एक सप्ताह में सात की मौत, दुर्घटना की शक्ल में हत्या तो नहीं ?

Published at :28 Nov 2017 5:50 AM (IST)
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एक सप्ताह में सात की मौत, दुर्घटना की शक्ल में हत्या तो नहीं ?

सात दिनों के अंदर सड़क दुर्घटना में सात लोगों ने गंवायी जान, कई घायल दुर्घटना मामले में कई परिजन लगा रहे हत्या का आरोप सुपौल : जिले के सड़कों पर इन दिनों मौत मंडरा रही है. सावधानी हटी और दुर्घटना घटी. जो भी हो पिछले एक सप्ताह के अंदर सड़क दुर्घटना में सात लोगों की […]

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सात दिनों के अंदर सड़क दुर्घटना में सात लोगों ने गंवायी जान, कई घायल

दुर्घटना मामले में कई परिजन लगा रहे हत्या का आरोप
सुपौल : जिले के सड़कों पर इन दिनों मौत मंडरा रही है. सावधानी हटी और दुर्घटना घटी. जो भी हो पिछले एक सप्ताह के अंदर सड़क दुर्घटना में सात लोगों की मौत इस बात की तसदीक कर रही है कि सड़क पर चलना खतरे से खाली नहीं है. लगातार हो रही इन घटनाओं से जहां प्रशासन बेखबर है, वहीं वाहन चालकों की मनमानी बदस्तूर जारी है. सड़क चिकने क्या हुए इस पर चलने वालों के सिर मौत की साया हर वक्त मंडराती दिख रही है. पिछले 20 नवंबर से 26 नवंबर तक के आंकड़ों पर गौर करे तो वाहन से कुचल कर सात लोगों की मौत अब तक हो चुकी है. जबकि इसमें दर्जनों लोग घायल भी हुए हैं.
उनकी भी हालत जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है. सबसे बड़ी बात यह है कि इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिये परिवहन विभाग भी मूकदर्शक बने हुए हैं. हालांकि कुछ मामलों में मृतक के परिजनों ने आरोप भी लगाया है कि यह सिर्फ दुर्घटना नहीं बल्कि सोची समझी साजिश के तहत हत्या का मामला है.
खैर, जो भी हो पुलिस इन मामलों में छानबीन कर रही है. आए दिन हो रही दुर्घटनाओं से इस ओर सोचने पर मजबूर कर दिया है. मामला सामने आने पर ही कुछ नतीजा निकल सकता है. लेकिन सड़क पर घट रही घटनाएं आम लोगों के लिये परेशानी का कारण बन गया है. घटनाओं के बाद थोड़ी देर के लिये ही सही आक्रोश का इजहार सड़क जाम कर कर लिया जाता हो, लेकिन जरूरत है कि इन बढ़ती दुर्घटनाओं में लगातार हो रही मौत को लेकर जिला प्रशासन संजीदगी दिखाए और कोई ठोस पहल कर सड़क पर हो रही मौत के सिलसिले को विराम देने की कोशिश करें. पिछले एक सप्ताह के आंकड़ों को देखे तो 20 से 26 नवंबर तक के बीच सात लोगों ने सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवा दिया.
20 नवंबर को त्रिवेणीगंज मुख्यालय स्थित मेढ़िया मोड के समीप एनएच 327 ई पर स्काॅर्पियो की ठोकर से एक वृद्ध जख्मी हो गया था. जख्मी थाना क्षेत्र के औरलाहा पंचायत के परसाही वार्ड नंबर 12 निवासी 65 वर्षीय राजेंद्र साह के रूप में पहचान की गयी थी. जिसे उपचार के लिये त्रिवेणीगंज से सहरसा ले जाया जा रहा था. लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गयी.
तीसरी घटना 23 नवंबर की देर संध्या किसनपुर थाना क्षेत्र में एनएच 327 ई पर सुहागपुर व चौहट्टा के बीच घटी. जहां एक तेज रफ्तार बाइक ने एक युवक को ठोकर मारकर फरार हो गया. घटना के उपरांत आस पड़ोस के लोगों ने गंभीर रूप से जख्मी युवक को उपचार हेतु सदर अस्पताल लाने के क्रम में उसकी मौत हो गयी. जिसके बाद थाना पुलिस द्वारा सदर अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम करवा कर परिजन को सौंप दिया गया. मृत युवक नरही गांव का 25 वर्षीय युवक विकास झा बताया गया. जिसको लेकर मृतक की मां गीता देवी ने थाना को आवेदन देकर कांड संख्या 330/17 दर्ज कराते चौहट्टा के मुखिया पुत्र को नामजद बनाया है.
भीमपुर थाना चौक स्थित एनएच 57 पर रविवार के अपराह्न एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो बच्ची सहित एक मां की मौत हो गयी. साथ ही दो गंभीर रूप से जख्मी हो गये. मृतकों में 30 वर्षीया महिला मैतून खातून और पुत्री पांच वर्षीया आफरिन खातून की मौके पर ही मौत हो गयी. जबकि गंभीर रूप से जख्मी सात वर्षीया पुत्री आसरीन की फारबिसगंज स्थित अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गयी.
रविवार को ही वीरपुर थाना क्षेत्र के हृदय नगर रामजानकी मंदिर चौक एसएच 91 के निकट घटी. जहां एक तेज रफ्तार कार ने एक 05 वर्षीय बच्चा को रौंद दिया. इस घटना में बालक आलोक की मौत मौके पर ही हो गयी. मृत बच्चे के पिता ओमप्रकाश यादव हृदय नगर वार्ड नंबर 3 के निवासी हैं. दुख की बात यह है कि मृतक छह बहनों में इकलौता भाई था. इस घटना से परिजनों के बीच चीख-पुकार मची रही और आसपास के लोग भी घटना को लेकर मर्माहत थे.
दूसरी घटना
22 नवंबर की रात्रि की है. जब वीरपुर-फारबिसगंज मुख्य मार्ग पर भवानीपुर के निकट अनियंत्रित स्काॅर्पियो ने एक बाइक सवार को जोरदार टक्कर मार दी थी. जिसमें बाइक सवार की घटना स्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गयी. मृतक सीतापुर निवासी 28 वर्षीय विश्वजीत देव था. बताया गया कि घटना के बाद स्काॅर्पियो का ड्राइवर गाड़ी लेकर भागने में सफल रहा.
कहीं हत्या का तरीका तो नहीं बदल रहा
लगातार हो रही मौत हो लेकर कयासों का बाजार भी गर्म है. खास कर बड़े वाहनों से कुचल कर हो रही मौत इस बात की पुष्टि भी कर रही है कि कहीं अपराधी हत्या के तरीके को बदल तो नहीं रहा है? आमतौर पर होने वाले हत्याओं में कानूनी बातें कुछ और होती है. जबकि वाहन से कुचल कर मारे जाने में हत्यारे कहीं न कहीं बड़े जोखिम से बच जाते हैं. क्योंकि इन घटनाओं में शामिल दो अलग-अलग मौत के मामले में मृतक के परिजनों द्वारा यह आरोप लगाया जाना कि सुनियोजित तरीके से हत्या को दुर्घटना की शक्ल देने की कोशिश की गयी है. लिहाजा इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है
कि हत्या के लिये अपराधी अन्य तरीके अपनाने लगे हैं. वीरपुर में 23 नवंबर की रात विश्वजीत देव की स्कॉर्पियो से कुचल कर हुई मौत मामले में मृतक के परिजन ने यह आरोप लगाया है कि विश्जीत की दुर्घटना में नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से हत्या करने के लिये दुर्घटना का शक्ल दिया गया है. वहीं 23 नवंबर को ही किसनपुर थाना क्षेत्र में विकास झा की सड़क दुर्घटना में मौत को लेकर मृतक के परिजन ने स्पष्ट रूप से थाना में आवेदन देकर आरोप लगाया कि यह दुर्घटना नहीं हत्या है.
हालांकि इसमें नामजद भी किया गया है. अब देखना है कि पुलिस इन मामलों में लगाये गये आरोप की गुत्थी सुलझा पाती है या नहीं. फिलहाल सड़क दुर्घटना के बढ़ जाने से लोग सशंकित हैं. मालूम हो कि लगातार हो रहे सड़क दुर्घटनाओं से लोगों के साथ प्रशासन की भी परेशानी बढ़ गयी है. वहीं चालकों की लापरवाही के कारण भी दुर्घटना हो रही है. बेरोटोक के वाहन चालक फर्राटे भरते सड़कों पर नजर आ रहे हैं. इस वजह से भी वजह दुर्घटनाएं हो रही है.
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