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सरकारी अस्पतालों में नहीं चला ओपीडी, निराश लौट गये मरीज

Updated at : 14 Aug 2024 9:30 PM (IST)
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सरकारी अस्पतालों में नहीं चला ओपीडी, निराश लौट गये मरीज

बुधवार को सदर अस्पताल समेत अधिकांश ग्रामीण अस्पतालों के ओपीडी सेवा चिकित्सकों के हड़ताल के चलते ठप रही.दूरदराज से आये मरीज व उनके अधिकांश परिजनों को निराश होकर घर लौटना, तो कुछ मरीज प्राइवेट चिकित्सकों के पास इलाज के लिये जाने को मजबूर हुए. कोलकाता के आरजी कार मेडिकल कॉलेज की पीजी की छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद नृशंस हत्या किए जाने के विरोध में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के हड़ताल के चलते यह परेशानी हुई.

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सीवान. बुधवार को सदर अस्पताल समेत अधिकांश ग्रामीण अस्पतालों के ओपीडी सेवा चिकित्सकों के हड़ताल के चलते ठप रही.दूरदराज से आये मरीज व उनके अधिकांश परिजनों को निराश होकर घर लौटना, तो कुछ मरीज प्राइवेट चिकित्सकों के पास इलाज के लिये जाने को मजबूर हुए. कोलकाता के आरजी कार मेडिकल कॉलेज की पीजी की छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद नृशंस हत्या किए जाने के विरोध में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के हड़ताल के चलते यह परेशानी हुई. संघ के आह्वान पर जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों ने ओपीडी सेवा को बाधित रखा.ओपीडी खुलने के साथ ही सदर अस्पताल के सभी डॉक्टरों ने मुख्य गेट पर खड़े होकर पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुई घटना की निंदा करते हुए विरोध जताया.आइएमए के सचिव डॉक्टर शरद चौधरी ने कोलकाता की घटना की निंदा करते हुए कहा कि भारतीय चिकित्सा संघ भी आज के ओपीडी बहिष्कार का नैतिक समर्थन करता है.बिहार चिकित्सा संघ सीवान इकाई के सचिव डॉ. नीरज कुमार ने कहा कि बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ इस घटना की घोर निंदा करता है तथा बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ रेजिडेर एसोसिएशन के आंदोलन का नैतिक समर्थन करता है. उन्होंने कहा कि सभी सरकारी डॉक्टर पश्चिम बंगाल सरकार से मांग करते है कि घटना में संलिप्त अपराधियों को कठोर से कठोर सजा दे .साथ ही बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ बिहार सरकार से सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर करता रहा है और यह मांग करता है कि स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को अविलंब प्रभावी बनाया जाय. क्योंकि रोज-रोज चिकित्सकों पर कार्य स्थल पर हमला आम हो गई है. इतना ही नहीं कनीय पदाधिकारियों और लोकल नेताओं द्वारा अस्पताल के निरीक्षण के नाम पर चिकित्सकों के साथ अभद्र व्यवहार बढ़ते जा रहा है.चिकित्सकों के कार्यस्थल पर सुरक्षा की पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित की जाये. इवनिंग एवं रात्रि पाली के ड्यूटी को विलय कर एक पाली बनाया जाय तथा ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की कमी को देखते हुए ड्यूटी अदला-बदला करने छूट दी जाये. ओपीडी सेवा बाधित होने से मरीजों को हुई परेशानी डॉक्टरों की हड़ताल के कारण सदर अस्पताल की ओपीडी सेवा बाधित होने से उपचार कराने आए मरीजों को काफी परेशानी हुई.ग्रामीण क्षेत्रों से उपचार कराने आने वाले मरीज इंतजार करने के बाद वापस लौट गए.सदर अस्पताल में आपात सेवा मरीजों के लिए उपलब्ध कराई गई थी.सदर अस्पताल के मॉडल इम्यूनाइजेशन सेंटर में बच्चों का टीकाकरण किया गया. वहीं एंटी रेबीज टीकाकरण काउंटर चालू नहीं होने से कई मरीज बिना टिका लिए वापस लौट गए.मरीजों का रजिस्ट्रेशन करने के लिए काउंटर पर कर्मी तैनात थे.लेकिन ओपीडी में डॉक्टर के नहीं बैठने के कारण मरीज ओपीडी में इलाज नहीं करा सके.ओपीडी बंद होने से कई मरीज निजी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए चले गए.दोपहर बाद ओपीडी में डॉक्टरों के नहीं रहने से नर्सिंग स्टॉफ भी चले गये.सामान्य दिनों के अपेक्षा ओपीडी बंद होने से आपात कक्ष में मरीजों की संख्या अधिक दिखी.

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