ड्राय डे साबित हुआ शुक्रवार

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Apr 2016 7:49 AM

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अन्य दिनों की भांति शुक्रवार को भी कई शराबी अहले सुबह से ही शराब की दुकानों का चक्कर लगाते नजर आये़ बंद पड़े दुकानों को देख कर पहले तो उन्हें लगा कि आज दुकान देर से खुलेगी़ बाद में जब उन्हें असलियत की जानकारी मिली तो वे सकते में पड़ गये़ अमरेंद्र सुपौल : शराब […]

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अन्य दिनों की भांति शुक्रवार को भी कई शराबी अहले सुबह से ही शराब की दुकानों का चक्कर लगाते नजर आये़ बंद पड़े दुकानों को देख कर पहले तो उन्हें लगा कि आज दुकान देर से खुलेगी़ बाद में जब उन्हें असलियत की जानकारी मिली तो वे सकते में पड़ गये़
अमरेंद्र
सुपौल : शराब के शौकीनों के लिये शुक्रवार का दिन काला दिन साबित हुआ़ दरअसल राज्य सरकार द्वारा घोषित नयी उत्पाद नीति के तहत 01 अप्रैल से पूरे राज्य में शराब बंदी प्रारंभ कर दी गयी है़ यही वजह है कि शुक्रवार को जिले में चल रही 91 शराब की दुकानें बंद हो गयी़
हालांकि नयी नीति के तहत देसी व मसालेदार शराब की बिक्री एवं सेवन अब पूरी तरह प्रतिबंधित है़ सिर्फ जिला मुख्यालय में 08 अंगरेजी शराब की दुकानें सरकार द्वारा संचालित किया जाना है़
लेकिन कुछ आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नही होने की वजह से यह दुकानें नही शुरू की जा सकी़ नतीजा रहा कि शुक्रवार को शराबियों के लिये पूरा दिन ड्राय डे साबित हुआ़ कहीं भी किसी भी तरह की शराब उपलब्ध नहीं रहने के कारण शराब के शौकीनों को मायूस होना पड़ा़ वहीं जिले के अन्य हिस्सों मे शराब की दुकान का प्रावधान नहीं रहने से शराबियों की चिंता और भी बढ़ गयी है़
बंद पड़ी दुकानें, भटकते रहे शराबी : गौरतलब है कि जिला मुख्यालय में सरकार द्वारा 10 देसी व आठ विदेशी शराब की दुकानों का संचालन किया जा रहा है़ नयी उत्पाद नीति लागू होने के बाद इन दुकानों को बंद कर दिया गया़ महीनों पूर्व से शराब बंदी को लेकर पूरे राज्य में तरह-तरह के जागरूकता अभियान चलाये जा रहे है़ साथ ही शराब बंदी की जानकारी भी विभिन्न माध्यमों से दी जा रही है़ यह दीगर बात है कि इन सब के बावजूद गरीब व पिछड़ा वर्ग का एक तबका शायद आज भी सरकार की नयी नीति से वाकिफ नहीं हो पाया है़
जिसका उदाहरण है कि अन्य दिनों की भांति शुक्रवार को भी कई शराबी अहले सुबह से ही शराब की दुकानों का चक्कर लगाते नजर आये़ बंद पड़े दुकानों को देख कर पहले तो उन्हें लगा कि आज दुकान देर से खुलेगी़ बाद में जब उन्हें असलियत की जानकारी मिली तो वे सकते मे पड़ गये़ अस्पताल में खुला नशा मुक्ति केंद्र : सरकार की नयी शराब नीति लागू होने के बाद शराब के लत में डूबे लोगों की सहायता के उद्देश्य से जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना की गयी है़
सिविल सर्जन डॉ रामेश्वर साफी ने बताया कि केंद्र मे आने वाले मरीजों को शराब का लत छुड़ाने को लेकर काउंसलिंग की जायेगी़ साथ ही मरीज की जांच कर उनका उपचार भी किया जायेगा़
अवैध शराब की बिक्री पर प्रशासन की नजर : नयी शराब नीति लागू होने के बाद अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने हेतु प्रशासन द्वारा पूरी तरह सचेष्टता बरतने का दावा किया जा रहा है़
इस कवायद में शुक्रवार को भी उत्पाद निरीक्षक विजय कुमार के नेतृत्व में कई जगह छापेमारी की गयी़ यह अलग बात है कि इस छापे मारी मे उन्हें कुछ भी हाथ नही लगा़ निर्देश के मुताबिक प्रखंड व थाना स्तर पर अवैध शराब की बिक्री पर अंकुश लगाने हेतु जिम्मेवारी सौपी गयी है़
कहते हैं अधिकारी
उत्पाद अधीक्षक किशोर कुमार ने बताया कि संचालन शुल्क जमा नही हो पाने के कारण सरकार द्वारा संचालित अंगरेजी शराब की दुकानों का परिचालन शुक्रवार से प्रारंभ नहीं किया जा सका़ शीघ्र ही सरकार द्वारा संचालित 08 विदेशी शराब की दुकान जिला मुख्यालय में खोली जायेगी़ जिसका देख-रेख विभाग द्वारा प्रतिदिन शाप मैनेजर करेंगे.
सूत्रों की माने तो शराब बंदी लागू होने के बाद नशें के लत में डूबे लोग अब नशा का वैकल्पिक उपाय ढूंढ़ने में लग गये है़ कई ने तो नाम नही बताने की शर्त पर जानकारी दी की अब ऐसे लोग थक हार कर भांग व गांजा जैसे मादक पदार्थों की ओर रूख करने लगे है़
जो ना सिर्फ दारू के मुकाबले में सस्ता है, बल्कि आज भी चोरी छिपे ही सही बाजार के विभिन्न हिस्सों में आसानी से उपलब्ध है़ कई शराबी तो सरकार की नीतियों को कोसते हुए कहा कि देसी नहीं मिलने की स्थिति में मजबूरन उन्हें विदेशी शराब का सहारा लेना पड़ेगा़ यह अलग बात है कि विदेशी शराब महंगी होने की वजह से उनकी जेब के लिये यह शौक काफी मंहगा साबित होगा़
चिंता में पड़े हैं भूजा व अंडा बेचने वाले…
गौरतलब है कि जिले में चल रही शराब की दुकानों के नजदीक शराबियों की सुविधा हेतु भूजा व अंडे की दुकानें चल रही थी़ शराबी इन खाद्य पदार्थों का उपयोग चखना के रूप में करते थे़ जिसे लेकर इन ठेला व खोमचे वाले दुकानों की काफी अच्छी बिक्री हो जाती थी़, जो इन दुकानदारों की रोजी रोटी का सहारा बना हुआ था़
शराब की दुकानें बंद पड़ जाने के बाद ऐसे छोटे- मोटे दुकानदारों के समक्ष बड़ी समस्या खड़ी हो गयी है और वे अन्य किसी नये जगह व नये रोजगार की तलाश मे जुट गये है़ं
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