Ranchi: राजधानी के 20 फीसदी छोटे अस्पताल-क्लीनिक के पास फायर एनओसी नहीं

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सांकेतिक तस्वीर AI Image

Ranchi: राजधानी रांची में संचालित छोटे अस्पतालों और क्लीनिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई जा रही है. जानकारी के अनुसार, करीब 20 प्रतिशत संस्थानों के पास फायर NOC नहीं है, जिससे अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं. पूरी खबर नीचे पढ़ें…

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राजीव पांडेय
Ranchi: राजधानी में क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट से 16 सरकारी और 293 निजी अस्पताल सूचीबद्ध है. जिला स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सूचीबद्ध अस्पतालों में 20 फीसदी छोटे निजी अस्पताल व क्लीनिक के पास अग्निशमन विभाग का एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं है. वहीं, कई संस्थानों ने एनओसी का नवीकरण नहीं कराया है. इधर, जिन अस्पतालों के पास एनओसी नहीं है वह आवेदन की स्वीकृति के प्रत्याशा में सेवाएं दे रहे है. वहीं, छोटे अस्पताल और क्लीनिक के संचालकों का कहना कि फायर के एनओसी का आवेदन फायर डिपोर्टमेंट में जाकर एक महीने तक पड़ा रहा जाता है. इधर, जिला के क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स सेल से एनओसी के लिए लगातार पत्राचार किया जाता है.

बिहार की घटना से भी नहीं ले रहे सबक

यहां सरकारी और निजी अस्तपालों के सूचीबद्ध होने और फायर एनओसी की बात इसलिए की जा रही है, क्योंकि बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एक अस्पताल के आइसीयू में अग्निकांड की घटना हुई थी. सूत्र यह बताते हैं कि अग्निशमन विभाग का एक बार एनओसी लेने के बाद हर साल इसका नवीकरण कराना पड़ता है. नवीकरण कराने से अग्निशमन विभाग द्वारा कमी पता चलेगा और सुधार भी हो जायेगा.

नयी एजेंसी की तलाश में जुटा रिम्स, पुराने से करार हो गया है खत्म

रिम्स के कई बिल्डिंग में फायर सिलिंडर की वैद्धता समाप्त हो गयी है. रिम्स का कहना है कि दिसंबर में ही एजेंसी से रिम्स का करार खत्म हो गया है. इस बीच दो चरण में फायर सिलिंडर को बदलने की प्रक्रिया चल रही है. 400 फायर सिलिंडर को बदला गया है, लेकिन 200 से अधिक को बदलना है. ऐसे में रिम्स नयी एजेंसी का चयन निविदा के माध्यम से करेगा.

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अमलेश नंदन सिन्हा

लेखक के बारे में

By अमलेश नंदन सिन्हा

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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