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दो से साढ़े चार लाख छात्र प्रतिदिन सुनेंगे गांधी के विचार

Updated at : 13 Sep 2019 2:07 AM (IST)
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दो से साढ़े चार लाख छात्र प्रतिदिन सुनेंगे गांधी के विचार

सीवान : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों की सार्थकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब दो अक्तूबर से सूबे के प्रत्येक स्कूलों में उनके विचारों से छात्रों को अवगत कराया जायेगा. इससे जहां जिला स्तर पर 2222 स्कूलों के तकरीबन साढ़े चार लाख बच्चे जीवन में लाभ उठा सकेंगे, वहीं […]

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सीवान : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों की सार्थकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब दो अक्तूबर से सूबे के प्रत्येक स्कूलों में उनके विचारों से छात्रों को अवगत कराया जायेगा. इससे जहां जिला स्तर पर 2222 स्कूलों के तकरीबन साढ़े चार लाख बच्चे जीवन में लाभ उठा सकेंगे, वहीं राज्य स्तर पर 80 हजार स्कूलों में 1.80 करोड़ बच्चों को लाभ होगा. इन स्कूलों में प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक शामिल है. गांधी कथा वाचन के नाम से शुरू इस अभियान को फिलहाल चेतना सत्र में लागू किया जा रहा है.

इधर इसको अमली जामा पहनाने के लिए गुरुवार को जिले के चयनित शिक्षकों को वीएम उच्च विद्यालय सीवान में प्रशिक्षण दिया गया. चुनकर आये करीब 80 शिक्षक प्रशिक्षण सत्र के दौरान विद्यार्थी की तरह गांधी कथा वाचन के बारीकियों का प्रशिक्षण प्राप्त किया. मुख्यमंत्री के निर्देश पर शिक्षा विभाग स्कूली बच्चों तक बापू के आचरण व उनके कार्यों को लेकर प्रशिक्षण के लिए कार्यशाला शुरू किया है.
इधर प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत महात्मा गांधी के तस्वीर पर माल्यार्पण पश्चात दीप प्रज्वलन के बाद उनके भजन वैष्णव जन से हुई. दीप प्रज्वलित डीइओ चंद्रशेखर राय, डीपीओ दिलीप कुमार सिंह व पीओ अवधेश कुमार ने संयुक्त रूप से किया. इसके पश्चात राज्य स्तर पर प्रशिक्षण प्राप्त प्रशिक्षक विश्व मोहन कुमार सिंह, त्रिलोकी चतुर्वेदी, नीतू कुमारी, अनामिका, सुनीता, पम्मी, वीरेंद्र कुमार पांडे, अजय कुमार पांडे, राजकपूर व अभय कुमार सिंह तथा शैलेंद्र कुमार पांडे द्वारा प्रशिक्षण देने का काम शुरू किया गया.
वर्ग एक से आठ के छात्रों के लिए जहां बापू की पाती नाम से प्रशिक्षण दिया गया, वहीं माध्यमिक व उच्च माध्यमिक के लिए एक था मोहन नामक पुस्तक पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है. डीइओ चंद्रशेखर राय ने बताया कि बापू तब भी प्रासंगिक थे और बापू आज भी प्रासंगिक हैं. डीइओ ने बताया कि बापू के पाती पुस्तक में 45 कथा व घटनाओं का जिक्र है.
प्रशिक्षक राजकपूर ने बताया कि प्रशिक्षण में यह भी जानकारी दी गयी कि निष्कर्ष निकालने में जल्दबाजी न करें. गांधी जी धीमी गति से पढ़ने पर बल दिया करते थे. बापू शत्रुओं से बदला नहीं लेने के हिमायती थे. मौके पर एडीपीसी शीला कुमारी, उमेश उपाध्याय, रमेश कुमार, अजय कुमार पंडित, राजेश कुमार व रीतेश कुमार सहित अन्य उपस्थित रहे.
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