खेत-खलिहान से लेकर शौचालय, नदी नाव, लग्जरी वाहनों में मिल रही शराब

सुभाष चंद्रा, सुपौल : मुख्यमंत्री द्वारा शराबबंदी की घोषणा के बाद बिहार में शराबबंदी को लेकर प्रशासनिक स्तर से तरह-तरह की कवायद शुरू की गयी. जहां एक तरफ पुलिस प्रशासन शराबबंदी की दिशा में ठोस पहल करते नजर आ रहे हैं. वहीं उत्पाद विभाग द्वारा भी ताबरतोड़ छापामारी कर व्यापक पैमाने पर शराब जब्त कर […]
सुभाष चंद्रा, सुपौल : मुख्यमंत्री द्वारा शराबबंदी की घोषणा के बाद बिहार में शराबबंदी को लेकर प्रशासनिक स्तर से तरह-तरह की कवायद शुरू की गयी. जहां एक तरफ पुलिस प्रशासन शराबबंदी की दिशा में ठोस पहल करते नजर आ रहे हैं. वहीं उत्पाद विभाग द्वारा भी ताबरतोड़ छापामारी कर व्यापक पैमाने पर शराब जब्त कर आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने में कामयाब हो रहे हैं. वहीं सीमापार से हो रहे शराब की तस्करी को रोकने में एसएसबी भी महत्पूर्ण भूमिका निभा रही है.
बावजूद इसके साल दर साल बीतने के बाद भी शराबबंदी की सफलता पर प्रश्न चिह्न खड़ा किया जा रहा है. शायद यही कारण है कि गत 31 जनवरी को डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने पदभार ग्रहण करते ही कहा कि शराबबंदी को सख्ती से लागू किया जायेगा. उन्होंने ये भी कहा था कि 90 प्रतिशत पुलिस कर्मी ईमानदारी से काम करते हैं, उन्हें सलाम है. लेकिन दस प्रतिशत जो शराब पीते हैं या शराब के धंधे में मददगार है, उन्हें मेरी सख्त चेतावनी है कि वे संभल जाए नहीं तो एफआईआर कर जेल भेजे जाएंगे.
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