नियमित बैठक नहीं कराने पर जायेगी कुर्सी, डीएम का सख्त अल्टीमेटम

Published by :AMLESH PRASAD
Published at :07 May 2026 9:49 PM (IST)
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नियमित बैठक नहीं कराने पर जायेगी कुर्सी, डीएम का सख्त अल्टीमेटम

नगर निकायों में सामान्य बोर्ड और सशक्त स्थायी समिति की बैठक नियमित रूप से नहीं कराने वाले जनप्रतिनिधियों की अब कुर्सी भी जा सकती है.

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सीवान. नगर निकायों में सामान्य बोर्ड और सशक्त स्थायी समिति की बैठक नियमित रूप से नहीं कराने वाले जनप्रतिनिधियों की अब कुर्सी भी जा सकती है. आंदर नगर पंचायत की मुख्य पार्षद पर हुई कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है. जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने जिले के सभी नगर परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं कार्यपालक पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सामान्य बोर्ड की बैठक नियमानुसार और समय पर कराना हर हाल में सुनिश्चित करें. यदि इसमें लापरवाही बरती गई तो संबंधित निकाय के खिलाफ राज्य निर्वाचन आयोग और विभाग को प्रतिवेदन भेजा जायेगा. डीएम द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार ने वाद संख्या-23/2025 में सुनवाई करते हुए नगर पंचायत आंदर की मुख्य पार्षद चंद्रावती देवी को अयोग्य घोषित कर तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया था. आयोग ने पाया था कि नगर पंचायत में सामान्य बोर्ड एवं सशक्त स्थायी समिति की निर्धारित न्यूनतम बैठकें नियमित रूप से आयोजित नहीं की जा रही थीं. आयोग ने अपने आदेश में साफ कहा था कि नगरपालिका प्रशासन का सुचारू संचालन और विकास योजनाओं की निगरानी के लिए नियमित बैठकें बेहद जरूरी हैं. जिला प्रशासन ने इस आदेश को सभी नगर निकायों के लिए चेतावनी के रूप में लेते हुए कहा है कि बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 48 (1) के अनुसार प्रत्येक नगरपालिका में हर माह कम से कम एक बार बोर्ड बैठक होना अनिवार्य है. बैठक बुलाना और उसके माध्यम से विकास कार्यों की समीक्षा करना अध्यक्ष की जिम्मेदारी मानी गई है.यदि बैठकें नियमित नहीं होंगी तो विकास योजनाओं की निगरानी प्रभावित होगी और जनता से जुड़े जरूरी फैसले समय पर नहीं लिए जा सकेंगे. डीएम ने कहा कि नगर निकायों में सफाई, सड़क, जलनिकासी, स्ट्रीट लाइट, पेयजल, कूड़ा उठाव और अन्य विकास योजनाओं को लेकर नियमित समीक्षा जरूरी है. बोर्ड की बैठक नहीं होने से कई योजनाएं फाइलों में ही अटकी रह जाती हैं और जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इसी वजह से सरकार और आयोग अब इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं. हाल के दिनों में आनंद नगर पंचायत में मुख्य पार्षद की कुर्सी खाली होने का मामला भी काफी चर्चा में रहा था. इसके बाद नगर निकायों में प्रशासनिक सक्रियता और जवाबदेही को लेकर दबाव बढ़ गया है. राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा है कि आने वाले दिनों में नियमों की अनदेखी करने वाले निकायों के खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई हो सकती है. डीएम ने सभी कार्यपालक पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि बोर्ड बैठक की कार्यवाही पुस्तिका नियमित रूप से संधारित करें तथा बैठक की सूचना और प्रस्तावों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें. साथ ही विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर उसका अनुपालन भी सुनिश्चित करें.

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