महाशिवरात्रि कल, सिद्धि योग में पूजन से पूर्ण होगी मनोकामना
Updated at : 20 Feb 2020 12:38 AM (IST)
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सीवान : सनातन धर्म मे देवाधिदेव महादेव का विशिष्ठ स्थान प्राप्त है. हर मांगलिक उत्सवों में लोग की पूजा-अर्चना करते है. यही कारण है कि हिंदू देवी-देवताओं में भगवान शिव शंकर सबसे लोकप्रिय देवता हैं. वे देवों के देव महादेव हैं तो है ही. असुरों के राजा भी उनके उपासक रहे हैं पंडित अवधकिशोर ओझा […]
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सीवान : सनातन धर्म मे देवाधिदेव महादेव का विशिष्ठ स्थान प्राप्त है. हर मांगलिक उत्सवों में लोग की पूजा-अर्चना करते है. यही कारण है कि हिंदू देवी-देवताओं में भगवान शिव शंकर सबसे लोकप्रिय देवता हैं.
वे देवों के देव महादेव हैं तो है ही. असुरों के राजा भी उनके उपासक रहे हैं पंडित अवधकिशोर ओझा कहते है कि भगवान शंकर की लोकप्रियता का कारण है इनकी सरलता है. इनकी पूजा आराधना की विधि बहुत सरल मानी जाती है. माना जाता है कि शिव को यदि सच्चे मन से याद कर लिया जाये तो शिव प्रसन्न हो जाते हैं.
उनकी पूजा में भी ज्यादा ताम-झाम की जरुरत नहीं होती. ये केवल जलाभिषेक, बिल्वपत्रों को चढ़ाने और रात्रि भर इनका जागरण करने मात्र से मेहरबान हो जाते हैं. वैसे तो हर सप्ताह सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना का दिन माना जाता है. हर महीने में मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है, लेकिन साल में शिवरात्रि का मुख्य पर्व जिसे व्यापक रुप से मनाया जाता है.
फाल्गुन के महीने की शिवरात्रि को तो महाशिवरात्रि कहा जाता है. इसे फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है. इस वर्ष यह पर्व 21 फरवरी को है. इसकी सारी तैयारियां जोरों पर है. शिव मंदिर, शिवालयों को सजाया जा रहा है.
भोले शंकर के पूजन में इन सामग्रियों का विशेष महत्व
पंडित गिरीश नारायण तिवारी कहते है कि महाशिवरात्रि का त्योहार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को देश भर के शिवालयों में धूमधाम से मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह इसी दिन हुआ था. इस दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए विशेष विधि विधान से उनकी पूजा की जाती है. भगवान के शिव के पूजन में विल्वपत्र, भांग, आक का पत्ता, धतूरा फल व पत्ते सहित इन पांच सामग्रियों का विशेष महत्व है.
इस साल महाशिवरात्रि पर बन रहा दुर्लभ संयोग
पंडित श्रीराम तिवारी कहते है इस साल के महा शिवरात्रि पर विशेष दुर्लभ संयोग बन रहा है. इस बार 117 साल बाद शनि व शुक्र का दुर्लभ योग बन रहा है. शिवरात्रि के दिन शनि स्वयं की राशि मकर में व शुक्र ग्रह अपनी उच्च राशि मीन में रहेगा. यह एक दुर्लभ योग है. इस योग में भगवान शिव की आराधना करने से शनि, गुरु, शुक्र के दोषों से मुक्ति मिलती है. किसी भी नये कार्य की शुरुआत करने के लिये यह खास योग माना जाता है. 21 फरवरी को बुध व सूर्य कुंभ राशि में एक साथ रहेंगे.
इससे बुध-आदित्य योग बनेगा. इसके अलावा इस दिन सभी ग्रह राहू-केतु के मध्य रहेंगे.
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