परेशानी. रख-रखाव व मरम्मत नहीं होने से सड़क जर्जर, रहता है जलजमाव

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Apr 2016 12:38 AM

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लाखों खर्च, समस्या जस की तस बुजुर्गों को पगडंडी के सहारे करना पड़ता है आवागमन गौरतलब हो कि जिला मुख्यालय स्थित विद्यापुरी मोहल्ले को एक रिहाइशी कॉलोनी के रूप में जाना जाता है. हजारों की आबादी वाले इस मुहल्ले में कई दशकों से गणमान्य प्रतिष्ठापूर्वक जीवन यापन कर रहे हैं. कई बुजुर्गों ने बताया कि […]

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लाखों खर्च, समस्या जस की तस

बुजुर्गों को पगडंडी के सहारे करना पड़ता है आवागमन
गौरतलब हो कि जिला मुख्यालय स्थित विद्यापुरी मोहल्ले को एक रिहाइशी कॉलोनी के रूप में जाना जाता है. हजारों की आबादी वाले इस मुहल्ले में कई दशकों से गणमान्य प्रतिष्ठापूर्वक जीवन यापन कर रहे हैं. कई बुजुर्गों ने बताया कि विभागीय उपेक्षा के कारण जिला मुख्यालय के रिहायशी मुहल्ला की स्थिति बदतर बनी हुई है. बताया कि सड़क के जर्जर रहने के कारण हल्की बारिश होने पर भी सड़क पर जल-जमाव की स्थिति बनी रहती है.
एक तरफ सड़क पर पानी जमा रहने से जहां मच्छरों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. इसके कारण अपराह्न के बाद घर के बाहर एक स्थान पर खड़े होने में भी परेशानी होती है. यहां तक कि सड़क पर जल जमाव रहने से सुबह व संध्या के समय समीप स्थित गांधी मैदान सहित अन्य स्थानों पर उन सबों को टहलने व घूमने के लिए पगडंडी का सहारा लेना पड़ता है.
हजारों की आबादी वाले विद्यापूरी मुहल्ले में कई दशकों से गणमान्य प्रतिष्ठापूर्वक जीवन यापन कर रहे हैं. कई वर्षों पूर्व यहां सड़क का निर्माण हुआ था. इसके बाद इस सड़क के रख रखाव व मरम्मती का कार्य नहीं कराया गया. इस कारण सड़क जर्जर हो गयी है.
सुपौल : जिला मुख्यालय के वीआइपी कॉलोनी के रूप में स्थापित है विद्यापूरी मोहल्ला. इस मोहल्ले के बीचोबीच एक सड़क गुजरी है, जो एक तरफ गजना चौक तो दूसरी ओर लोहियानगर पहुंचने वाली सड़क से जुड़ती है. सड़क की लंबाई महज एक किमी है. कई वर्षों पूर्व उक्त सड़क का निर्माण हुआ था. इस के बाद इस सड़क के रख रखाव व मरम्मती का कार्य नहीं कराया गया. इस कारण सड़क जर्जर हो गयी. मुहल्लेवासी सड़क के जीर्णोद्धार व एक अदद नाला निर्माण के लिए उद्धारक का बाट जोह रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र संघ ने की हरेंद्र झा की सराहना
प्रकास राजू
संयुक्त राष्ट्र संघ ने मिथिलांचल के लाल वीरपुर निवासी हरेंद्र झा की सराहना की है़ 2008 की कुशहा त्रासदी के बाद उन्होंने द कर्स ऑफ रिवर कोशी विषय पर अपना शोध पूरा किया था़ इसमें इस तथ्य पर जांच को आगे बढ़ाया गया कि कोशी क्षेत्र में आये जलवायु परिवर्तन में इस तरह के कार्य का सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा़ शोध पर आधारित यह प्रोजेक्ट कुशहा त्रासदी के बाद आयी समस्या एवं उनके समाधान पर केंद्रित रहा़
संयुक्त राष्ट्र संघ विकास परिषद के आपदा विशेषज्ञ जी पदम‍्नाथन ने कंट्री डायरेक्टर जैको सिलियर्स के निर्देशन में शोध की समीक्षा के पश्चात पत्र जारी कर श्री झा के कार्य की प्रशंसा की़ सीबीएसइ की तत्कालीन निदेशक राधा महालक्ष्मी के निर्देश पर 2013 में प्रारंभ किये गये इस प्रोजेक्ट को सीबीएसइ के विशेषज्ञों ने अनुकरणीय प्रोजेक्ट के रूप में चयनित किया़ इसके बाद इस प्रोजेक्ट को सीबीएसइ से अनुबंधित विद्यालयों के वर्ग नवम‍् एवं दशम‍् के पाठ‍्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है़
हरेंद्र झा वर्तमान में अररिया जिले के मिथिला पब्लिक स्कूल में अर्थशास्त्र के व्याख्याता पद पर कार्यरत है़ं मानव संसाधन विभाग ने उनको बोर्ड परीक्षा के लिए प्रशन पत्र तैयार करने वाली समिति का सदस्य बना कर सम्मानित किया है़ वहीं संयुक्त राष्ट्र संघ से प्रशंसा पत्र प्राप्त होने के बाद उनके स्थानीय वार्ड नंबर 01 स्थित आवास पर प्रशंसकों का तांता लगा हुआ है़
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