मुसीबत. जिला बनने के बाद भी नहीं बदली शहर की सूरत

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 May 2016 4:53 AM

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सुपौल : सन् 1870 में तिरहुत जिला का अनुमंडल बना सुपौल शहर आज भी पूरी तरह शहर का रूप अख्तियार नहीं कर सका है, जबकि अनुमंडल बनने के 121 साल बाद सन् 1991 में इसे जिला का दर्जा प्राप्त हो गया. लेकिन दुर्भाग्य है कि सहरसा व मधेपुरा से पहले अनुमंडल का दर्जा पाने वाले […]

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सुपौल : सन् 1870 में तिरहुत जिला का अनुमंडल बना सुपौल शहर आज भी पूरी तरह शहर का रूप अख्तियार नहीं कर सका है, जबकि अनुमंडल बनने के 121 साल बाद सन् 1991 में इसे जिला का दर्जा प्राप्त हो गया. लेकिन दुर्भाग्य है कि सहरसा व मधेपुरा से पहले अनुमंडल का दर्जा पाने वाले व जिला बनने के 25 साल बीत जाने के बावजूद उत्तर बिहार के इस ऐतिहासिक शहर की शक्लो-सूरत आज भी बहुत नहीं बदली है. हां, इस दौरान सड़कें अन्य शहरों की भांति जरूर चकाचक हो गयी है. लेकिन बाजार का रंग रूप आज भी करीब वही नजर आता है, जो करीब चार दशक पूर्व तक था.

कस्बानुमा बाजार, पुराने स्टाइल की दुकानें, दुकान के आगे सड़क तक पसरा सामान, फुट-पाथ पर सजती सैकड़ों दुकानें, यत्र-तत्र खड़े वाहन, पेयजल व शौचालय आदि का घोर अभाव सुपौल बाजार की पहचान बन चुकी है. आबादी के साथ ही वाहनों की संख्या में भी भारी वृद्धि हुई है. लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था के अभाव में शहर की गति आज भी बेतरतीब से चल रही है. जिसके कारण बाजार क्षेत्र में जाम की समस्या आम हो चुकी है.
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