ऊंचा कर सकें. गौरतलब है कि इस गेम में राजीव बिहार से अकेले प्रतिनिधि थे.

रोचक है फर्श से अर्श का सफर : त्रिवेणीगंज थाना अंतर्गत लतौना गांव के अति साधारण परिवार में जन्मेें राजीव ने बताया कि एडवेंचर खेलों के प्रति उसकी बचपन से ही रूची थी. यही वजह है कि उन्होंने तीरंदाजी में दिल लगाया. जज्बे व लगन के इस सफर में उन्हें नेहरू युवा केंद्र से प्रारंभिक दिशा मिली. इनके माध्यम से वे 2014 में राजगीर में आयोजित साहसिक खेल में शामिल हुए. दिसंबर 2014 में पटना में एडवेंचर गेम के सेमिनार में भी
उन्हें भाग लेने का मौका मिला. यहां उनकी मुलाकात द्रोण आर्चेरी एकेडमी कानपुर के निदेशक सह प्रख्यात आर्चेरी प्रशिक्षक गोपी नाथ साहू से मुलाकात का अवसर प्राप्त हुआ. इस मुलाकात में राजीव के जीवन को एक नया मोड़ दे दिया. राजीव की प्रतिभा से प्रभावित श्री साहू ने उन्हें दिसंबर 2015 में कानपुर में आयोजित 20 दिवसीय प्रशिक्षण में नि:शुल्क शामिल होने का मौका दिया. इस दौरान राजीव के लगन, निष्ठा, जज्बे और प्रतिभा को श्री साहू ने धारदार बनाया. नतीजा हुआ कि राजीव ने अंबेदकर राष्ट्रीय गेम्स में बाजी मार ली.
खास बातें
मुंबई में होने वाली नेशनल आर्चेरी प्रतियोगिता में होंगे शामिल
बांस के तीर व धनुष से अभ्यास कर पायी मंजिल
अर्थाभाव के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता पाने की है तमन्ना
सफलता की राह में अर्थाभाव का रोड़ा : बीपीएल परिवार में जन्में राजीव को अब सफलता की मुकाम पर पहुंच कर मंजिल की चिंता सता रही है. पिता नुनुलाल राम सत्संगी हैं. ऐसे में राजीव को अब भविष्य की चिंता सताने लगी है. मुंबई नेशनल गेम्स में शामिल होने के लिये करीब 20 हजार रुपये की नितांत आवश्यकता है.
लेकिन इतने पैसे कहां से आयेंगे, यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है. जिलाधिकारी को सहयोग के लिये आवेदन दिया है. देखना है वे किस हद तक मदद कर पाते हैं.
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