हड़ताल से अंचल कार्यालय का कामकाज बाधित

जिले के सभी अंचल कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हो गया है. अंचल अधिकारी और राजस्व अधिकारी अपनी मांगों को लेकर सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. पहले से ही राजस्व कर्मचारी भी हड़ताल पर हैं. ऐसे में अंचल कार्यालयों में लगभग सभी काम ठप पड़ गए हैं.
प्रतिनिधि, सीवान. जिले के सभी अंचल कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हो गया है. अंचल अधिकारी और राजस्व अधिकारी अपनी मांगों को लेकर सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. पहले से ही राजस्व कर्मचारी भी हड़ताल पर हैं. ऐसे में अंचल कार्यालयों में लगभग सभी काम ठप पड़ गए हैं. हड़ताल का असर सबसे ज्यादा आम लोगों पर पड़ रहा है. जमीन से जुड़े काम कराने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग अंचल कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन अधिकारी और कर्मचारी नहीं रहने से उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है. दाखिल-खारिज, परिमार्जन, जमीन की मापी, भूमि विवाद का निपटारा, आय, निवास और जाति प्रमाण पत्र जैसे जरूरी काम पूरी तरह से प्रभावित हो गए हैं. इसके अलावा राजस्व वसूली का काम भी ठप हो गया है. ग्रामीण इलाकों से आए कई लोगों ने बताया कि वे सुबह से ही अंचल कार्यालय पहुंचे थे, लेकिन कार्यालय में कामकाज बंद रहने के कारण उन्हें बिना काम कराए ही लौटना पड़ा. लोगों का कहना है कि पहले से ही कई काम लंबित हैं, ऐसे में हड़ताल से उनकी परेशानी और बढ़ गई है. बिहार राजस्व सेवा संघ और बिरसा यूनाइटेड के आह्वान पर राज्यभर के अंचल अधिकारी और राजस्व अधिकारी सोमवार से हड़ताल पर चले गए हैं. हड़ताल का मुख्य कारण भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) के पद पर नियुक्ति से जुड़ा विवाद बताया जा रहा है. संघ का कहना है कि इस पद पर बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों की पदस्थापना सुनिश्चित की जानी चाहिए. संघ का यह भी कहना है कि इस संबंध में उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है. साथ ही मंत्रिपरिषद की हालिया बैठक में लिए गए कुछ फैसलों को भी संघ ने अपने संवर्ग के हित के खिलाफ बताया है और उन्हें वापस लेने की मांग की है. राजस्व अधिकारियों की अन्य मांगों में राजस्व से जुड़े पदों को बिहार राजस्व सेवा के लिए सुरक्षित करना, अनुमंडल पदाधिकारी के कुछ पदों पर राजस्व सेवा के अधिकारियों को मौका देना, आपदा प्रबंधन से जुड़े पदों में उनकी भागीदारी बढ़ाना और लोक शिकायत निवारण पदों में पदोन्नति का कोटा तय करना शामिल है. इसके अलावा संघ ने मांग की है कि भूमि से जुड़े मामलों में अंचल अधिकारियों को और अधिकार दिए जाएं ताकि जमीन विवाद, अतिक्रमण और जन शिकायतों का निपटारा तेजी से हो सके. संघ का कहना है कि अंचल अधिकारी जमीन और राजस्व से जुड़े मामलों में सबसे पहले जिम्मेदारी निभाते हैं. इसलिए उन्हें उनके काम के अनुसार कानूनी और प्रशासनिक अधिकार मिलने चाहिए. राजस्व अधिकारियों ने यह भी मांग उठाई है कि कार्यालयों में पर्याप्त संख्या में अमीन, राजस्व कर्मचारी और अन्य स्टाफ की नियुक्ति की जाए ताकि कामकाज सुचारु रूप से चल सके. इसके साथ ही लंबित वेतन, पदोन्नति और सेवा से जुड़े अन्य मामलों का भी जल्द समाधान करने की मांग की गई है.
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