विद्यालयों में शौचालय तो बना दिया, पर दरवाजा व टंकी गायब

Published at :07 Dec 2017 8:37 AM (IST)
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विद्यालयों में शौचालय तो बना दिया, पर दरवाजा व टंकी गायब

स्कूलों में शौचालय की समस्या का नहीं हो रहा समाधान स्कूली छात्राओं को शौच करने के लिए आना पड़ता है घर जदिया : एक तरफ सरकार खुले में शौच मुक्त समाज बनाने के उद्देश्य से घर घर शौचालय निर्माण करने की बात कर रही है. दूसरी तरफ विद्यालय में छात्र-छात्राओं को खुले में शौच से […]

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स्कूलों में शौचालय की समस्या का नहीं हो रहा समाधान

स्कूली छात्राओं को शौच करने के लिए आना पड़ता है घर

जदिया : एक तरफ सरकार खुले में शौच मुक्त समाज बनाने के उद्देश्य से घर घर शौचालय निर्माण करने की बात कर रही है. दूसरी तरफ विद्यालय में छात्र-छात्राओं को खुले में शौच से बचाने के उद्देश्य से चलायी जा रही शौचालय निर्माण योजना पर अभियंता, अधिकारियों व विद्यालय के प्रधान की कुदृष्टि से इस योजना की हवा निकल रही है. विद्यालयों में शौचालय का निर्माण कराया गया. विभिन्न विद्यालयों में निर्मित शौचालयों का रंग रोगन कर उन्हें चमका दिया गया लेकिन अंदर की कहानी बड़ी ही दुखदायी है. अधिकांश विद्यालयों में न तो सही से सेप्टी टैंक का निर्माण किया गया है और न ही सीट लगाये गये हैं. कई विद्यालयों के शौचालय में अगर सीट लगाये गये हैं तो वहां दरवाजा नहीं है. टाइल्स का दर्शन तो नामुमकिन ही है. आश्चर्यजनक यह है कि विभागीय अभियंता द्वारा बिना जांच किये ही तय रकम लेकर निर्माण कार्य पूर्ण होने संबंधी प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है.

अनुपयोगी साबित हो रहा शौचालय

गौरतलब हो कि विद्यालय में एक लाख 63 हजार की लागत से शौचालय का निर्माण करवाया गया. जो बाहर से चकाचक लेकिन भीतरी संरचना ठीक नहीं रहने से यह छात्रों के बीच महज शोभा की वस्तु बनी हुई है. हालात ऐसी है कि शौचालय मौजूद रहने के बावजूद छात्र छात्राओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. यहां तक कि उक्त शौचालय में गंदगी का आलम सहज ही दिख जाता है. जिसका प्रभाव बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ता है. विद्यालय के शौचालय का विभागीय स्तर से अथवा विद्यालय प्रबंधन या फिर विद्यालय शिक्षा समिति की ओर से साफ सफाई व भौतिक स्थिति को लेकर शायद ही कभी देखरेख किया जाता है. जबकि प्रधानमंत्री ने अतिरिक्त रूप से विद्यालयों को राशि आवंटित कर खुले में शौच नहीं जाने का आह्वान किया था. विद्यालय में राशि भी आयी शौचालय का निर्माण भी आधे अधूरे तरीके से हुआ लेकिन नियमित देखरेख के अभाव में शौचालय अनुपयोगी साबित हो रहा है.

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