नौ माह में 451 मरीजों को मिला लाभ
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 May 2016 4:23 AM
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लापरवाही. कुव्यवस्था की भेंट चढ़ी स्वास्थ्य स्मार्ट कार्ड योजना बीपीएल व अंत्योदय धारकों को समुचित स्वास्थ्य सुविधा मिल सके. इसको लेकर कई वर्षों पूर्व जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का शुभारंभ किया गया था. इस योजना के तहत बीपीएल धारकों से पंजीयन शुल्क लेकर उन्हें स्मार्ट कार्ड भी प्रदान किया गया. इसके बावजूद हजारों […]
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लापरवाही. कुव्यवस्था की भेंट चढ़ी स्वास्थ्य स्मार्ट कार्ड योजना
बीपीएल व अंत्योदय धारकों को समुचित स्वास्थ्य सुविधा मिल सके. इसको लेकर कई वर्षों पूर्व जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का शुभारंभ किया गया था. इस योजना के तहत बीपीएल धारकों से पंजीयन शुल्क लेकर उन्हें स्मार्ट कार्ड भी प्रदान किया गया. इसके बावजूद हजारों कार्ड धारक उपचार के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं.
सुपौल : सरकार द्वारा बीपीएल व अंत्योदय धारकों को समुचित स्वास्थ्य सुविधा मिल सके. इसको लेकर कई वर्षों पूर्व जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का शुभारंभ किया गया था. इस योजना के तहत बीपीएल धारकों से पंजीयन शुल्क लेकर उन्हें स्मार्ट कार्ड भी प्रदान किया गया. साथ ही इस बीमा योजना के सफल संचालन को लेकर एक जिला स्तर पर कोर कमेटी का भी गठन किया गया.
ताकि लाभुकों को बिना किसी कठिनाई के चिह्नित नर्सिंग होम द्वारा समुचित तरीके से उपचार मुहैया करायी जा सके, लेकिन कमेटी की उदासीनता के कारण जहां स्मार्ट कार्ड प्राप्त किये लाभुकों को उपचार का लाभ नहीं मिल पा रहा है. वहीं प्रबंधन कमेटी की शिथिलता के कारण यह योजना सरजमी पर दम तोड़ता नजर आ रहा है.
आलम यह है कि वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए बनाये गये स्मार्ट कार्ड की वैधता 30 सितंबर 2016 निर्धारित है. बावजूद इसके हजारों कार्ड धारक उपचार के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं. बावजूद इसके इस समस्या के निदान को लेकर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है.
कार्ड की वैधता एक वर्ष का
ज्ञात हो कि वित्तीय वर्ष 2015- 16 के तहत सरकार के बिडाल हेल्थ टीपीए नेशनल इंश्याेरेंस द्वारा एक लाख 59 हजार 843 बीपीएल व अंत्योदय परिवारों के मुखिया का स्मार्ट कार्ड बनाया गया. लाभुकों को कार्ड बनवाते समय इंश्योरेंस कंपनी द्वारा उक्त स्मार्ट कार्ड की वैधता एक वर्ष का बताया गया.
कार्ड बनाये जाने के उपरांत उपचार के लिए कोर कमेटी द्वारा मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल, रेफरल अस्पताल सिमराही सहित निर्मली अनुमंडल में संचालित मां भगवती नर्सिंग होम को जिम्मेवारी दी गयी, लेकिन जिम्मेवार सदर अस्पताल में अब तक मात्र एक लाभुक को इस योजना का लाभ उपलब्ध कराया गया है. वहीं रेफरल अस्पताल सिमराही में इस योजना के तहत कार्य भी प्रारंभ नहीं कराया गया.
उक्त अस्पताल प्रबंधन द्वारा योजना के तहत कार्य नहीं किये जाने से हजारों लाभुक उपचार के लिए चक्कर काटने को विवश हो रहे हैं, जबकि निर्मली अनुमंडल मुख्यालय स्थित मां भगवती नर्सिंग होम द्वारा नौ माह बीत जाने के बाद 450 लाभुकों को स्वास्थ्य स्मार्ट कार्ड योजना का लाभ मिल पाया है.
कोर कमेटी की उपेक्षा का शिकार हो रहे लाभुक
स्वास्थ्य स्मार्ट कार्ड प्राप्त किये दर्जनों लाभुकों ने बताया कि कार्ड बनवाते समय इंश्योरेंस एजेंसी द्वारा कहा गया था कि सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना बीपीएल व अंत्योदय परिवार के लिए संचालित की गयी है. इसके तहत स्वास्थ्य बीमा कार्ड प्राप्त करने के लिए उन्हें 30 रुपये खर्च करने होंगे. इसके बदले एक वर्ष तक उनके परिवारों का 30 हजार रुपये तक का नि:शुल्क उपचार कराया जायेगा. इसके लिए कोर कमेटी द्वारा कई अस्पतालों को चिह्नित किया जा रहा है.
सभी लाभुकों को चिह्नित अस्पताल व नर्सिंग होम की जानकारी उपलब्ध करा दी जायेगी. ताकि मरीजों को समुचित उपचार करायी जा सके. लाभुकों ने यह भी बताया कि कार्ड बनाये जाने के बाद उन लोगों के बीच किसी प्रकार की न तो जानकारी ही उपलब्ध करायी गयी और न ही व्यवस्था के बाबत जागरूकता अभियान ही चलाया गया.
जिससे सभी स्वास्थ्य स्मार्ट कार्ड धारकों को इलाज के निमित्त जानकारी उपलब्ध हो सके. बताया कि उन सबों को इस योजना के सफल संचालन को लेकर जिला स्तर पर कोर कमेटी का गठन किया गया है, लेकिन कोर कमेटी की उदासीन रवैये के कारण लाभुकों को उनका कोप भाजन बनना पड़ रहा है.
2012 में हुआ था शुभारंभ
मालूम हो कि बीपीएल व अंत्योदय परिवारों के समुचित उपचार कराये जाने को लेकर जिले में 2012 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का शुभारंभ किया गया, लेकिन कतिपय कारणों से यह योजना वर्ष 2014 तक बंद रहा. जिले में बीपीएल व अंत्योदय धारकों की संख्या तीन लाख 60 हजार 18 है. वित्तीय वर्ष 2014 – 15 में पुन: प्रारंभ हुए इस योजना के तहत दो लाख पांच हजार 870 लाभुकों ने पंजीयन शुल्क जमा कर स्मार्ट कार्ड बनाया था.
कोर कमेटी के सदस्यों द्वारा उक्त वर्ष जिले भर में सरकारी अस्पताल सहित सात निजी नर्सिंग होम में उपचार कराये जाने की व्यवस्था की गयी थी. अस्पताल व नर्सिंग होम की कमी व जागरूकता के अभाव में उक्त वर्ष भी कई लाभुक उपचार से वंचित रह गये. नतीजा यह रहा कि वित्तीय वर्ष 2015- 16 में लाभुकों की संख्या घट कर एक लाख 59,843 हो गयी. यहां तक कि कोर कमेटी की लचर व्यवस्था के कारण कार्ड बनवाते समय इंश्योरेंस एजेंसी के सदस्यों पर लाभुकों को राशि ठग लेने का आरोप भी लगाया गया. बावजूद इसके स्थानीय प्रबंधन सजग नहीं है.
बीमा कंपनी को हुआ करोड़ों का मुनाफा
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत स्मार्ट कार्ड के बाबत जिले भर से बीमा कंपनी को दो करोड़ 50 लाख 95 हजार 351 रुपये की राशि प्राप्त हुआ है. मालूम हो कि इस वित्तीय वर्ष में बीमा कंपनी को प्रति कार्ड 157 रुपये दिया गया है. जिसमें 30 रुपये लाभुकों से तथा 127 रुपये प्रति कार्ड सरकार द्वारा मुहैया कराया गया है.
इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रति लाभुक 30 रुपये का मतलब 47 लाख 95 हजार 290 रुपये तथा सरकार द्वारा प्रति कार्ड 127 रुपये के हिसाब से दो करोड़ तीन लाख 61 रुपये उपलब्ध कराया गया है, लेकिन स्थानीय प्रबंधन के कारण जहां लाभुकों को योजना का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है. वहीं प्रशासनिक महकमा की उदासीनता के कारण सरकारी राजस्व को भी चूना लगाया जा रहा है.
स्वास्थ्य बीमा के तहत डेढ़ लाख से ऊपर बना स्मार्ट कार्ड
कोर कमेटी की उदासीनता के कारण एक नर्सिंग होम में हो रहा उपचार
इधर – उधर भटक रहे लाभुक, नहीं हो रही कार्रवाई
30 रुपये खर्च कर ठगा महसूस कर रहे लाभुक
विभागीय शिथिलता के कारण सरकारी राजस्व को लगाया जा रहा करोड़ों का चूना
बेहतर स्वास्थ्य सुविधा को लेकर सरकार द्वारा जिला स्तर से लेकर अनुमंडल, प्रखंड समेत पंचायत स्तर पर उप स्वास्थ्य केंद्र व अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र संचालित कर नि:शुल्क उपचार किये जाने की व्यवस्था की गयी है, लेकिन गरीब व लाचार मरीजों के गंभीर रोग को उपचार के मद्देनजर सरकार द्वारा महत्वाकांक्षी योजना का संचालन किया गया.
हालात यह है कि जिले भर में डेढ़ लाख से ऊपर स्मार्ट कार्ड धारक हैं, लेकिन इस योजना के जिम्मेवार कमेटी द्वारा समुचित उपचार व्यवस्था के बाबत महज एक नर्सिंग होम को संचालित कर इतिश्री कर लिया गया है. ऐसी बात नहीं कि कोर कमेटी के सदस्य इस समस्या से अनजान है. मामले पर कई बार बैठक भी की है, लेकिन बैठक के निर्णय की जानकारी लाभुकों तक नहीं पहुंच पा रहा है और न ही लाभुकों के हित को देखते हुए जागरूकता संबंधी किसी प्रकार का आयोजन किया जाता है.
सरकारी अस्पताल का हाल बेहाल
स्वास्थ्य स्मार्ट कार्ड बीमा योजना के तहत स्थानीय कोर कमेटी द्वारा सदर अस्पताल सहित रेफरल अस्पताल त्रिवेणीगंज व सिमराही को मरीजों के उपचार किये जाने की जिम्मेदारी दी गयी. यहां तक कि बीते 15 जून 2015 को सदर अस्पताल में इस कार्य का शुभारंभ भी किया गया. साथ ही 24 जून को रेफरल अस्पताल त्रिवेणीगंज में भी उक्त योजना के तहत उपचार का प्रारंभ किया गया, लेकिन सदर अस्पताल द्वारा अब तक मात्र एक ही लाभुक को इस योजना का लाभ दिया गया है.
योजना का लाभ पाने को लेकर जब भी मरीज सदर अस्पताल पहुंचते है तो कार्ड देख अस्पताल प्रबंधन उपचार करने से मना कर देते हैं. कुछ ऐसी ही स्थिति रेफरल अस्पताल त्रिवेणीगंज का भी है, जबकि कोर कमेटी व रेफरल अस्पताल प्रबंधन की सांठ गांठ के कारण नौ माह बीत जाने के बाद भी कार्य प्रारंभ नहीं कराया जा सका है. जिसके कारण बीमाधारकों को काफी परेशानी हो रही है
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