राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान पहुंचा सीवान, उमड़ी किसानों की भीड़, फॉर्मर रजिस्ट्री को बताया गया अनिवार्य
Published by : YUVRAJ RATAN Updated At : 12 Jun 2026 2:55 PM
कार्यक्रम की तस्वीर
Siwan News : सीवान में खेत बचाओ अभियान: किसानों को प्राकृतिक खेती का मंत्र, 74 किसान बिहार कृषि ऐप से जुड़े. किसानों को मिली कई महत्वपूर्ण जानकारियां.
बड़हरिया (सीवान) से आनंद मिश्र की रिपोर्ट
Siwan News : शारदीय (खरीफ) कृषि जन कल्याण चौपाल सह राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान के तत्वावधान में कार्यक्रम प्रखंड की नवलपुर पंचायत के इनायत छपरा गांव के काली स्थान के पास सहायक तकनीकी प्रबंधक सतीश सिंह,कृषि समंवयक रामजी शुक्ल,किसान सलाहकार प्रदीप कुमार किसान की उपस्थिति में कृषि जन कल्याण चौपाल सह राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ कार्यक्रम का आयोजन हुआ. साथ ही, बालपुर पंचायत के पंचायत सरकार भवन परिसर में एटीएम पूनम कुमारी सहायक तकनीकी प्रबंधक, कृषि समंवयक चंदन कुमार कुमार और किसान सलाहकार रमेश कुमार गिरि की मौजूदगी में भी चौपाल का आयोजन हुआ. मौके पर एटीएम सतीश सिंह ने कि फॉर्मर रजिस्ट्री किसानों के लिए बहुत जरूरी है.
फॉर्मर रजिस्ट्री और खेत बचाओ अभियान पर जोर
जिन किसान के नाम से जमीन का रसीद है वह अपना इकेवाइसी करा कर फॉर्मर रजिस्ट्री या आइडी बनवा लें. जिससे किसानों को केंद्र सरकार के कृषि विभाग की सभी योजनाओं का लाभ सीधे पा सकते हैं. कार्यक्रम में किसानों को बताया गया कि किसान को वर्तमान समय में अपना खेत बचाना जरूरी हो गया है. उन्होंने कहा कि खेत बचाओ का तात्पर्य संतुलित उर्वरक का उपयोग और पैसे की बचत और मिट्टी सुधार से है. इसके लिए सबसे आसान तरीका है कि किसान अपने खेत में ढैचा और मूंग लगायें और 30 से 45 दिनों बाद ढैचा या मूंग फसल को खेत में ही जुताई कर के मिला दें.
खेत में छिपा है प्राकृतिक खाद का खजाना
फिर उस खेत में अगली फसल लगायें, उसमें किसान को कोई भी खाद नहीं देनी पड़ेगी. साथ ही, फसल मजबूत और हरी-भरी दिखेगी. बिना रासायनिक खाद के खेती करने से मिट्टी में भी सुधार होगा और मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्म जीव भी सुरक्षित रहेंगे और उनको अपना भोजन भी मिलेगा क्योंकि ढैचा और मूंग ऐसी फसल है, जिसमें नाइट्रोजन (यूरिया) की पर्याप्त मात्रा होती है. साथ में मूंग फसल की जड़ की गांठों में राइजोबियम नाम की बैक्टीरिया होता है, जो वायुमंडल में उड़ रहे 78 प्रतिशत नाइट्रोजन को पकड़ कर इकठ्ठा करता है, इससे उस खेत में नाइट्रोजन एकत्रित हो जाता है.
जैविक खेती अपनाएं, खर्च घटाएं और उपज बढ़ाएं: कृषि विशेषज्ञों की किसानों को सलाह
उन्होंने बताया कि जैविक और प्राकृतिक खेती करने से किसान संतुलित उर्वरकों का उपयोग कर सकते हैं. कार्यक्रम में नवलपुर पंचायत में कुल 47 किसानों को और बालपुर पंचायत में कुल 27 किसानों को बिहार कृषि ऐप से जोड़ा गया. 30 जून तक चलने वाले इस अभियान में बड़ी संख्या में किसान शामिल थे.
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